1 जुलाई, 2026, दिरांग, अरुणाचल प्रदेश
याक प्रजनन एवं आनुवंशिक सुधार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए भाकृअनुप–राष्ट्रीय याक अनुसंधान केन्द्र (भाकृअनुप–एनआरसीवाई), दिरांग, ने सिक्किम में क्षेत्रीय परिस्थितियों के अंतर्गत याकों में एस्ट्रस सिंक्रोनाइजेशन तथा फिक्स्ड-टाइम कृत्रिम गर्भाधान (एफटीएआई) का सफल प्रदर्शन किया है। यह उपलब्धि देश के दूरस्थ याक-पालन क्षेत्रों तक उन्नत प्रजनन प्रौद्योगिकियों के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
यह कार्यक्रम पूर्वी सिक्किम के ग्नाथांग घाटी में लागू किया गया, जो भारत-चीन सीमा के निकट स्थित एक उच्च हिमालयी याक-पालन गांव है। कठिन भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियों के बावजूद, भाकृअनुप–एनआरसीवाई के वैज्ञानिकों ने पूर्व के तीन प्रयासों के बाद एफटीएआई प्रोटोकॉल को सफलतापूर्वक स्थापित किया, जिससे याक पालकों द्वारा अपनाई जाने वाली पारंपरिक मुक्त-चराई प्रबंधन प्रणाली के अंतर्गत इसकी व्यावहारिक उपयोगिता सिद्ध हुई।
कार्यक्रम में कुल 25 मादा याकों को शामिल किया गया, जिनमें से 14 याकों में फिक्स्ड-टाइम कृत्रिम गर्भाधान के बाद गर्भधारण सफल रहा, जिससे 56 प्रतिशत गर्भधारण दर दर्ज की गई। 29 एवं 30 जून 2026 को मात्र दो दिनों के भीतर 10 स्वस्थ याक बछड़ों का जन्म हुआ, जबकि शेष सफल गर्भधारणों से आने वाले दिनों में बछड़ों के जन्म की अपेक्षा है। ये उत्साहजनक परिणाम दर्शाते हैं कि उच्च हिमालयी याक उत्पादन प्रणालियों में, जहां समय पर हीट (एस्ट्रस) की पहचान एक प्रमुख चुनौती होती है, वहां एफटीएआई को सफलतापूर्वक अपनाया जा सकता है।

यह सफल क्षेत्रीय प्रदर्शन आनुवंशिक रूप से श्रेष्ठ प्रजनन सांडों के उपयोग को बढ़ावा देकर प्रजनन दक्षता में वृद्धि, आनुवंशिक सुधार में तेजी तथा याक पालन की उत्पादकता, लाभप्रदता एवं स्थिरता में सुधार लाने में सहायक होगा। साथ ही, यह हिमाचल प्रदेश तथा लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश सहित अन्य याक-पालन राज्यों में सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकियों के व्यापक प्रसार के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार करता है।
डॉ. मिहिर सरकार, निदेशक, भाकृअनुप–राष्ट्रीय याक अनुसंधान केन्द्र, ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए वैज्ञानिक दल को बधाई दी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वैज्ञानिक नवाचारों को व्यावहारिक अनुप्रयोगों में परिवर्तित करना याक पालक समुदायों की आजीविका में सुधार तथा भारतीय हिमालयी क्षेत्र में सतत याक उत्पादन एवं आनुवंशिक सुधार को सुदृढ़ करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
केन्द्र ने पशुपालन, पशुधन, मत्स्य एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग, सिक्किम सरकार तथा ग्नाथांग घाटी के याक पालकों द्वारा प्रदान किए गए महत्वपूर्ण सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके सक्रिय सहयोग से इस कार्यक्रम का सफल क्रियान्वयन संभव हो सका।
सिक्किम में एस्ट्रस सिंक्रोनाइजेशन एवं फिक्स्ड-टाइम कृत्रिम गर्भाधान (एफटीएआई) का यह सफल प्रदर्शन आईसीएआर–राष्ट्रीय याक अनुसंधान केंद्र की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत याक-पालन क्षेत्रों में प्रजनन प्रबंधन, आनुवंशिक सुधार तथा याक पालन के सतत विकास के लिए किसान-केंद्रित प्रौद्योगिकियों का विकास, प्रमाणीकरण एवं प्रसार किया जा रहा है।
(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय याक अनुसंधान केंद्र, दिरांग, अरुणाचल प्रदेश)







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