भाकृअनुप–केन्द्रीय खारे पानी की जलीय कृषि संस्थान (भाकृअनुप-सीआईबीए), चेन्नई ने खारे पानी के मिट्टी के तालाबों में उच्च घनत्व वाली ब्लू स्विमर केकड़ा (Portunus reticulatus) पालन तकनीक का प्रदर्शन किया। केकड़े के बीजों को प्रति वर्ग मीटर 3 केकड़ों के उच्च घनत्व पर तालाबों में डाला गया।
लगभग 120 दिनों की पालन अवधि में केकड़ों ने 60 प्रतिशत जीवित रहने की दर और औसतन 120 ग्राम वजन प्राप्त किया, जिससे कुल उत्पादकता 2,160 किलोग्राम प्रति हैक्टर रही। इस सफलता का एक प्रमुख आधार विशेष रूप से तैयार किए गए पेलेटयुक्त आहार 'सीआईबीए ब्लू स्विमर क्रैबप्लस' का विशेष उपयोग था। इससे केकड़ों को संतुलित पोषण मिला, जंगली छोटी मछलियों पर निर्भरता कम हुई और तालाब प्रणालियों में पर्यावरणीय स्थिरता बनाए रखने में सहायता

तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले के पुथुनेम्मेली गांव के मेसर्स सक्सेस स्वयं सहायता समूह ने स्थानीय समुद्री खाद्य व्यापारियों के सहयोग से उच्च घनत्व वाले केकड़ा पालन का आजीविका विकास मॉडल प्रदर्शित किया। ताजे काटे गए केकड़ों को तालाब स्थल पर ही स्थानीय व्यापारियों को सीधे 500 रुपये प्रति किलोग्राम की आकर्षक कीमत पर बेचा गया, जिससे तत्काल बाजार उपलब्धता और बेहतर लाभ सुनिश्चित हुआ।
इस प्रदर्शन ने सफल पालन के लिए गुणवत्तापूर्ण, हैचरी में उत्पादित केकड़ा बीजों की विश्वसनीय आपूर्ति के महत्व को रेखांकित किया। लाभकारी मूल्य पर तैयार केकड़ों की तत्काल बिक्री ने ग्रामीण समुदायों और स्वयं सहायता समूहों के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसर के रूप में उच्च घनत्व वाले केकड़ा पालन की मजबूत व्यावसायिक संभावनाओं और आर्थिक व्यवहार्यता को प्रदर्शित किया।
भारतीय जलीय कृषि में ब्लू स्विमर केकड़ा पालन को लोकप्रिय बनाना वर्तमान समय की आवश्यकता है। उच्च मूल्य वाली वैकल्पिक खारे पानी की प्रजाति के रूप में यह उल्लेखनीय जलवायु अनुकूलन क्षमता प्रदान करती है और कम तथा उतार-चढ़ाव वाली लवणता में भी जीवित रह सकती है।

इसकी तीव्र वृद्धि, कम पालन अवधि, उच्च घनत्व में बेहतर जीवित रहने की क्षमता और तैयार पेलेटयुक्त आहार को आसानी से स्वीकार करने की विशेषता इसे किसानों के लिए आर्थिक रूप से अधिक लाभकारी और टिकाऊ विकल्प बनाती है। तटीय क्षेत्रों में इस पर्यावरण अनुकूल मॉडल का विस्तार ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने, जलवायु अनुकूलन क्षमता बढ़ाने और भारत की ब्लू इकोनॉमी के सतत विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यह प्रदर्शन अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) परियोजना के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका विषय बहुप्रजातीय और एकल प्रजातीय पालन प्रणालियों में मड क्रैब और ब्लू स्विमर केकड़े पर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन था। इस पहल ने उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के विविधीकरण और तटीय आजीविका संवर्धन के लिए एक टिकाऊ मॉडल स्थापित किया।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय खारे पानी की जलीय कृषि संस्थान, चेन्नई)








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