21 जुलाई, 2026, कार निकोबार
भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान–कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), निकोबार ने 21 जुलाई, 2026 को कार निकोबार के बिग लापाथी गांव में श्रीमती एस्थर के खेत पर आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान नाबार्ड प्रायोजित परियोजना “निकोबार में बागवानी विकास के माध्यम से आजीविका संवर्धन एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना” कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य सतत एवं जलवायु-सहिष्णु हस्तक्षेपों के माध्यम से निकोबार द्वीप समूह के कृषक समुदाय की बागवानी आधारित आजीविका को सुदृढ़ करना तथा पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम में श्री अमित काले, आईएएस, उपायुक्त, निकोबार जिला, मुख्य अतिथि के रूप में, श्री के. विजयपांडियन, महाप्रबंधक, नाबार्ड, श्री विजयापुरम, विशिष्ट अतिथि के रूप में तथा श्री लियोनाल्ड निकोमेड, मुख्य कप्तान (सीटीसी), कार निकोबार, सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में श्री राकेश बी. पांगट, उप महाप्रबंधक, नाबार्ड, ग्राम कप्तान, भाकृनुप–केवीके निकोबार के वैज्ञानिक एवं कर्मचारी, लाभार्थी किसान तथा अन्य आमंत्रित गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने परियोजना के अंतर्गत स्थापित प्रमुख अवसंरचनाओं, जिनमें एक पॉलीहाउस तथा जल संचयन संरचना (जलकुंड) शामिल हैं, का उद्घाटन किया और श्रीमती एस्थर के प्रदर्शन खेत का अवलोकन किया। उन्होंने निकोबार जिले के जनजातीय समुदायों के लिए सतत बागवानी पद्धतियों को बढ़ावा देने में आईसीएआर–केवीके निकोबार और नाबार्ड के संयुक्त प्रयासों की सराहना की।
गणमान्य अतिथियों एवं लाभार्थी किसानों का स्वागत करते हुए, भाकृअनुप–केवीके निकोबार के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख ने नाबार्ड प्रायोजित परियोजना का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया तथा इसके प्रमुख उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इनमें बागवानी आधारित आजीविका अवसरों को बढ़ावा देना, जनजातीय परिवारों में पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करना, उन्नत खेती प्रौद्योगिकियों का परिचय कराना, जलवायु-सहिष्णु कृषि प्रणालियों का विकास करना, प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों की क्षमता निर्माण करना तथा किसानों के खेतों में सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों की स्थापना करना शामिल है, जिससे जल का दक्ष उपयोग सुनिश्चित हो सके तथा एल नीनो से प्रेरित शुष्क अवधि एवं जल संकट के प्रति लचीलापन बढ़ाया जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह परियोजना किसानों की आय बढ़ाने, सतत कृषि विकास को प्रोत्साहित करने तथा निकोबार द्वीप समूह के जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
सभा को संबोधित करते हुए, श्री के. विजयपांडियन, महाप्रबंधक, नाबार्ड, श्री विजयापुरम, ने कार निकोबार में इस परियोजना के रणनीतिक महत्व और व्यावहारिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस पहल को द्वीप की विशिष्ट कृषि-जलवायु संबंधी चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक स्थान-विशिष्ट हस्तक्षेप के रूप में तैयार किया गया है तथा इसमें जिले के अन्य जनजातीय गांवों में भी विस्तार और पुनरावृत्ति की प्रबल संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि संरक्षित खेती संरचनाओं और जल संचयन इकाइयों जैसे स्थानीयकृत मॉडल व्यावहारिक और विस्तार योग्य समाधान प्रदान करते हैं, जिन्हें जनजातीय कृषक परिवार आसानी से अपना सकते हैं। नाबार्ड और भाकृअनुप–केवीके निकोबार के बीच साझेदारी की सराहना करते हुए उन्होंने किसानों को परियोजना में सक्रिय भागीदारी करने और दीर्घकालिक आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए उन्नत बागवानी प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
श्री लियोनाल्ड निकोमेड, मुख्य कप्तान (सीटीसी), कार निकोबार, ने निकोबार द्वीप समूह में बागवानी आधारित आजीविका को सुदृढ़ करने और पोषण सुरक्षा में सुधार के उद्देश्य से शुरू की गई इस पहल के लिए नाबार्ड और भाकृअनुप–केवीके निकोबार के संयुक्त प्रयासों की प्रशंसा की।

कार्यक्रम के दौरान, श्री अमित काले, आईएएस, उपायुक्त, निकोबार जिले तथा श्री लियोनाल्ड निकोमेड, मुख्य कप्तान (सीटीसी), कार निकोबार, ने चयनित लाभार्थियों को बागवानी आदान एवं परियोजना सामग्री वितरित की, जिसके साथ ही नाबार्ड प्रायोजित परियोजना के क्षेत्रीय स्तर पर क्रियान्वयन का औपचारिक शुभारंभ हुआ।
अपने संबोधन में श्री अमित काले, आईएएस ने परियोजना के शुभारंभ के लिए नाबार्ड और भाकृअनुप–केवीके निकोबार को बधाई दी तथा जनजातीय कृषक समुदाय के लिए आवश्यकता-आधारित कृषि हस्तक्षेपों को बढ़ावा देने हेतु केवीके की सराहना की। उन्होंने अधिकाधिक किसानों को लाभान्वित करने के लिए परियोजना की पहुंच का विस्तार करने, परियोजना गतिविधियों एवं सफलता की कहानियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण बनाए रखने तथा निकोबार में कोकोपीट के वैज्ञानिक उत्पादन और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देकर सतत आजीविका के अवसर सृजित करने के महत्व पर बल दिया।
यह उद्घाटन कार्यक्रम डॉ. जय सुंदर, निदेशक, भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजयापुरम, के समग्र मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिनके नेतृत्व और मार्गदर्शन ने नाबार्ड प्रायोजित परियोजना की सफल योजना एवं क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजयापुरम)







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