5 जनवरी, 2026, श्री विजया पुरम
पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय नंबर 2, श्री विजया पुरम के कुल 240 छात्रों ने आज कृषि अनुसंधान, नवाचार एवं स्थायी खेती के तरीकों से छात्रों को परिचित कराने के उद्देश्य से एक एक्सपोजर कार्यक्रम के हिस्से के रूप में भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान का दौरा किया।
कार्यक्रम के दौरान, छात्रों को मत्स्य विज्ञान, बागवानी, एकीकृत खेती प्रणालियों, एक्वाकल्चर उद्यमिता, औषधीय पौधों तथा स्मार्ट कृषि प्रौद्योगिकियों के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया गया। तालाब पारिस्थितिकी तंत्र की गतिशीलता पर एक इंटरैक्टिव सत्र में मछली के स्वास्थ्य तथा उत्पादकता के लिए आवश्यक घुलित ऑक्सीजन के स्तर को बनाए रखने में प्रकाश संश्लेषण, पारिस्थितिकी तंत्र घटकों और पानी की गुणवत्ता मापदंडों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। ऑक्सीजन की कमी के दौरान एरेटर के महत्व और तालाब की उत्पादकता पर कम ऑक्सीजन के स्तर के प्रभाव पर भी चर्चा की गई, जिसमें व्यावहारिक मत्स्य प्रबंधन पर जोर दिया गया।
एक अन्य सत्र में साल भर सब्जी उत्पादन प्रणालियों पर ध्यान केन्द्रित किया गया, जिसमें विभिन्न तरीकों और प्रथाओं को समझाया गया जो सब्जियों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियों के पोषण संबंधी महत्व को विस्तार से बताया गया, जिसमें आवश्यक विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करने में उनकी भूमिका, साथ ही उनके स्वास्थ्य लाभ एवं स्थायी कृषि में उनके महत्व पर प्रकाश डाला गया।
छात्रों को एकीकृत खेती प्रणाली के बारे में भी बताया गया, जिसमें दिखाया गया कि विभिन्न कृषि घटक एक दूसरे के साथ तालमेल से कैसे काम करते हैं। इस दृष्टिकोण को इष्टतम संसाधन उपयोग, कृषि अपशिष्ट के पुनर्चक्रण, इनपुट लागत में कमी और समग्र कृषि उत्पादकता में वृद्धि के लिए एक कुशल तरीके के रूप में समझाया गया, जिससे स्थायी तरीके से उच्च आर्थिक रिटर्न मिलता है।
द्वीप के किसानों के लिए वैकल्पिक आजीविका के रूप में एक्वेरियम विकास और इसकी क्षमता पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई। छात्रों को महत्वपूर्ण एक्वेरियम प्रजातियों के बारे में सूचित किया गया, जिसमें अंडमान क्षेत्र की विदेशी एवं स्थानिक किस्में शामिल हैं, साथ ही स्थायी आय सृजन को बढ़ावा देने में उनका दायरा बताया गया।
इसके अलावा, छात्रों को डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम औषधीय उद्यान के बारे बारे में बताया गया, जिसमें औषधीय तथा चिकित्सीय पौधों की प्रजातियों का एक विविध संग्रह है। सत्र का उद्देश्य क्षेत्रीय जैव विविधता एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के बारे में जागरूकता पैदा करना था। स्वचालित सिंचाई के लिए आईओटी - आधारित मिट्टी सेंसर जैसी स्मार्ट प्रौद्योगिकियों के एकीकरण को भी प्रदर्शित किया गया, जिसमें कुशल जल प्रबंधन समाधान को सबके सामने पेश किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत द्वीप पारिस्थितिकी तंत्र में कृषि विकास की दिशा में संस्थान की भूमिका एवं योगदान के अवलोकन के साथ हुई। एक्सपोजर विजिट ने छात्रों को आधुनिक कृषि अनुसंधान, स्थिरता तथा नवाचार में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान की, जिससे कृषि-विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी-संचालित खेती पद्धतियों में रुचि जागी।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजया पुरम)







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