5 जून, 2026, श्री विजय पुरम
राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान 2026 तथा विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के उपलक्ष्य में, भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजय पुरम ने अपने कृषि विज्ञान केन्द्रों, कृषि विभाग, यूटी-आत्मा तथा वन विभाग के सहयोग से अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रमों और वृक्षारोपण अभियानों की एक श्रृंखला का आयोजन किया।
दक्षिण अंडमान जिले में भाकृअनुप-सीआईएआरआई, भाकृअनुप-केवीके दक्षिण अंडमान तथा कृषि विभाग, यूटी-आत्मा ने संयुक्त रूप से बेओडनाबाद और चौल्डारी गांवों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। बेओडनाबाद में आयोजित कार्यक्रम में जिला परिषद सदस्य श्री एस. बूमिनाथन, पंचायत समिति सदस्य श्रीमती पचियम्मल तथा उप वन क्षेत्राधिकारी श्री दीपु जी. उन्नीथन उपस्थित रहे।

इसी दौरान, भाकृअनुप-केवीके उत्तर एवं मध्य अंडमान ने यूटी-आत्मा, कृषि विभाग तथा वन विभाग के सहयोग से केवीके, निंबुडेरा में एक वृक्षारोपण अभियान आयोजित किया। साथ ही हरिनगर पंचायत के अंतर्गत बिलीग्राउंड में दीया स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिए एक जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक स्थिरता के संदेश को सुदृढ़ करने के लिए केवीके परिसर में पौधारोपण किया गया।
कार्यक्रमों के दौरान वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने सतत फसल उत्पादन के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक खेती, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) तथा समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) के महत्व पर बल दिया। प्रतिभागियों को मृदा उर्वरता बनाए रखने, फसल उत्पादकता बढ़ाने तथा रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करने में जैविक और प्राकृतिक खेती पद्धतियों की भूमिका के प्रति जागरूक किया गया। किसानों और स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को विशेष रूप से पोषण वाटिकाओं में सुरक्षित और पौष्टिक सब्जियों के उत्पादन हेतु पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियाँ अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

विशेषज्ञों ने वर्मीकम्पोस्टिंग के माध्यम से खेतों और घरेलू जैविक अपशिष्टों के पुनर्चक्रण के लाभों पर भी प्रकाश डाला। पशुधन रखने वाले स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद तैयार करने के लिए गोबर और स्थानीय रूप से उपलब्ध जैविक पदार्थों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे सतत अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा मिले और मृदा स्वास्थ्य में सुधार हो।
कार्यक्रमों का समापन वैज्ञानिकों, किसानों और स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के बीच संवादात्मक चर्चाओं के साथ हुआ, जिससे प्रतिभागियों को क्षेत्रीय स्तर की चुनौतियों के वैज्ञानिक समाधान प्राप्त करने तथा सतत कृषि और पर्यावरण संरक्षण के संबंध में व्यावहारिक ज्ञान अर्जित करने का अवसर मिला।
चौल्डारी गांव में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में 24 किसानों ने भाग लिया, जबकि हरिनगर पंचायत के अंतर्गत आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में कुल 15 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजय पुरम)







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