31 जुलाई, 2026, उमियम, मेघालय
महिला-नेतृत्व वाली मत्स्य गतिविधियों और सतत आजीविका विकास को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करते हुए, भाकृअनुप–केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीआईएफआरआई), बैरकपुर ने अपने नॉर्थ ईस्टर्न हिल्स एवं ट्राइबल सब-प्लान (टीएसपी) कार्यक्रमों के अंतर्गत मेघालय के उमियम जलाशय में 25 जनजातीय महिला मत्स्यजीवी परिवारों को केज नेट तथा कोराकल वितरित किए।
उमियम जलाशय पूर्वोत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण अंतर्देशीय मत्स्य संसाधनों में से एक है, जो अनेक जनजातीय मत्स्यजीवी समुदायों की आजीविका का आधार है। विज्ञान-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से भाकृअनुप-सीआईएफआरआई जलाशय में मत्स्य क्षेत्र को रूपांतरित कर रहा है, जिसमें केज एक्वाकल्चर, संस्कृति-आधारित मत्स्य पालन, मत्स्य भंडार संवर्धन, क्षमता निर्माण तथा वैज्ञानिक संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन पहलों ने मत्स्य उत्पादन में वृद्धि, आजीविका सुरक्षा में सुधार तथा मत्स्य-आधारित उद्यमों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
28 और 31 जुलाई, 2026 को आयोजित वितरण कार्यक्रमों का संचालन आईसीएआर-सीआईएफआरआई क्षेत्रीय केंद्र, गुवाहाटी द्वारा मेघालय के री-भोई फार्मर्स यूनियन (आरएफयू) तथा मेघालय सरकार के मत्स्य विभाग के सहयोग से किया गया। इस पहल के अंतर्गत केज एक्वाकल्चर को समर्थन देने के लिए वैज्ञानिक रूप से डिज़ाइन किए गए छह केज नेट वितरित किए गए, जबकि केज कल्चर एवं जलाशय मत्स्य पालन में संलग्न महिलाओं की गतिशीलता, परिचालन दक्षता और सुरक्षा में सुधार के लिए कोराकल उपलब्ध कराए गए।

यह कार्यक्रम डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, के मार्गदर्शन में तथा मेघालय सरकार के मत्स्य निदेशक के समन्वय से संचालित किया गया।
अपने संदेश में डॉ. डे ने विज्ञान-आधारित मत्स्य हस्तक्षेपों के माध्यम से जनजातीय एवं तटीय समुदायों को सशक्त बनाने के प्रति आईसीएआर-सीआईएफआरआई की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि केज नेट और कोराकल का वितरण महिला-नेतृत्व वाली मत्स्य गतिविधियों को सुदृढ़ करेगा, सतत आजीविका को बढ़ावा देगा तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंतर्देशीय मत्स्य पालन की लचीलापन क्षमता को बढ़ाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक मत्स्य प्रौद्योगिकियों को सामुदायिक सहभागिता के साथ एकीकृत करने से महिला-नेतृत्व वाली उद्यमशीलता को बढ़ावा मिल रहा है और अंतर्देशीय मत्स्य मूल्य श्रृंखलाएं मजबूत हो रही हैं। संस्थान की व्यापक दृष्टि पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि भाकृअनुप- सीआईएफआरआई के हस्तक्षेप केवल मत्स्य उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका उद्देश्य ऐसी सुदृढ़ मत्स्य संस्थाओं का निर्माण करना भी है जो रोजगार सृजन करें, संसाधन संरक्षण को बढ़ावा दें, पूर्वोत्तर क्षेत्र में समावेशी आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करें तथा विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण में योगदान दें।
लाभार्थियों को संबोधित करते हुए री-भोई फार्मर्स यूनियन के अध्यक्ष श्री डी. मजाव ने जनजातीय मत्स्यजीवी समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए भाकृअनुप-सीआईएफआरआई और यूनियन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने संस्थान द्वारा प्रदान किए जा रहे निरंतर वैज्ञानिक सहयोग की सराहना की, जिसने मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की है और जलाशय पर निर्भर परिवारों के लिए सतत आजीविका के अवसर सृजित किए हैं।
कार्यक्रम में पूर्वोत्तर भारत के मध्यम ऊंचाई वाले जलाशयों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त केज कल्चर प्रौद्योगिकी के सफल विकास को भी प्रदर्शित किया गया। सहभागी दृष्टिकोणों के माध्यम से संस्थान केज एक्वाकल्चर, संस्कृति-आधारित मत्स्य पालन, जैव विविधता संरक्षण तथा एक्वा-पर्यटन को बढ़ावा देना जारी रखे हुए है, जिसमें मत्स्य-आधारित उद्यमों के माध्यम से जनजातीय महिलाओं के सशक्तीकरण पर विशेष बल दिया गया है।

प्रतिभागियों को वैज्ञानिक केज कल्चर की मानक संचालन प्रक्रियाओं तथा कोराकल के सुरक्षित संचालन का भी प्रदर्शन किया गया, जिसमें जलाशय मत्स्य गतिविधियों के लिए सर्वोत्तम प्रबंधन प्रथाओं और सुरक्षा उपायों पर विशेष जोर दिया गया।
लाभार्थियों की ओर से भाकृअनुप-सीआईएफआरआई को उसके निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन और इनपुट सहायता के लिए आभार व्यक्त किया गया। लाभार्थियों ने कहा कि यह सहायता जनजातीय महिला मत्स्यजीवियों की आजीविका को महत्वपूर्ण रूप से सुदृढ़ करेगी और मत्स्य-आधारित उद्यमों में महिलाओं की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करेगी।
केज नेट और कोराकल का वितरण विज्ञान-आधारित, समुदाय-केंद्रित हस्तक्षेपों के माध्यम से सतत अंतर्देशीय मत्स्य पालन को बढ़ावा देने, महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को सुदृढ़ करने, मत्स्य उत्पादन बढ़ाने तथा पूर्वोत्तर भारत के जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण में सुधार लाने के लिए आईसीएआर-सीआईएफआरआई के प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, पश्चिम बंगाल)







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