28 सितंबर, 2026, फरक्का
भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीआईएफआरआई), बैरकपुर ने गंगा नदी के किनारे स्थित हिल्सा रैंचिंग स्टेशन, गांधी घाट, फरक्का में स्वच्छता अभियान 2026 का आयोजन किया। इसका उद्देश्य पर्यावरणीय स्वच्छता को बढ़ावा देना, जलीय पारिस्थितिकी तंत्रों की रक्षा करना और नदी के स्वास्थ्य, मत्स्य पालन की स्थिरता तथा मानव कल्याण के बीच अंतर्संबंध के बारे में जन जागरूकता को मजबूत करना था।
अभियान में हिल्सा रैंचिंग स्टेशन के आसपास स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित किया गया, जो गंगा नदी में हिल्सा संरक्षण और रैंचिंग गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है। पहल के तहत नदी के किनारे और आसपास के क्षेत्रों की सफाई की गई तथा प्लास्टिक कचरा, पॉलीथिन, फेंकी गई सामग्री और अन्य अवांछित कचरे को एकत्र कर हटाया गया। इस अभियान ने नदीय पारिस्थितिकी तंत्रों की रक्षा और जलीय जैव विविधता के संरक्षण में सामूहिक जिम्मेदारी के महत्व को रेखांकित किया।

यह पहल 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफआरआई के मार्गदर्शन में आयोजित किए जा रहे स्वच्छता अभियान और सुधार उत्सव के व्यापक उद्देश्यों के अनुरूप भी है, जिसमें संस्थागत जिम्मेदारी, सामुदायिक भागीदारी, स्वच्छता और सतत प्रथाओं पर जोर दिया गया है। जमीनी स्तर पर स्वच्छता गतिविधियों को जागरूकता सृजन के साथ जोड़कर, भाकृअनुप-सीआईएफआरआई ने पर्यावरणीय जागरूकता को सार्थक कार्रवाई में बदलने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
अभियान के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए डॉ. डे ने जोर दिया कि गंगा नदी की स्वच्छता बनाए रखना न केवल पर्यावरणीय स्थिरता के लिए, बल्कि जलीय जैव विविधता के संरक्षण, मछुआरा समुदायों के कल्याण और जन स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने रेखांकित किया कि मत्स्य संसाधनों को बनाए रखने और हिल्सा रैंचिंग जैसी पहलों को समर्थन देने के लिए स्वच्छ नदी मूलभूत आवश्यकता है। डॉ. डे ने आगे जोर दिया कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण वैज्ञानिक संस्थानों, सरकारी एजेंसियों, उद्योगों और स्थानीय समुदायों की साझा जिम्मेदारी बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि सामूहिक भागीदारी एक स्वस्थ पर्यावरण के निर्माण और नदीय संसाधनों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
भाकृअनुप-सीआईएफआरआई के प्रधान वैज्ञानिक ने स्वच्छता अभियान 2026 के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और जोर दिया कि नदी की स्वच्छता सीधे जलीय जीवों के स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी तंत्र की अखंडता और मानव स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है। उन्होंने वन हेल्थ दृष्टिकोण की ओर ध्यान आकर्षित किया, जो मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के बीच परस्पर संबंध को मान्यता देता है तथा जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन और निरंतर सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से जलीय आवासों की रक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम में एनटीपीसी, फरक्का बैराज प्राधिकरण, सीआईएसएफ और स्थानीय मछुआरा समुदायों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति सहयोगात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
इस पहल ने स्वच्छता और पर्यावरणीय संरक्षण को बढ़ावा देने में संस्थागत प्रतिबद्धता, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और सामुदायिक भागीदारी के महत्व को उजागर किया। इस अभियान के माध्यम से, आईसीएआर-सीआईएफआरआई ने दोहराया कि स्वच्छ नदियां, स्वस्थ जलीय पारिस्थितिकी तंत्र और सतत मत्स्य पालन एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं। इस पहल ने वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए गंगा नदी की रक्षा करने तथा इसके पारिस्थितिक और आजीविका संबंधी महत्व को संरक्षित करने के लिए निरंतर सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)







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