भाकृअनुप-सीआईएफई, मुंबई ने उत्कृष्टता के 66 वर्ष पूरे होने का मनाया उत्सव

भाकृअनुप-सीआईएफई, मुंबई ने उत्कृष्टता के 66 वर्ष पूरे होने का मनाया उत्सव

6 जून, 2026, मुंबई

“नवाचार, एकीकरण और प्रभाव” ने 2026-27 के लिए रोडमैप निर्धारित किया

भाकृअनुप-केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान (भाकृअनुप-सिफे), मुंबई, ने आज अत्यंत उत्साह और गर्व के साथ अपना 66वाँ स्थापना दिवस मनाया, जो मात्स्यिकी शिक्षा, अनुसंधान, विस्तार तथा उद्यमिता के क्षेत्र में उत्कृष्टता की अपनी विशिष्ट यात्रा का एक तथा महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मुंबई उपनगरीय जिले के जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री सौरभ कटियार, आईएएस उपस्थित रहे। इस अवसर पर संस्थान के पूर्व निदेशक, संयुक्त निदेशक, संकाय सदस्य, कर्मचारी, विद्यार्थी, पूर्व छात्र, किसान, उद्यमी, उद्योग प्रतिनिधि, नीति-निर्माता तथा देशभर से आए विभिन्न हितधारक एक साथ जुड़े। यह आयोजन केवल एक स्मरणोत्सव तक सीमित नहीं था, बल्कि एक दूरदर्शी संस्थागत अभ्यास के रूप में आयोजित किया गया, जिसने इस वर्ष की थीम “नवाचार, एकीकरण और प्रभाव” की भावना को प्रतिबिंबित किया।

ICAR-CIFE, Mumbai Celebrates 66 Years of Excellence

स्थापना दिवस कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. एन.पी. साहू, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफई, द्वारा वर्ष 2026-2027 की वार्षिक थीम “नवाचार, एकीकरण और प्रभाव” की घोषणा के साथ हुआ। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नवाचार को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नीति तथा हितधारकों की आवश्यकताओं के प्रभावी एकीकरण के माध्यम से अंततः मापनीय सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव में परिवर्तित होना चाहिए। उन्होंने वर्ष 2025-26 के दौरान संस्थान की वैज्ञानिक, शैक्षणिक तथा विस्तार संबंधी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और भाकृअनुप-सीआईएफई की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को सुदृढ़ बनाने में पूर्व निदेशकों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों तथा हितधारकों के अमूल्य योगदान की सराहना की। इसके पश्चात कार्यवाहक संयुक्त निदेशक डॉ. के. एन. मोहंता ने वर्ष 2026-27 के लिए थीम कार्यान्वयन दिशा-निर्देश एवं रोडमैप प्रस्तुत किया।

सभा को संबोधित करते हुए श्री सौरभ कटियार, आईएएस ने मात्स्यिकी क्षेत्र के प्रति 66 वर्षों की समर्पित सेवा पूर्ण करने पर भाकृअनुप-सीआईएफई परिवार को बधाई दी तथा मानव संसाधन विकास, प्रौद्योगिकी सृजन और जलीय कृषि उन्नयन की दिशा में संस्थान के योगदान की सराहना की। उन्होंने भाकृअनुप प्रणाली के साथ अपने जुड़ाव को स्मरण करते हुए भाकृअनुप-सीआईएफई द्वारा सृजित महत्वपूर्ण प्रभाव को स्वीकार किया तथा भविष्य की संस्थागत पहलों, जिनमें अवसंरचना विकास एवं विस्तार परियोजनाएँ शामिल हैं, के लिए सहयोग का आश्वासन दिया।

इस वर्ष के समारोह की एक विशिष्ट विशेषता वैज्ञानिक एवं हितधारक सहभागिता गतिविधियों की श्रृंखला का आयोजन रहा। 5 जून 2026 को भाकृअनुप-सीआईएफई ने “विकसित भारत 2047 के लिए जलीय कृषि में प्रौद्योगिकी-आधारित स्थिरता” विषय पर एक हितधारक परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें शिक्षाविदों, उद्योग, सरकारी संगठनों, उद्यमियों तथा किसानों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर उभरती चुनौतियों और भविष्य की अनुसंधान प्राथमिकताओं की पहचान की। यह आयोजन विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर के साथ भी जुड़ा रहा, जिसके दौरान “एक पेड़ माँ के नाम” के अंतर्गत वृक्षारोपण गतिविधियाँ आयोजित की गईं तथा “पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित मत्स्य प्रबंधन: एक इकोपाथ दृष्टिकोण” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान प्रस्तुत किया गया।

“लर्निंग फ्रॉम मिस्टेक्स” विषयक एक अभिनव पुस्तक का विमोचन भी किया गया, जो भारत भर के स्नातकोत्तर मात्स्यिकी विद्यार्थियों द्वारा शैक्षणिक एवं अनुसंधान अनुभवों से प्राप्त सीख का संकलन है। यह प्रकाशन ज्ञान-साझेदारी, सतत अधिगम तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रति आईसीएआर-सीआईएफई की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी में किसानों, उद्यमियों, विद्यार्थियों, आगंतुकों और हितधारकों के लिए भाकृअनुप-सीआईएफई की प्रौद्योगिकियों, उत्पादों तथा अनुसंधान नवाचारों का प्रदर्शन किया गया।

ICAR-CIFE, Mumbai Celebrates 66 Years of Excellence

स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान भाकृअनुप-सीआईएफई समुदाय की उपलब्धियों का भी उत्सव मनाया गया, जिसमें विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों के बीच उत्कृष्टता को सम्मानित करने हेतु खेल पुरस्कार, संस्थागत पुरस्कार तथा एंडोमेंट पुरस्कार वितरित किए गए। पूर्व छात्र मिलन, खेल प्रतियोगिताएँ तथा विद्यार्थियों, कर्मचारियों और उनके परिवारजनों की प्रस्तुतियों से सुसज्जित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह को उत्सवपूर्ण और समावेशी स्वरूप प्रदान किया, जिससे यह अवसर वास्तव में अविस्मरणीय बन गया।

स्थापना दिवस समारोह मुंबई से आगे बढ़कर भाकृअनुप-सीआईएफई के कोलकाता, मोतीपुर, रोहतक, पावरखेड़ा, काकीनाडा और बलभद्रपुरम स्थित केंद्रों में भी एक साथ आयोजित किए गए, जिससे कार्यक्रम की पहुँच और प्रभाव का उल्लेखनीय विस्तार हुआ। हितधारक बैठकों, किसान-वैज्ञानिक संवादों, प्रौद्योगिकी प्रदर्शनों तथा विस्तार कार्यक्रमों के माध्यम से 400 से अधिक किसानों, उद्यमियों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और उद्योग प्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित हुई। चर्चाओं का केंद्र गुणवत्तापूर्ण बीज एवं आहार, रोग प्रबंधन, जलवायु-अनुकूल जलीय कृषि, अंतर्देशीय लवणीय जलीय कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोग, उद्यमिता विकास, प्रसंस्करण अवसंरचना, बाजार संपर्क तथा प्रौद्योगिकी अपनाने जैसे विषय रहे।

इस प्रकार, भाकृअनुप-सीआईएफई का 66वाँ स्थापना दिवस केवल एक वर्षगांठ समारोह से कहीं अधिक सिद्ध हुआ। यह संस्थागत उपलब्धियों की समीक्षा, हितधारक साझेदारियों को सुदृढ़ बनाने, प्रौद्योगिकियों के प्रदर्शन तथा भविष्य की कार्ययोजना तैयार करने के लिए एक रणनीतिक मंच के रूप में उभरा। “नवाचार, एकीकरण और प्रभाव” विषय-वस्तु के मार्गदर्शन में संस्थान ने मात्स्यिकी शिक्षा, हितधारक-उन्मुख अनुसंधान, उद्यमिता संवर्धन, सतत जलीय कृषि विकास तथा प्रौद्योगिकी-आधारित विकास के प्रति उत्कृष्टता की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, मुंबई)

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