भाकृअनुप-सीआईएफटी, कोच्चि की प्रदर्शनी में समुद्री कचरे से निर्मित मूल्यवर्धित उत्पादों का प्रदर्शन, जिनमें पुनर्चक्रित प्लास्टिक पेलेट्स और निर्माण कार्यों में उपयोगी कंपोजिट सामग्री शामिल

भाकृअनुप-सीआईएफटी, कोच्चि की प्रदर्शनी में समुद्री कचरे से निर्मित मूल्यवर्धित उत्पादों का प्रदर्शन, जिनमें पुनर्चक्रित प्लास्टिक पेलेट्स और निर्माण कार्यों में उपयोगी कंपोजिट सामग्री शामिल

29 अक्टूबर, 2026, कोच्चि

भाकृअनुप–केन्द्रीय मात्स्यिकी प्रौद्योगिकी संस्थान (भाकृअनुप-सीआईएफटी), कोच्चि ने अपने स्वच्छता कार्य योजना के तहत ‘अपशिष्ट से उपयोगी उत्पाद’ प्रदर्शनी का आयोजन किया। इसमें समुद्री कचरे, विशेष रूप से मछली पकड़ने की गतिविधियों से उत्पन्न अपशिष्ट को मूल्यवर्धित उत्पादों में परिवर्तित करने के नवाचारपूर्ण तरीकों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में सरल प्रौद्योगिकियों और पुनर्चक्रण विधियों के माध्यम से फेंके गए मछली पकड़ने के उपकरणों, प्लास्टिक कचरे और नावों की सामग्री को उपयोगी उत्पादों में बदलने की संभावनाओं को रेखांकित किया गया। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण, कौशल विकास और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

प्रदर्शनी का एक प्रमुख आकर्षण समुद्री प्लास्टिक कचरे को पुनर्चक्रित प्लास्टिक पेलेट्स और सीमेंट आधारित कंपोजिट सामग्री में परिवर्तित करना था, जिनका निर्माण एवं अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में उपयोग किया जा सकता है। प्रदर्शित नमूनों में यह दर्शाया गया कि समुद्र से एकत्रित कचरे को किस प्रकार संसाधित कर पेलेट्स बनाया जा सकता है और उन्हें सीमेंट आधारित कंपोजिट सामग्री में शामिल किया जा सकता है, जिससे उनके उत्पादक उपयोग की संभावनाएं विकसित होती हैं। ये दृष्टिकोण, उपयुक्त परीक्षण और गुणवत्ता मानकों के अधीन, फेंके गए प्लास्टिक को नए उत्पादों के लिए संभावित कच्चे माल में परिवर्तित करके चक्रीय अर्थव्यवस्था की कार्यप्रणालियों को बढ़ावा देते हैं।

ICAR-CIFT, Kochi Exhibition Showcases Value-Added Products from Marine Litter, Including Recycled Plastic Pellets and Construction Composites

प्रदर्शनी में फेंके गए मछली पकड़ने के उपकरणों और नावों की सामग्री से तैयार विभिन्न प्रकार के उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए। इनमें कला एवं शिल्प की वस्तुएं, आभूषण, सजावटी संरचनाएं, फूलदान, पौधों के गमले, पेविंग टाइल्स और इंजेक्शन-मोल्डिंग से निर्मित उत्पाद शामिल थे। इन प्रदर्शों ने दर्शाया कि समुद्री प्रदूषण का कारण बनने वाली सामग्रियों का व्यावहारिक और सौंदर्यपरक उपयोगों के लिए पुनः उपयोग कैसे किया जा सकता है।

फेंके गए मछली पकड़ने के जालों और रस्सियों से तैयार जेलीफिश के एक मॉडल तथा फेंके गए मछली पकड़ने के उपकरणों से बनाए गए नाव के मॉडल ने आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। मछलियों, समुद्री कछुओं और अन्य समुद्री जीवों के मॉडल ने परित्यक्त, खोए हुए या अन्यथा फेंके गए मछली पकड़ने के उपकरणों (एएलडीएफजी) के रचनात्मक पुनः उपयोग की संभावनाओं को भी प्रदर्शित किया। इन प्रदर्शों ने बताया कि समुद्री कचरे को पर्यावरणीय बोझ बने रहने देने के बजाय उपयोगी उत्पादों में बदला जा सकता है।

फाइबर-प्रबलित प्लास्टिक (एफआरपी) से बनी फेंकी गई नावों की सामग्री से तैयार उत्पादों, जिनमें फूलदान और अन्य सजावटी एवं उपयोगी वस्तुएं शामिल थीं, को भी प्रदर्शित किया गया। इन सभी प्रदर्शों ने समुद्री कचरे के उपयोग के विभिन्न तरीकों को रेखांकित किया, जिनमें कलात्मक वस्तुओं और घरेलू उत्पादों से लेकर पुनर्चक्रित प्लास्टिक पेलेट्स तथा निर्माण कार्यों में उपयोगी कंपोजिट सामग्री तक शामिल हैं।

 

ICAR-CIFT, Kochi Exhibition Showcases Value-Added Products from Marine Litter, Including Recycled Plastic Pellets and Construction Composites

इस पहल का उद्देश्य समुद्री कचरे के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा मछुआरा महिलाओं, युवाओं और विद्यार्थियों को मछली पकड़ने की गतिविधियों से उत्पन्न कचरे को उपयोगी और संभावित रूप से बाजार में बेचे जा सकने वाले उत्पादों में बदलने के व्यावहारिक कौशल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है। सुलभ प्रौद्योगिकियों और पुनः उपयोग की नवाचारपूर्ण विधियों के माध्यम से यह कार्यक्रम आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने के साथ-साथ जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन को प्रोत्साहित करने और फेंकी गई मछली पकड़ने की सामग्रियों के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने का प्रयास करता है।

एमईएस अस्माबी कॉलेज, पडिंजारे वेम्बल्लूर के विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी का दौरा किया और समुद्री कचरे तथा फेंकी गई एफआरपी नावों की सामग्री से विकसित उत्पादों को देखा। समुद्री कचरे के प्रभावों और उन्हें कम करने के उपायों पर एक तकनीकी सत्र का आयोजन भाकृअनुप-सीआईएफटी के मत्स्यन प्रौद्योगिकी प्रभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक द्वारा किया गया।

डॉ. जॉर्ज निनान, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफटी, ने उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।

(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय मात्स्यिकी प्रौद्योगिकी संस्थान, कोच्चि)

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