15 सितंबर 2026, कोच्चि
भाकृअनुप-केन्द्रीय मात्स्यिकी प्रौद्योगिकी संस्थान, कोच्चि को एक नवीन रोगाणुरोधी बूस्टर प्रौद्योगिकी के लिए भारतीय पेटेंट प्रदान किया गया है। “पिगमेंट-डोप्ड जिंक ऑक्साइड कणों की तैयारी की एक प्रक्रिया” शीर्षक वाले इस आविष्कार में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले सूक्ष्मजीवी पिगमेंट वायोलेसिन के साथ जिंक ऑक्साइड नैनोकणों की कोटिंग की एक विधि प्रदान की गई है।
बैक्टीरियल पिगमेंट प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले रंगीन पदार्थ होते हैं, जिनका उत्पादन कुछ बैक्टीरिया द्वारा किया जाता है। वायोलेसिन, एक बैंगनी रंग का सूक्ष्मजीवी पिगमेंट है, जो कुछ बैक्टीरिया, विशेष रूप से Chromobacterium violaceum, द्वारा उत्पादित होता है और अपने रोगाणुरोधी गुणों के लिए जाना जाता है।
जिंक ऑक्साइड नैनोकण (ZnO-NPs) भी अपने रोगाणुरोधी गुणों के लिए जाने जाते हैं। पेटेंट की गई प्रक्रिया एक कोटिंग प्रक्रिया के माध्यम से वायोलेसिन को ZnO नैनोकणों के साथ संयोजित करती है। परीक्षण की गई परिस्थितियों में, वायोलेसिन-लेपित ZnO नैनोकणों ने बिना कोटिंग वाले ZnO नैनोकणों की तुलना में बढ़ी हुई रोगाणुरोधी गतिविधि और कम विषाक्तता प्रदर्शित की। परिणामों में परीक्षण की गई परिस्थितियों में पूर्ववर्ती सामग्री की तुलना में लगभग 3–4 गुना अधिक रोगाणुरोधी गतिविधि प्रदर्शित हुई।
इस प्रौद्योगिकी का रोगाणुरोधी चिकित्सा, बायोमेडिकल और फार्मास्युटिकल फॉर्मूलेशन तथा खाद्य संरक्षण में संभावित अनुप्रयोग है। पेटेंट की गई कार्यप्रणाली प्राकृतिक सूक्ष्मजीवी पिगमेंट के उपयोग के माध्यम से जिंक ऑक्साइड नैनोकणों के कार्यात्मक गुणों को बढ़ाने के लिए एक नवीन दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।
पेटेंट की गई प्रौद्योगिकी के आविष्कारक डॉ. विष्णुविनायगम शिवम, टीना जॉर्ज, डॉ. मुरुगदास वैयापुरी, डॉ. टॉम्स चेरियाथ जोसेफ, डॉ. रंगासामी आनंदन, डॉ. गोपालन कृष्णन सिवारामन, डॉ. थंगराज राजा स्वामीनाथन और डॉ. जॉर्ज निनान हैं।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय मात्स्यिकी प्रौद्योगिकी संस्थान, कोच्चि)







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