8 सितंबर, 2026, हैदराबाद
भाकृअनुप–केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद में आज हिंदी पखवाड़ा-2026 का उत्साहपूर्वक शुभारंभ हुआ।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. विनोद कुमार सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-सीआरआईडीए, ने राजभाषा के रूप में हिंदी के महत्व को रेखांकित किया और संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से इसके व्यापक, सहज और प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इसका उपयोग न केवल आधिकारिक संचार में, बल्कि वैज्ञानिक एवं तकनीकी कार्यों में भी किया जाना चाहिए।
उन्होंने आगे जोर दिया कि कृषि अनुसंधान से उभरने वाले ज्ञान, प्रौद्योगिकियों और नवाचारों को किसानों तथा अन्य हितधारकों तक सुलभ और सार्थक तरीके से पहुंचाने में हिंदी के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

डॉ. अर्चना पांडे, रक्षा मंत्रालय की सहायक निदेशक (राजभाषा), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), ने सम्मानित अतिथि के रूप में इस अवसर की शोभा बढ़ाई। अपने संबोधन में उन्होंने राजभाषा नीति के प्रभावी कार्यान्वयन तथा सरकारी कामकाज में हिंदी के व्यावहारिक और सहज उपयोग के बारे में महत्वपूर्ण विचार साझा किया।
उन्होंने विशेष रूप से वैज्ञानिक और तकनीकी विषयों को स्पष्ट, सरल और बोधगम्य हिंदी में संप्रेषित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राजभाषा का सार्थक विस्तार इसके निरंतर उपयोग और सभी स्तरों पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से किया जा सकता है।

डॉ. मनोरंजन कुमार, अध्यक्ष, हिंदी पखवाड़ा आयोजन समिति, ने स्वागत संबोधन दिया और सम्मानित अतिथि तथा इस अवसर पर उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने हिंदी पखवाड़े के उद्देश्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की और पखवाड़े के दौरान आयोजित की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन प्रस्तुत किया।
इस पहल का उद्देश्य केवल हिंदी के प्रति अधिक रुचि और सहभागिता को बढ़ावा देना ही नहीं है, बल्कि प्रशासनिक, वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों में इसके सहज, सरल और प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित करना भी है, जिससे पेशेवर संचार के एक जीवंत माध्यम के रूप में इसकी भूमिका और मजबूत हो सके।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)







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