भाकृअनुप-सीआरआईडीए, हैदराबाद ने कर्नाटक में जलवायु-सहिष्णु कृषि को बढ़ावा देने हेतु अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत किसान मेले का किया आयोजन

भाकृअनुप-सीआरआईडीए, हैदराबाद ने कर्नाटक में जलवायु-सहिष्णु कृषि को बढ़ावा देने हेतु अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत किसान मेले का किया आयोजन

1 अगस्त, 2026, हैदराबाद

भाकृअनुप–केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (क्रिडा), हैदराबाद, ने आज अपने अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) कार्यक्रम के अंतर्गत कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के चिंचोली तालुक के कुसारामपल्ली गांव में किसान मेले का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जलवायु-सहिष्णु कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना तथा संभावित एल नीनो परिस्थितियों के प्रति किसानों की तैयारी को सुदृढ़ करना था।

कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को कृषि पर एल नीनो के संभावित प्रभावों के बारे में जागरूक किया तथा जलवायु संबंधी जोखिमों को कम करने के लिए उपयुक्त फसल प्रबंधन रणनीतियों की जानकारी दी। उन्होंने बदलती मौसम परिस्थितियों में कृषि उत्पादकता बनाए रखने के लिए जलवायु-सहिष्णु कृषि पद्धतियों को अपनाने और उपयुक्त अनुकूलन उपायों के महत्व पर जोर दिया।

ICAR-CRIDA, Hyderabad Organizes Kisan Mela under SC Sub Plan to Promote Climate-Resilient Agriculture in Karnataka

अनुसूचित जाति उप-योजना पहल के अंतर्गत पात्र लाभार्थी किसानों को कृषि यंत्रीकरण को सुदृढ़ करने, सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने तथा कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए बैल चालित प्लांटर, हाथ से चलने वाले खरपतवार नाशक उपकरण (हैंड वीडर), जैव उर्वरक तथा आम, नींबू, अमरूद और अनार के पौधे वितरित किए गए।

वैज्ञानिकों ने मृदा परीक्षण को प्रोत्साहित करने तथा मृदा उर्वरता में सुधार हेतु संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए मृदा स्वास्थ्य जागरूकता फोल्डर भी वितरित किए। उन्होंने घरेलू पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए मोटे अनाजों (मिलेट्स) की खेती तथा घर के आसपास पोषण वाटिकाओं (न्यूट्री-गार्डन) की स्थापना के महत्व पर प्रकाश डाला। किसानों को वर्षा जल संचयन, कृषि वानिकी तथा जैव उर्वरकों के उपयोग के लाभों के बारे में भी जागरूक किया गया, जिससे फसल उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु सहिष्णुता को सुदृढ़ करने में सहायता मिल सके।

कार्यक्रम में कुसारामपल्ली, शिवरेड्डीपल्ली, चिंदानूर तथा आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)

×