शून्य-फिशमील आहार से तुलनीय उत्पादन प्राप्त, सतत झींगा जलीय कृषि की संभावनाएं प्रदर्शित
7 अगस्त, 2026, चेन्नई
भाकृअनुप–केन्द्रीय खारे पानी की जलीय कृषि संस्थान (सीबा), चेन्नई ने अपने मुथुकाडु प्रायोगिक स्टेशन स्थित मॉडल प्रदर्शन इकाई में सुपर-इंटेंसिव प्रिसीजन एंड नेचुरल श्रिम्प फार्मिंग सिस्टम (एसआईपीएनएसएफ) के तहत फिशमील-मुक्त झींगा उत्पादन पर एक सफल फ्रंट-लाइन डेमोंस्ट्रेशन (एफएलडी) आयोजित किया।
98 दिनों की इस संवर्धन परीक्षण अवधि ने यह तकनीकी रूप से प्रदर्शित किया कि झींगा आहार से फिशमील को पूरी तरह हटाने के बावजूद उत्पादन प्रदर्शन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। शून्य-फिशमील आहार प्राप्त झींगों से 2.30 टन उत्पादन प्राप्त हुआ, जबकि पारंपरिक नियंत्रण आहार के साथ 2.44 टन उत्पादन दर्ज किया गया। इससे एसआईपीएनएसएफ प्रणाली के अंतर्गत दोनों आहारों के बीच तुलनीय उत्पादन प्रदर्शन का संकेत मिला।
एसआईपीएनएसएफ तकनीक ने 90–100 दिनों की संवर्धन अवधि के भीतर लगातार 4.5–5.0 किलोग्राम/घन मीटर की उत्पादकता प्राप्त की, जो लगभग 45–50 टन/हैक्टर/फसल के बराबर है। यह प्रणाली संसाधनों के कुशल उपयोग और सतत जलीय कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देते हुए गहन झींगा उत्पादन का समर्थन करने के लिए विकसित की गई है।
एफएलडी-सह-परस्पर संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत फसल कटाई का उद्घाटन डॉ. एम. कैलासम, निदेशक, आईसीएआर–सीबा द्वारा 7 अगस्त, 2026 को किया गया। कार्यक्रम में लगभग 30 हितधारकों, जिनमें झींगा किसान, उद्यमी, वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, विद्यार्थी तथा फीड मिलर शामिल थे, ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने फसल कटाई प्रक्रिया का अवलोकन किया तथा एसआईपीएनएसएफ प्रणाली और शून्य-फिशमील आहार प्राप्त झींगों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया।
यह सफल प्रदर्शन झींगा जलीय कृषि में फिशमील पर निर्भरता कम करने और अधिक सतत आहार पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। परिणामों ने यह भी दर्शाया कि एसआईपीएनएसएफ गहन झींगा उत्पादन के लिए एक विस्तार योग्य, किसान-अनुकूल और पर्यावरणीय रूप से सतत तकनीक के रूप में व्यापक संभावनाएं रखती है।
यह पहल उत्पादन दक्षता, पर्यावरणीय सततता और आर्थिक व्यवहार्यता को एक साथ समाहित करने वाली नवीन जलीय कृषि प्रौद्योगिकियों के विकास की दिशा में भाकृअनुप–सीबा के निरंतर प्रयासों को सुदृढ़ करती है। साथ ही यह झींगा पालन के क्षेत्र में उभरती चुनौतियों का समाधान करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय खारे पानी की जलीय कृषि संस्थान, चेन्नई)







फेसबुक पर लाइक करें
यूट्यूब पर सदस्यता लें
X पर फॉलो करना X
इंस्टाग्राम पर लाइक करें