21 जनवरी, 2026, कोच्चि
महिलाओं के नेतृत्व वाली तटीय आजीविका को बढ़ावा देने के लिए, भाकृअनुप-केन्द्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित एचपीई राफ्ट विधि का उपयोग करके सीवीड की खेती का उद्घाटन आज विशाखापत्तनम जिले के मंगामारिपेटा गांव में किया गया।

इस पहल का उद्देश्य मछुआरी महिलाओं के लिए स्थायी और पर्यावरण के अनुकूल आय के अवसर प्रदान करना है और इसे लाइफ चैरिटेबल ट्रस्ट तथा एसईए वीज टेक प्राइवेट लिमि. द्वारा आंध्र प्रदेश मत्स्य विभाग, भाकृअनुप-सीएमएफआरआई तथा महिला उद्यमियों के संघ, आंध्र प्रदेश (एएलईएपी) के सहयोग से लागू किया जा रहा है।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए, विशाखापत्तनम के संसद सदस्य एम. श्रीभरत ने सीवीड की खेती को तटीय समुदायों के लिए जलवायु-लचीला, पर्यावरण-अनुकूल और आय-सृजन करने वाला रोजगार बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मत्स्य विभाग के संयुक्त निदेशक लक्ष्मण राव ने की।
इस कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण पायलट परीक्षण से अर्जित आय का वितरण था, जिसमें सीवीड के पौधों की बिक्री से प्राप्त आय का चेक भाग लेने वाली मछुआरी महिलाओं को सौंपा गया, जो सीएमएफआरआई द्वारा विकसित तकनीक की व्यावसायिक व्यवहार्यता को दर्शाता है।
यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण, स्थायी तटीय आजीविका एवं जिम्मेदार जलीय कृषि के लिए सीवीड खेती प्रौद्योगिकियों के भाकृअनुप-सीएमएफआरआई के सफल हस्तांतरण को प्रदर्शित करती है, जो विज्ञान-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से नीली अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में इसकी भूमिका को पुष्ट करती है।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान, कोच्चि)







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