भाकृअनुप-सीपीसीआरआई ने 110वां स्थापना दिवस मनाया तथा पीएलएआरओएसवाईएम XXVI का किया उद्घाटन

भाकृअनुप-सीपीसीआरआई ने 110वां स्थापना दिवस मनाया तथा पीएलएआरओएसवाईएम XXVI का किया उद्घाटन

5 जनवरी, 2026, कासरगोड

भाकृअनुप-केन्द्रीय रोपण फसल अनुसंधान संस्थान, कासरगोड ने आज अपना 110वां स्थापना दिवस मनाया, इस अवसर पर 26वें प्लांटेशन क्रॉप्स सिम्पोजियम (पीएलएआरओएसवाईएम XXVI) का उद्घाटन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो. सिद्दू पी. अल्गुर, वाइस चांसलर, केरल सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी, ने किया।

अपने उद्घाटन संबोधन में, प्रो. अल्गुर ने प्लांटेशन सेक्टर के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों पर प्रकाश डाला, जिसमें जलवायु जोखिम, कीमतों में उतार-चढ़ाव तथा मजदूरों की कमी शामिल था। उन्होंने भविष्य की कृषि को मजबूत करने के लिए अनुसंधान, तकनीकी एकीकरण, अंतर-संस्थागत सहयोग तथा डेटा एनालिटिक्स, प्रेडिक्टिव मॉडलिंग और सटीक खेती, विशेष रूप से मोबाइल-आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से, के महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

ICAR–CPCRI Celebrates 110th Foundation Day and Inaugurates PLACROSYM XXVI

स्थापना दिवस समारोह के साथ पीएलएआरओएसवाईएम XXVI का भी आयोजन किया गया, जो 5 से 7 जनवरी, 2026 तक "भलाई और कल्याण के लिए प्लांटेशन सेक्टर को भविष्य के लिए तैयार करना" विषय पर आयोजित किया गया। इस संगोष्ठी में देश भर से 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें वैज्ञानिक, शिक्षाविद, नीति निर्माता, उद्योग विशेषज्ञ एवं प्रगतिशील किसान शामिल थे।

विशिष्ट अतिथि, डॉ. पी. रेथिनम, अध्यक्ष, एसओपीओपीआरओडी, ने स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल फसलों के चयन के महत्व पर जोर दिया और संस्थान के समर्पित अनुसंधान और विस्तार प्रयासों की सराहना की।

परिचयात्मक टिप्पणी और अध्यक्षीय संबोधन देते हुए, डॉ. के. बालाचंद्र हेब्बार, निदेशक, भाकृअनुप-सीपीसीआरआई, ने जलवायु परिवर्तन अनुकूलन, संसाधन-उपयोग दक्षता, कीट और रोग प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, मशीनीकरण, कार्बन पृथक्करण तथा किसानों की आय बढ़ाने की रणनीतियों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर संगोष्ठी के फोकस की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने प्रमुख संस्थागत उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला, जिसमें निजी नर्सरी को बेहतर नारियल किस्मों का लाइसेंस देना, कम-एरेकोलाइन सुपारी किस्म शतमंगला का विकास और पूरे दक्षिण भारत में पॉलीक्लोनल कोको बागानों की स्थापना शामिल था।

इस कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति जिनमें, डॉ. जे. दिनाकर अडिगा, निदेशक, भाकृअनुप-डीसीआर, पुत्तूर; डॉ. के. सुरेश, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईओपीआर, पेडावेगी; डॉ. के.यू.के. नाम्बूथिरी, पूर्व निदेशक, भाकृअनुप-सीपीसीआरआई; डॉ. देबब्रत रॉय, निदेशक, आरआरआईआई, कोट्टायम; डॉ. सेंथिलकुमार, निदेशक, सीसीआरआई; डॉ. विक्टर जे. इलांगो, निदेशक, यूपीएएसआई, वालपराई; और डॉ. ए.बी. रेमा श्री, निदेशक, आईसीआरआई (स्पाइसेस बोर्ड), मायलाडुम्पारा, उपस्थित थे।

कार्यक्रम के हिस्से के रूप में, डॉ. के.यू.के. नंपूथिरी ने डॉ. के.वी. अहमद बावप्पा की याद में "भूख उन्मूलन" शीर्षक से एक स्मारक व्याख्यान दिया, जिसमें ग्लोबल पॉवर्टी इंडेक्स (जीपीआ), मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (एमपीआई), और डायटरी हेल्थ इंडेक्स (डीएचआई) जैसे प्रमुख सूचकांकों के बारे में विस्तार से बताया गया।

इस कार्यक्रम में कई इनोवेटिव नारियल-आधारित उत्पादों को लॉन्च किया गया, जिनमें कल्पा कुल्फी, कल्पा वेफर कोन, कल्पा वेलवेट (डार्क चॉकलेट), और कल्पा क्यूबिट्ज़ (नाटा डी कोको) शामिल हैं, साथ ही वाईजीपी नारियल उत्पाद जैसे सैपी ड्रिंक और सैपी हेल्दी शुगर भी लॉन्च किए गए। प्रमुख प्रकाशन और डिजिटल पहल भी जारी की गईं, जिनमें पीएलएआरओएसवाईएम स्मारिका, एब्स्ट्रैक्ट की एक ई-बुक, रीजनल स्टेशन, कायमकुलम से एक तकनीकी बुलेटिन, और केवीके, कासरगोड यूट्यूब (YouTube) चैनल शामिल था।

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उद्घाटन सत्र के दौरान, दो उद्यमियों जिनमें, श्री बिनॉय पी.सी. चुली फर्म के साथ कल्पा सुवर्णा नारियल किस्म के लिए, और मेसर्स ब्लिस फार्म फ्लेवर की श्रीमती रेणुका के साथ वर्जिन नारियल तेल और नारियल-आधारित स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान किया गया।

विभिन्न पुरस्कारों के माध्यम से उत्कृष्ट योगदान को मान्यता दी गई। बागान क्षेत्र में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए प्रगतिशील किसानों को भी सम्मानित किया गया।

तीन दिवसीय कार्यक्रम में वैज्ञानिक विचार-विमर्श, प्रदर्शनियां और सम्मान समारोह आयोजित किए गए, जिसमें वैज्ञानिकों, किसानों, छात्रों, उद्यमियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पीएलएआरओएसवाईएम  प्रतिनिधियों सहित लगभग 400 प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय रोपण फसल अनुसंधान संस्थान, कासरगोड)

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