भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर और दामोदर घाटी निगम (डीवीसी), मैथन के बीच लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को नई गति मिलने जा रही है, क्योंकि दोनों संगठन सतत जलाशय मत्स्य विकास, केज फार्मिंग और मछुआरा समुदायों की आजीविका में सुधार के लिए सहयोग के नए क्षेत्रों की तलाश कर रहे हैं।
भाकृअनुप-सिफरी वर्ष 2007 से डीवीसी के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है, जब दोनों संस्थानों ने वर्ष 2007–2009 के दौरान एनएफडीबी द्वारा प्रायोजित मछली संचयन कार्यक्रम के तहत मैथन, पंचेत, तिलैया और कोनार जलाशयों में सहयोग किया था। वर्ष 2010 से मैथन जलाशय में केज हब की स्थापना के साथ इस साझेदारी को और मजबूत किया गया। दोनों संगठनों के बीच वर्ष 2010, 2018 और 2024 में हस्ताक्षरित तीन समझौता ज्ञापनों (एमओयू) के माध्यम से इस सहयोग को समर्थन मिला है।

नवीकृत सहयोग का मुख्य उद्देश्य डीवीसी के अंतर्गत जलाशय मत्स्य पालन को बढ़ाने के लिए भाकृअनुप-सिफरी की तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग करना तथा मत्स्य विकास और आजीविका सृजन में संयुक्त पहलों के अवसरों की तलाश करना है। चर्चा के दौरान मैथन में जलीय संसाधन सुविधाओं को अधिक कार्यात्मक बनाने और मत्स्य संबंधी गतिविधियों को समर्थन देने में उनकी भूमिका को मजबूत करने की संभावना पर भी प्रकाश डाला गया।
सहयोग के प्रस्तावित क्षेत्रों में नियमित केज स्टॉकिंग और केज फार्मिंग गतिविधियां, जलाशय मत्स्य विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और डीवीसी के कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कार्यक्रमों के तहत संयुक्त पहल शामिल हैं। ऐसी पहलों से विशेष रूप से अपनी आजीविका के लिए जलाशयों पर निर्भर आदिवासी मछुआरा समुदायों को लाभ मिल सकता है।
दोनों संगठनों के बीच हाल की बातचीत के दौरान डीवीसी मैथन के कार्यालय प्रमुख, श्री सुबीर साहा और मैथन के डीजीएम, श्री सुखमोय नायक ने साझेदारी को मजबूत करने और भविष्य में सहयोग के लिए अधिक प्रभावी रूपरेखा तैयार करने के संबंध में अपने विचार साझा किए। यह चर्चा ओपन वाटर एक्वाकल्चर एंड प्रोडक्शन मैनेजमेंट (ओडब्ल्यूएपीएम) डिवीजन से जुड़े भाकृअनुप-सिफरी दल के साथ हुई।
नवीकृत सहयोग के व्यापक महत्व पर टिप्पणी करते हुए, डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-सिफरी, ने कहा, “भाकृअनुप-सिफरी और डीवीसी के बीच लंबे समय से चली आ रही साझेदारी सतत जलाशय मत्स्य पालन को आगे बढ़ाने और मछुआरा समुदायों के लिए आजीविका के अवसरों में सुधार करने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है। डीवीसी के जलाशय संसाधनों और संस्थागत सहयोग को भाकृअनुप की वैज्ञानिक एवं तकनीकी विशेषज्ञता के साथ जोड़कर केज आधारित मत्स्य पालन, जलाशय विकास और समुदाय-केंद्रित मत्स्य कार्यक्रमों को मजबूत करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं।”

भाकृअनुप-सिफरी और डीवीसी के बीच नवीकृत संवाद से वैज्ञानिक प्रौद्योगिकियों को जमीनी स्तर के हस्तक्षेपों में बदलने के लिए एक रूपरेखा उपलब्ध होने की उम्मीद है, विशेष रूप से केज फार्मिंग और जलाशय मत्स्य प्रबंधन के क्षेत्र में। इस साझेदारी में डीवीसी के जलीय संसाधनों के सतत उपयोग में योगदान देने के साथ-साथ इसके जलाशयों के आसपास के मछुआरा समुदायों के लिए आजीविका के बेहतर अवसर पैदा करने की भी क्षमता है।
दोनों संगठनों ने व्यावहारिक और पारस्परिक रूप से लाभकारी दृष्टिकोण के माध्यम से सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की है, जिसका व्यापक उद्देश्य अंतर्देशीय मत्स्य पालन को मजबूत करना और जलाशय संसाधनों पर निर्भर समुदायों को समर्थन प्रदान करना है।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)







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