भाकृअनुप–सीसीएआरआई, गोवा में हरित खाद एवं हरित पत्ती खाद द्वारा सतत मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर किसान गोष्ठी का आयोजन

भाकृअनुप–सीसीएआरआई, गोवा में हरित खाद एवं हरित पत्ती खाद द्वारा सतत मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर किसान गोष्ठी का आयोजन

26 अप्रैल, 2026, गोवा

भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र, उत्तर गोवा, ने भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा, के तत्वावधान में “सतत मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन हेतु हरित खाद एवं हरित पत्ती खाद” विषय पर किसान गोष्ठी का आयोजन भाकृअनुप–सीसीएआरआई, एला, पुराना गोवा (तिसवाड़ी तालुका, उत्तर गोवा) में किया। यह कार्यक्रम मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन एवं उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर राष्ट्रीय प्रमुख पहल के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य किसानों में टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद एवं हरित पत्ती खाद के महत्व के बारे में जागरूक किया गया, जो मृदा उर्वरता बढ़ाने और फसल उत्पादकता बनाए रखने के लिए किफायती एवं प्रभावी उपाय हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि हरित खाद में ढैंचा, सनहेम्प तथा लोबिया जैसी फसलों को फूल आने की अवस्था में मिट्टी में मिला दिया जाता है, जिससे कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है और प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन की आपूर्ति होती है। इसी प्रकार, हरित पत्ती खाद में ग्लिरिसिडिया, सुबबूल और नीम जैसे वृक्षों की पत्तियों को मिट्टी में मिलाया जाता है, जो शीघ्र सड़कर मृदा उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ लाभकारी सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को भी प्रोत्साहित करती हैं।

Green Manuring and Green Leaf Manuring for Sustainable Soil Health Management Organized at ICAR-CCARI, Goa

किसानों को बताया गया कि इन पद्धतियों से मृदा की संरचना में सुधार होता है, जल धारण क्षमता बढ़ती है, मृदा में कार्बनिक कार्बन की मात्रा बढ़ती है, आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति होती है, खरपतवार नियंत्रण में मदद मिलती है तथा मृदा अपरदन कम होता है। साथ ही, उन्हें उपयुक्त हरित खाद फसलों के चयन, फूल आने से पहले सही समय पर उन्हें मिट्टी में मिलाने तथा आवश्यक बायोमास की मात्रा के बारे में भी जानकारी दी गई। विशेष रूप से धान की रोपाई से पहले इन पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया गया, जिससे मृदा उर्वरता को टिकाऊ और किफायती तरीके से बढ़ाया जा सके। कार्यक्रम में जलवायु अनुकूल कृषि और दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन में हरित खाद की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।

इस किसान गोष्ठी में कुल 19 प्रतिभागियों (11 पुरुष एवं 8 महिलाएं) ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जो किसानों में टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा)

×