12 अक्टूबर, 2026, गोवा
भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा ने आज भाकृअनुप वन टीम–वन टास्क (ओटीओटी) पहल के तहत संस्थान में ‘गोवा में एक्वा इको-टूरिज्म और आक्रामक मछली प्रजातियों के प्रति जागरूकता’ पर एक क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला का उद्देश्य एक्वा इको-टूरिज्म के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना और गोवा के जलीय पारिस्थितिक तंत्र पर आक्रामक मछली प्रजातियों के पारिस्थितिक प्रभावों को उजागर करना था।

सत्र में केकड़ा-जाल के डिजाइनों और केकड़ा पकड़ने में उनके उपयोग, झींगा पालन की पद्धतियों, ग्रीन मसल (Perna viridis) पालन तकनीकों और एशियन सीबास (Lates calcarifer) पालन का प्रदर्शन शामिल था। इन प्रदर्शनों ने छात्रों को जलीय कृषि प्रौद्योगिकियों, प्रजाति-विशिष्ट पालन पद्धतियों और गोवा में टिकाऊ आजीविका तथा एक्वा इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए विविधीकृत जलीय कृषि प्रणालियों की संभावनाओं के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्रदान की।
आक्रामक मछली प्रजातियों के देशज जैव विविधता और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के कार्यकलाप पर पारिस्थितिक प्रभावों पर एक अतिरिक्त तकनीकी सत्र भी आयोजित किया गया। सत्र में देशज और गैर-देशज मछली आबादी के व्यवस्थित सर्वेक्षण, पारिस्थितिक प्रभावों के आकलन और आक्रमण की संभावित स्थितियों का पूर्वानुमान लगाने के लिए पारिस्थितिकी तंत्र मॉडलिंग के महत्व पर जोर दिया गया।

आक्रामक मछली बायोमास से मूल्य संवर्धन की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई, जहां यह पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ और कानूनी रूप से अनुमत हो, ताकि एकीकृत आक्रामक प्रजाति प्रबंधन तथा जलीय जैव विविधता संरक्षण में योगदान दिया जा सके।
कार्यक्रम में गोवा विश्वविद्यालय, तलेइगांव के कुल 24 छात्रों और दो शिक्षकों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा)








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