19 मई, 2026, गोवा
भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीसीएआरआई), गोवा, ने आज गोवा में 10वीं अनुसंधान सलाहकार समिति (आरएसी) की तृतीय बैठक के अंतर्गत एक हितधारक परामर्श बैठक का आयोजन किया।
मुख्य अतिथि प्रसिद्ध समाजसेवी एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती सुलक्षणा सावंत ने गोवा में सतत तटीय कृषि, जलवायु-सहिष्णु प्रौद्योगिकियों, एकीकृत कृषि प्रणालियों तथा किसान-केन्द्रित नवाचारों को बढ़ावा देने में भाकृअनुप-सीसीएआरआई के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने वैज्ञानिक तकनीकों के प्रभावी हस्तांतरण के लिए विभिन्न विभागों एवं संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों पर बल दिया। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती को अपनाने, जीआई टैगिंग के महत्व पर जोर देते हुए युवाओं को कृषि, खाद्य उद्योग तथा संबद्ध क्षेत्रों में अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे विकसित गोवा और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

डॉ. परवीन कुमार, निदेशक, भाकृअनुप-सीसीएआरआई, गोवा, ने स्वागत संबोधन में संस्थान की प्रमुख अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों की जानकारी दी तथा गोवा में सतत तटीय कृषि विकास तथा किसान कल्याण के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
डॉ. एस.डी. सावंत, अध्यक्ष, आरएसी, ने संस्थान की अनुसंधान उपलब्धियों की सराहना करते हुए आवश्यकता-आधारित, किसान-केंद्रित अनुसंधान तथा कृषि प्रौद्योगिकियों के प्रभाव को बढ़ाने के लिए हितधारकों की सशक्त भागीदारी के महत्व पर बल दिया।
आरएसी सदस्यों ने भी संस्थान की गतिविधियों और उपलब्धियों की प्रशंसा की। उन्होंने जलवायु-सहिष्णु किस्मों के विकास, कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन तथा कटाई उपरांत प्रबंधन को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि जलवायु परिवर्तन और घटती कृषि उत्पादकता की चुनौतियों का समाधान किया जा सके तथा तटीय क्षेत्रों के किसानों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण को बढ़ावा मिले।

इस संवाद ने सतत तटीय कृषि, जलवायु लचीलापन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, एकीकृत कृषि प्रणालियाँ, मत्स्य पालन, पशुपालन, कृषि-पर्यटन, जैव विविधता संरक्षण, उद्यमिता विकास और मूल्य संवर्धन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए एक सहभागी मंच प्रदान किया। कार्यक्रम में तटीय क्षेत्रों में सतत कृषि विकास और किसान-केंद्रित नवाचारों के लिए भाकृअनुप-सीसीएआरआई के योगदान को भी रेखांकित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक संस्थानों, सरकारी विभागों, वित्तीय एजेंसियों तथा किसान समुदायों के बीच सहयोग को सुदृढ़ करना था, ताकि विज्ञान-आधारित कृषि परिवर्तन के माध्यम से गोवा में सतत कृषि विकास को बढ़ावा दिया जा सके और विकसित गोवा एवं विकसित भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सके।
बैठक में किसानों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), वैज्ञानिकों, कृषि, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाओं विभाग के अधिकारियों, नाबार्ड, गोवा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (जीसीसीआ), गोवा राज्य जैव विविधता बोर्ड, गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट तथा अन्य हितधारकों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में गोवा राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 80 हितधारकों ने सहभागिता की।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा)







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