12 जनवरी, 2026, नई दिल्ली
इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च ने नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है ताकि पूरे डेयरी सेक्टर में मल्टीडिसीप्लिनरी रिसर्च, इनोवेशन तथा क्षमता निर्माण में सहयोग बढ़ाया जा सके। यह साझेदारी डेयरी उत्पादन, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन सहित प्रमुख क्षेत्रों तक फैली हुई है, जिसमें देश भर के लाखों प्राथमिक हितधारक डेयरी किसानों को सशक्त बनाने पर ज़ोर दिया गया है।
डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप), तथा डॉ. मीनेश शाह, चेयरमैन, एनडीडीबी की मौजूदगी में, डॉ. राघवेंद्र भट्टा, उप-महानिदेशक (पशु विज्ञान), भाकृअनुप तथा श्री एस. रेगूपति, कार्यकारी निदेशक (ऑपरेशंस), एनडीडीबी, ने एमओयू पर साइन किया।
डॉ. जाट ने संस्थागत सीमाओं को तोड़कर पूरक रिसर्च के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और इस बात पर संतोष जताया कि यह एमओयू जलवायु परिवर्तन से निपटने, कम उत्पादकता तथा वैल्यू चेन डेवलपमेंट जैसी जटिल चुनौतियों का सामना करने के लिए एक स्ट्रक्चर्ड पार्टनरशिप का रास्ता खोलेगा। उन्होंने आवारा पशुओं की समस्या को रोकने और खाद मैनेजमेंट तथा बायोगैस के इस्तेमाल के लिए टिकाऊ मॉडल विकसित करने के लिए गौशालाओं को अपनाने की भी सलाह दी। उन्होंने पशुधन उत्पादकता बढ़ाने में चारे के महत्वपूर्ण महत्व पर भी ज़ोर दिया। डॉ. जाट ने कहा कि ये सभी पहल भाकृअनुप संस्थानों से निकलने वाले लेटेस्ट इनोवेशन एवं आधुनिक टेक्नोलॉजी द्वारा संचालित होंगी।
डॉ. मीनेश सी. शाह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस पार्टनरशिप में 'विकसित भारत' के विज़न को पूरा करने के लिए इंटीग्रेटेड साइंटिफिक सहयोग के लिए दुनिया के सबसे बड़े प्लेटफार्म में से एक बनाने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि एनडीडीबी ने पहले भी भाकृअनुप संस्थानों के साथ कई मिशनों पर काम किया है, जिसमें राशन बैलेंसिंग, मिनरल मैपिंग और टोटल मिक्स्ड राशन पहल शामिल है। उन्होंने एथनो-वेटेरिनरी मेडिसिन में आपसी सहयोग के अवसरों पर प्रकाश डाला और राष्ट्रीय हित में पशुधन और कृषि क्षेत्रों में उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए एनडीडीबी की तत्परता व्यक्त की। उन्होंने देश के अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में स्केलेबल और दोहराए जाने वाले मॉडल विकसित करने के लक्ष्य पर भी ज़ोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने फल और सब्जियां, तिलहन, चारा, दूध और दूध उत्पादों की वैल्यू चेन में सहयोग के क्षेत्रों की ओर भी इशारा किया।
इस एमओयू का मकसद भाकृअनुप की वैज्ञानिक और रिसर्च विशेषज्ञता को एनडीडीबी के बड़े फील्ड-लेवल अनुभव और मज़बूत संस्थागत क्षमताओं के साथ मिलाकर डेयरी वैल्यू चेन में आने वाली चुनौतियों, खासकर ज़मीनी स्तर पर, निपटना है। यह सहयोग ज्ञान साझा करने, टेक्नोलॉजी के विकास और वैलिडेशन, मानव संसाधन विकास और रिसर्चर, प्रोफेशनल्स और किसानों के लिए संयुक्त ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करने पर ज़ोर देता है। उम्मीद है कि यह एमओयू रिसर्च के नतीजों को व्यावहारिक, फील्ड-लेवल समाधानों में बदलने में मदद करेगा, जिससे डेयरी सेक्टर में प्रोडक्टिविटी, मुनाफ़ा के साथ-साथ टिकाऊपन बढ़ेगी।
इस कार्यक्रम में भाकृअनुप तथा एनडीडीबी दोनों के वरिष्ठ अधिकारी एवं जाने-माने प्रतिनिधि मौजूद थे।
(स्रोत: पशु विज्ञान प्रभाग, भाकृअनुप)







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