30 सितंबर, 2026, नई दिल्ली
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) तथा भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने खाद्य पदार्थों के सुरक्षित और सतत भंडारण के लिए वैकल्पिक फ्यूमिगेशन प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान करने हेतु आज एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) के सहयोग से संचालित होने वाले इस अनुसंधान कार्यक्रम को भाकृअनुप–केन्द्रीय कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (भाकृअनुप-सीआईपीएचईटी), लुधियाना द्वारा दो चरणों में लागू किया जाएगा। परियोजना के चरण-I को दो वर्ष की अवधि के लिए ₹3.28 करोड़ के कुल बजट परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई है। भाकृअनुप-सीआईपीएचईटी पंजाब क्षेत्र में एफसीआई द्वारा निर्धारित भंडारण स्थलों पर वैकल्पिक फ्यूमिगेशन प्रौद्योगिकियों का क्षेत्रीय सत्यापन करेगा।
एमओयू पर डॉ. नचिकेत कोटवालीवाले, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईपीएचईटी और डॉ. ए.के. सिन्हा, कार्यकारी निदेशक (गुणवत्ता नियंत्रण), एफसीआई, डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप; डॉ. राजबीर सिंह, उप-महानिदेशक (कृषि अभियांत्रिकी); डॉ. डी.के. यादव, उप-महानिदेशक (फसल विज्ञान); डॉ. के. नरसैया, सहायक महानिदेशक (प्रसंस्करण अभियांत्रिकी), भाकृअनुप की उपस्थिति में हस्ताक्षर किया गया।
यह अनुसंधान भारत में भंडारित खाद्यान्न के वैज्ञानिक और सतत प्रबंधन को मजबूत करने की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। वर्तमान में भंडारित अनाज के संरक्षण में मुख्य रूप से रासायनिक फ्यूमिगेंट्स, विशेष रूप से फॉस्फीन, पर निर्भरता है। व्यावसायिक स्तर पर इसके संपर्क में आने का जोखिम, पर्यावरण संबंधी चिंताएं, अवशेष संबंधी मुद्दे और प्रभावी फ्यूमिगेंट विकल्पों की सीमित उपलब्धता वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित विकल्पों की आवश्यकता को और रेखांकित करती है।
इस कार्यक्रम के तहत, भाकृअनुप-सीआईपीएचईटी नियंत्रित और संशोधित वायुमंडल प्रौद्योगिकियों के लिए परिचालन प्रोटोकॉल का मूल्यांकन और विकास करेगा, जिसमें नाइट्रोजन (N2), कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और फॉस्फीन (PH3) के साथ कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के संयोजन पर आधारित उपचार शामिल हैं। इस कार्यक्रम से पारंपरिक रासायनिक फ्यूमिगेशन के वैज्ञानिक रूप से मानकीकृत, बड़े पैमाने पर अपनाए जा सकने वाले विकल्प विकसित होने और भारत में भंडारित अनाज के कीट प्रबंधन की दीर्घकालिक स्थिरता मजबूत होने की उम्मीद है।







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