30 जून, 2026, अल्मोड़ा
डॉ. लक्ष्मी कांत, निदेशक, भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-वीपीकेएएस), अल्मोड़ा के मार्गदर्शन में, चल रहे ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत धौलादेवी विकासखंड के पांच गांवों तथा ताड़ीखेत विकासखंड के एक गांव में किसान जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कार्यक्रमों के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा परीक्षण, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग, जैव उर्वरकों एवं जैव कीटनाशकों के प्रयोग, मल्चिंग, कतार बुवाई, मिश्रित खेती, फसल विविधीकरण तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती की तकनीकों के संबंध में जानकारी प्रदान की।
महिलाओं को विशेष रूप से मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसाओं के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, किसान क्रेडिट कार्ड तथा मौसम आधारित फसल बीमा योजना जैसी सरकारी पहलों के बारे में भी जागरूक किया गया।

किसानों ने मुख्य रूप से बंदरों, जंगली सूअरों एवं आवारा पशुओं द्वारा फसल क्षति, शीतकाल में सिंचाई की कमी तथा सब्जियों का उचित मूल्य न मिलने जैसी समस्याएं उठाईं। इसके उत्तर में वैज्ञानिकों ने फेंसिंग योजनाओं तथा अन्य सुरक्षात्मक उपायों की जानकारी प्रदान की।
ताड़ीखेत विकासखंड के पजीना गांव में आयोजित किसान बैठक में 41 किसानों, जिनमें 20 पुरुष एवं 21 महिलाएं शामिल थीं, ने भाग लिया। किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा एवं जल संरक्षण, वर्षा के वितरण पर एल नीनो के प्रभाव, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन, जल के कुशल उपयोग तथा जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी दी गई। किसानों ने अनियमित वर्षा, जंगली जानवरों से होने वाली क्षति, मृदा उर्वरता तथा गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता से संबंधित समस्याएं उठाईं।
धौलादेवी विकासखंड के मनियागर, बीना, सेला एवं टोली गांवों में आयोजित कार्यक्रमों में 75 किसानों, जिनमें 21 पुरुष एवं 54 महिलाएं शामिल थीं, ने भाग लिया।
इन कार्यक्रमों में कुल 116 किसानों, जिनमें 41 पुरुष एवं 75 महिलाएं शामिल थीं, ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा, उत्तराखंड)







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