भारत मंडपम, नई दिल्ली में 7वें एग्रीवोल्टेइक्स विश्व सम्मेलन का उद्घाटन

भारत मंडपम, नई दिल्ली में 7वें एग्रीवोल्टेइक्स विश्व सम्मेलन का उद्घाटन

21 अक्टूबर, 2026, नई दिल्ली

7वें एग्रीवोल्टेइक्स विश्व सम्मेलन का आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में उद्घाटन किया गया, जिसमें कृषि उत्पादन के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन के एकीकरण को आगे बढ़ाने के लिए नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया।

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने उद्घाटन समारोह के दौरान मुख्य संदेश दिया और छोटे एवं सीमांत किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप लचीले एग्रीवोल्टेइक (AgriPV) मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने एग्रीपीवी प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान को आगे बढ़ाने और इनके अपनाने को बढ़ावा देने के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के साथ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) के सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने भारत के 15 कृषि-जलवायु क्षेत्रों की मौसम संबंधी परिस्थितियों और कृषि आवश्यकताओं के अनुरूप साक्ष्य-आधारित फसल मैट्रिक्स विकसित करने के महत्व पर भी जोर दिया।

7th Agrivoltaics World Conference Inaugurated at Bharat Mandapam, New Delhi

भारत सरकार के केन्द्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने भी देश में एग्रीवोल्टेइक्स को आगे बढ़ाने के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के सचिव तथा भाकृअनुप के महानिदेशक, डॉ. एम. एल. जाट ने जोधपुर और नई दिल्ली में एग्रीपीवी अनुसंधान में भाकृअनुप के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने देश के 14 लाख कृषि तालाबों और कृषि क्षेत्रों में विस्तृत मेड़ क्षेत्रों, विशेष रूप से दक्षिण भारत में, का उपयोग करके कृषि-खाद्य प्रणालियों में एग्रीवोल्टेइक्स की भूमिका का विस्तार करने का आह्वान किया। उन्होंने विविधीकृत और टिकाऊ कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए एग्रीपीवी को कृषि वानिकी और पशुपालन के साथ एकीकृत करने की क्षमता को भी रेखांकित किया। इसके लाभों पर आगे प्रकाश डालते हुए डॉ. जाट ने कहा कि एग्रीपीवी सूक्ष्म जलवायु विनियमन, जल संचयन और कार्बन क्रेडिट सृजन में योगदान दे सकता है।

7th Agrivoltaics World Conference Inaugurated at Bharat Mandapam, New Delhi

भाकृअनुप के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), डॉ. डी.के. यादव ने सम्मेलन में एक वैज्ञानिक ट्रैक सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए उपयुक्त फसल मैट्रिक्स विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें स्थानीय मौसम संबंधी मानकों और विभिन्न फसलों की छाया सहनशीलता को ध्यान में रखा जाए। कृषि उत्पादकता के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को समर्थन देने वाले उपयुक्त फसल–सौर पैनल संयोजनों की पहचान के लिए ऐसे साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण आवश्यक हैं।

कार्यक्रम के दौरान एमएनआरई और भाकृअनुप के संयुक्त योगदान से तैयार एक प्रकाशन “भारत में एग्रीवोल्टेइक्स पर नीति पुस्तिका” जारी की गई, जो भारत में एग्रीवोल्टेइक्स के लिए नीति ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भाकृअनुप के वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों और एग्री-फोटोवोल्टिक्स पर भाकृअनुप सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के छात्रों ने भी सम्मेलन में भाग लिया और अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास तथा नवीकरणीय ऊर्जा को टिकाऊ कृषि पद्धतियों के साथ एकीकृत करने से संबंधित चर्चाओं में योगदान दिया। सम्मेलन ने कृषि प्रणालियों को मजबूत करने, किसानों की आजीविका को समर्थन देने और भारत में भूमि तथा सौर ऊर्जा संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण के रूप में एग्रीवोल्टेइक्स को आगे बढ़ाने में समन्वित अनुसंधान, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और अंतर-मंत्रालयी सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।

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