भकृअनुप-वीपीकेएएस, अल्मोड़ा ने खेत बचाओ अभियान के तहत किसान जागरूकता कार्यक्रम का किया आयोजन

भकृअनुप-वीपीकेएएस, अल्मोड़ा ने खेत बचाओ अभियान के तहत किसान जागरूकता कार्यक्रम का किया आयोजन

देशव्यापी खेत बचाओ अभियान के तहत भाकृअनुप–विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस), अल्मोड़ा, ने अल्मोड़ा जिले के छानी, पल्यून, सुपाई, बमनतिलाड़ी और चपड़ गांवों में किसान जागरूकता एवं किसान–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य सतत कृषि, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना था।

तकनीकी सत्रों में मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन, जैव उर्वरकों एवं जैव कीटनाशकों का उपयोग, मल्चिंग, कतारबद्ध बुवाई तथा मिश्रित खेती को मृदा स्वास्थ्य सुधारने तथा कृषि उत्पादकता बढ़ाने की प्रमुख रणनीतियों के रूप में प्रस्तुत किया गया। किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग, जलवायु परिवर्तन तथा मृदा उर्वरता में गिरावट के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए सतत एवं विज्ञान-आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

प्रतिभागियों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, किसान क्रेडिट कार्ड तथा मौसम आधारित फसल बीमा योजना जैसी सरकारी पहलों की जानकारी भी दी गई। साथ ही उन्हें मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा कृषि की सततता बढ़ाने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

ICAR-VPKAS, Almora Organises Farmer Awareness Programmes under Khet Bachao Abhiyan

कार्यक्रमों में मृदा एवं जल संरक्षण, जल का कुशल प्रबंधन, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन, जलवायु-स्मार्ट कृषि तथा एल नीनो (El Niño) का वर्षा वितरण और फसल नियोजन पर प्रभाव जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

संवादात्मक सत्रों के दौरान किसानों को स्थानीय कृषि संबंधी चुनौतियों, जैसे अनियमित वर्षा, मृदा उर्वरता में कमी, बंदरों एवं जंगली सूअरों द्वारा फसलों को होने वाली क्षति, तथा गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता से संबंधित समस्याओं पर चर्चा करने का अवसर मिला। विशेषज्ञों ने इन समस्याओं के समाधान के लिए पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र के अनुरूप उपयुक्त वैज्ञानिक एवं जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी।

इन जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों की सतत कृषि, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा संरक्षण तथा जलवायु-अनुकूल कृषि के क्षेत्र में क्षमता को सुदृढ़ करना, साथ ही सरकारी सहायता तंत्र के प्रति उनकी जागरूकता बढ़ाना था। इन पहलों के माध्यम से आईसीएआर-वीपीकेएएस हिमालयी क्षेत्र में कृषि प्रणालियों की लचीलापन एवं लाभप्रदता बढ़ाने के लिए पर्यावरणीय रूप से सतत तथा आर्थिक रूप से व्यवहार्य कृषि पद्धतियों को निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है।

कार्यक्रमों में 110 किसानों, जिनमें 46 पुरुष और 64 महिलाएं शामिल थीं, ने भाग लिया। इनमें से 68 किसान (26 पुरुष एवं 42 महिलाएं) भैसियाछाना ब्लॉक के छानी, पल्यून, सुपाई और बमनतिलाड़ी गांवों में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हुए, जबकि 42 किसान (20 पुरुष एवं 22 महिलाएं) ताड़ीखेत ब्लॉक के चपड़ गांव में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

(स्रोत: भाकृअनुप–विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा, उत्तराखंड)

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