9 जून, 2026, अल्मोड़ा
डॉ. लक्ष्मी कांत, निदेशक, भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के मार्गदर्शन में संचालित राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम "खेत बचाओ अभियान" के अंतर्गत चमोली जनपद के जोशीमठ विकासखंड के वाइब्रेंट विलेजेज़ जेलीम, कैलाशपुर, गमशाली एवं नीति में किसान संवाद बैठकों का आयोजन किया गया। इन बैठकों का उद्देश्य किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, कृषि भूमि संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के दक्ष उपयोग तथा सरकार की कृषि विकास योजनाओं के प्रति जागरूक करना था।
सभी चारों गांवों में आयोजित बैठकों में किसानों को मृदा परीक्षण के महत्व, उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग तथा समेकित पोषक तत्व प्रबंधन को अपनाने की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी गई। जल एवं मृदा संरक्षण, जलवायु-सहिष्णु कृषि पद्धतियों, फसल चक्र में दलहनी एवं तिलहनी फसलों को शामिल करने तथा सतत कृषि उत्पादन की आवश्यकता पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
सत्रों के दौरान जैविक एवं प्राकृतिक खेती के महत्व पर विशेष बल दिया गया। किसानों को गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, जैव उर्वरकों तथा अन्य पर्यावरण-अनुकूल कृषि आदानों के उपयोग के बारे में शिक्षित किया गया। इसके अतिरिक्त, संतुलित आहार तथा स्वास्थ्य के संबंध में भी जागरूकता उत्पन्न की गई।

संवाद सत्र के दौरान किसानों ने राजमा में सफेद गिडार (व्हाइट ग्रब) की समस्या, सेब में वूली एफिड के प्रकोप, जंगली जानवरों द्वारा फसलों को होने वाले नुकसान, बाड़बंदी की आवश्यकता तथा सब्जी मटर, पत्तेदार सब्जियों और समशीतोष्ण फल फसलों के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज एवं रोपण सामग्री की समय पर उपलब्धता जैसे मुद्दे उठाए। वैज्ञानिकों द्वारा इन समस्याओं पर तकनीकी परामर्श प्रदान किया गया। जेलीम क्षेत्र में सी-बकथॉर्न की उपलब्धता को देखते हुए इसके प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई।
इन बैठकों के दौरान पोषण वाटिकाओं, विविधीकृत कृषि तथा स्थानीय सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों के बीच धनिया, मेथी, गाजर और मूली के बीज वितरित किए गए। सभी गांवों के किसानों से संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, दलहन-आधारित फसल प्रणालियों तथा सतत कृषि पद्धतियों को अपनाकर दीर्घकालिक मृदा संरक्षण और आय वृद्धि की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह किया गया।
(स्रोत: भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा)







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