छठे इंडिया एग्री एक्सपो 2026 में फसल अवशेष प्रबंधन हेतु नीति अभिसरण पर सेमिनार का आयोजन

छठे इंडिया एग्री एक्सपो 2026 में फसल अवशेष प्रबंधन हेतु नीति अभिसरण पर सेमिनार का आयोजन

31 जनवरी, 2026, लुधियाना

भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, लुधियाना, ने लुधियाना प्रदर्शनी केन्द्र, साहनेवाल में छठे इंडिया एग्री एक्सपो 2026 के दौरान 'बदलाव के लिए अभिसरण: फसल अवशेष प्रबंधन में नीति, अनुसंधान एवं विस्तार' पर एक उच्च-स्तरीय सेमिनार का आयोजन किया।

सेमिनार में पंजाब में फसल अवशेष जलाने की लगातार चुनौती से निपटने तथा स्थायी विकल्पों को अपनाने में तेजी लाने के लिए सरकारी एजेंसियों, अनुसंधान संस्थानों, विस्तार प्रणालियों, उद्योग हितधारकों और किसान समुदायों के बीच नीति अभिसरण एवं समन्वित कार्रवाई की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री हरदीप सिंह मुंडियन, राजस्व, पुनर्वास और आपदा प्रबंधन, जल आपूर्ति तथा स्वच्छता, आवास एवं शहरी विकास मंत्री, पंजाब सरकार, शामिल हुए। अपने संबोधन में, मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्रभावी फसल अवशेष प्रबंधन के लिए अलग-अलग हस्तक्षेपों के बजाय नीतिगत समर्थन, वैज्ञानिक नवाचारों, मशीनीकरण और अंतिम-मील विस्तार के बीच तालमेल की आवश्यकता है। उन्होंने दीर्घकालिक पर्यावरणीय एवं कृषि संबंधी स्थिरता प्राप्त करने के लिए साक्ष्य-आधारित नीतियों, मजबूत संस्थागत समन्वय और समावेशी हितधारक भागीदारी की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

Seminar on Policy Convergence for Crop Residue Management at 6th India Agri Expo 2026

सेमिनार में नीति निर्माताओं, कृषि वैज्ञानिकों, विस्तार पेशेवरों, उद्योग प्रतिनिधियों, कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) मालिकों, एग्रीगेटर्स, केवीके प्रमुखों तथा वैज्ञानिकों एवं प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया, जो वास्तव में एक बहु-हितधारक मंच को दर्शाता है। तकनीकी सत्रों में फसल अवशेष प्रबंधन की स्थिति तथा चुनौतियों, कृषि मशीनरी में नवाचारों, पंजाब सरकार के नीतिगत दृष्टिकोण, अवशेष जलाने की रिमोट सेंसिंग-आधारित निगरानी और उभरते अवशेष-से-ऊर्जा मार्गों पर ध्यान केन्द्रित किया गया।

'बदलाव के लिए अभिसरण' पर एक पैनल चर्चा में सिद्ध प्रौद्योगिकियों और प्रथाओं को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए संस्थागत अभिसरण, सार्वजनिक-निजी भागीदारी तथा अंतर-विभागीय समन्वय के महत्व पर जोर दिया गया।

चर्चा एक खुली चर्चा के साथ समाप्त हुई जिसमें नीतिगत तालमेल को मजबूत करने, विस्तार नेटवर्क के माध्यम से सेवा वितरण में सुधार करने, सीएचसी के माध्यम से मशीनरी तक पहुंच बढ़ाने और पूरे राज्य में स्थायी फसल अवशेष प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप की रूपरेखा तैयार की गई।

(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, लुधियाना)

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