डेयरी क्षेत्र के विकास पर किसान मेला-सह-मंथन सत्र का आयोजन

डेयरी क्षेत्र के विकास पर किसान मेला-सह-मंथन सत्र का आयोजन

2 फरवरी, 2026, नागालैंड

नागालैंड में डेयरी सेक्टर के विकास के रोडमैप पर भाकृअनुप–राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान संस्थान, मेडज़िफेमा, ने भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र, फेक; भाकृअनुप– राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, हैदराबाद; पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग, नागालैंड सरकार; भाकृअनुप–राष्ट्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान, मेरठ; और भाकृअनुप– राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान, हिसार, के सहयोग से एक किसान मेला-सह-मंथन सत्र का आयोजन किया।

इस कार्यक्रम में श्री कुडेचो खामो, सीएडब्ल्यूडी और टैक्स सलाहकार, नागालैंड सरकार, मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. गिरीश एस. पाटिल, निदेशक, भाकृअनुप-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान संस्थान, ने की, जिन्होंने नागालैंड में पशुधन क्षेत्र के उत्पादन फोकस को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने स्थानीय संसाधनों की उपलब्धता, बाज़ार की मांग तथा किसानों की क्षमता को ध्यान में रखते हुए, व्यावसायिक एवं पारंपरिक उत्पादन प्रणालियों के साथ-साथ मांस-उन्मुख और दूध-उन्मुख पशुधन विकास के बीच सोच-समझकर चुनाव करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

Kisan Mela-cum-Brainstorming Session on Dairy Sector Development Organised

अन्य उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में डॉ. इमोमानेन त्ज़ुदिर, निदेशक, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा, नागालैंड सरकार; डॉ. पृथ्वीपाल कौर, पुलिस अधीक्षक, फेक; और श्री रोसिएत्शो न्गुओरी, उपायुक्त, फेक शामिल थे।

भाकृअनुप-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान संस्थान द्वारा लगाए गए एक प्रदर्शनी स्टॉल में मिथुन उत्पादन प्रौद्योगिकियों, मूल्य वर्धित मिथुन मांस उत्पादों एवं विस्तार पहलों को प्रदर्शित किया गया, जिसने किसानों, अधिकारियों और अन्य हितधारकों का काफी ध्यान आकर्षित किया।

मंथन सत्र, जिसमें तकनीकी प्रस्तुतियाँ और एक गोलमेज चर्चा शामिल थी, वैज्ञानिक डेयरी खेती प्रथाओं, मूल्य श्रृंखला विकास, सहकारी समितियों को मजबूत करने एवं नीतिगत सहायता तंत्र पर केन्द्रित था। विचार-विमर्श ने नागालैंड में डेयरी क्षेत्र के विकास के लिए एक व्यावहारिक तथा क्षेत्र-विशिष्ट रोडमैप तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसमें उत्पादन प्रणालियों को राज्य की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों और उभरते बाजार के अवसरों के साथ संरेखित करने पर विशेष ज़ोर दिया गया।

(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान संस्थान, मेडजिफेमा, नागालैंड)

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