एएनआरएफ द्वारा प्रायोजित 'जैविक अनुसंधान में बायोइनफॉर्मेटिक्स के अनुप्रयोग' पर कार्यशाला का आयोजन

एएनआरएफ द्वारा प्रायोजित 'जैविक अनुसंधान में बायोइनफॉर्मेटिक्स के अनुप्रयोग' पर कार्यशाला का आयोजन

22 जनवरी, 2026, हैदराबाद

भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, हैदराबाद, ने 20–21 जनवरी, 2026 को 'जैविक अनुसंधान में बायोइनफॉर्मेटिक्स के अनुप्रयोग' पर दो दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह कार्यक्रम एएनआरएफ–अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित कोर रिसर्च ग्रांट प्रोजेक्ट के सोशल साइंटिफिक रिस्पॉन्सिबिलिटी घटक के तहत 'चावल में कृषि की दृष्टि से महत्वपूर्ण लक्षणों के लिए बेहतर हैप्लोटाइप की पहचान तथा लक्षण वर्णन', शीर्षक के तहत एनएएएस हैदराबाद चैप्टर के सहयोग से आयोजित किया गया था।

डॉ. आर.एम. सुंदरम, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईआरआर, ने अपने संबोधन में आधुनिक अनुसंधान में बायोइन्फॉर्मेटिक्स और कृत्रिम मेधा के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला और उन्नत कम्प्यूटेशनल उपकरणों का उपयोग करके बड़े जैविक डेटासेट को सार्थक जानकारी में बदलने पर जोर दिया।

ANRF-Sponsored Workshop on ‘Application of Bioinformatics in Accelerating Biological Research’ Organised

कार्यशाला का उद्देश्य शोधकर्ताओं को समकालीन बायोइन्फॉर्मेटिक्स दृष्टिकोणों से परिचित कराना, ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना और विभिन्न विषयों के शोधकर्ताओं के बीच विचारों के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाना था। प्रतिभागियों ने आसपास के विभिन्न कॉलेजों और संस्थानों का प्रतिनिधित्व किया, जिनमें प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना कृषि विश्वविद्यालय (पीजेटीएयू), पी.वी. नरसिम्हा राव तेलंगाना पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय (पीवीएनआरटीवीयू), श्री कोंडा लक्ष्मण तेलंगाना राज्य बागवानी विश्वविद्यालय (एसकेएलटीजीएचयू), एग्री बायोटेक फाउंडेशन (एबीएफ) और भाकृअनुप-आईआईआरआर शामिल हैं।

अपने समापन संबोधन में, डॉ. गोपाल लाल, निदेशक, भाकृअनुप-नार्म, ने किसान-केन्द्रित समाधानों के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने के महत्व पर जोर दिया।

कार्यक्रम में जलवायु-अनुकूल चावल के लिए जीनोमिक्स-सहायता प्राप्त प्रजनन, फसल सुधार के लिए जीनोम संपादन, जीन संवर्धन विश्लेषण, और अगली पीढ़ी की सीक्वेंसिंग (एनजीएस) तथा विश्लेषण पाइपलाइन का परिचय जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया। कार्यक्रम में बुनियादी बायोइनफॉर्मेटिक्स उपकरणों और आरएनए-एसईक्यू (RNA-Seq) डेटा विश्लेषण पर भी ध्यान केन्द्रित किया गया, साथ ही विचारों तथा जानकारियों के आदान-प्रदान के लिए एक इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किया गया।

(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, हैदराबाद)

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