16 मई, 2026, खड़गपुर एवं कोलकाता
कृषि स्टार्टअप परिदृश्य को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत “प्रौद्योगिकी एवं उद्यमिता के माध्यम से कृषि परिवर्तन” विषय पर एक वर्चुअल संवादात्मक सत्र का आयोजन एग्री-फूड बिजनेस इन्क्यूबेशन सेंटर (एएफबीआसी), आईआईटी खड़गपुर तथा भाकृअएनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), कोलकाता द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस कार्यक्रम में कृषि उद्यमियों, स्टार्टअप्स तथा कृषि उद्यमिता से जुड़े विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया, जिससे नवाचार आधारित कृषि परिवर्तन को गति देने हेतु एक प्रभावी मंच उपलब्ध हुआ। यह पहल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि एएफबीआईसी, आईआईटी खड़गपुर पश्चिम बंगाल के लिए नामित आरकेवीवाई-रफ्तार (आरकेवीवाई-आरएएफटीएएआर) इन्क्यूबेटर के रूप में कार्य कर रहा है।
डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, कोलकाता, ने कृषि एवं बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, द्वितीयक कृषि, मूल्य संवर्धन तथा फसलोत्तर प्रबंधन क्षेत्रों में एक सशक्त उद्यमशील पारितंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संस्थागत समन्वय, प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार तथा युवाओं की उद्यमिता ग्रामीण आर्थिक अवसरों को बढ़ाने तथा विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने की कुंजी है।
इस सत्र में आरकेवीवाई-रफ्तार ढाँचे की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई, जिसमें पात्रता मानदंड, आवेदन प्रक्रिया तथा चयन प्रक्रिया का व्यापक विवरण शामिल था। कार्यक्रम ने नवाचारकर्ताओं एवं इच्छुक उद्यमियों को अपने विचारों को सफल एवं विस्तार योग्य उद्यमों में परिवर्तित करने हेतु व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया।

सत्र में आरकेवीवाई-रफ्तार (आरकेवीवाई-आरएएफटीएएआर) पारितंत्र के तीन प्रमुख स्तंभों — वित्तपोषण, इन्क्यूबेशन तथा मार्गदर्शन (मेंटॉरशिप) — पर विशेष प्रकाश डाला गया, जिनका उद्देश्य टिकाऊ कृषि उद्यमों को प्रोत्साहित करना है। प्रतिभागियों को विभिन्न वित्तीय अवसरों की जानकारी दी गई, जिनमें विचार-स्तर (आइडिया स्टेज) के नवाचारों हेतु ₹5 लाख तक की अनुदान सहायता तथा प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप्स के लिए ₹25 लाख या उससे अधिक की सहायता शामिल है। इससे नवाचारों को व्यावसायीकरण तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त होता है। कार्यक्रम में एएफबीआईसी (एएफबीआईसी) द्वारा उपलब्ध कराई जा रही इन्क्यूबेशन सुविधाओं का भी प्रदर्शन किया गया, जिनमें सह-कार्य (को-वर्किंग) अवसंरचना, प्रयोगशाला सुविधाएँ, बौद्धिक संपदा (आईपी) एवं विधिक सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन, व्यवसाय परामर्श सेवाएँ तथा बाज़ार उन्मुख उद्यम विकास सहयोग शामिल हैं। सत्र के दौरान बाज़ार संपर्क, मूल्य श्रृंखला एकीकरण, जलवायु-स्मार्ट नवाचार तथा निवेशकों से जुड़ाव के माध्यम से सुदृढ़ कृषि व्यवसाय मॉडल विकसित करने पर विशेष बल दिया गया।
इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न क्षेत्रों से 24 कृषि स्टार्टअप्स एवं जमीनी स्तर के कृषि उद्यमियों ने सक्रिय भागीदारी की। संवादात्मक सत्र के दौरान प्रतिभागियों को विशेषज्ञों से सीधे जुड़ने, विचारों का आदान-प्रदान करने, शंकाओं का समाधान प्राप्त करने तथा इन्क्यूबेशन एवं सहयोग के अवसरों का पता लगाने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके), इन्क्यूबेटरों तथा रणनीतिक साझेदारों के सहयोग से ग्रामीण नवाचारकर्ताओं को निरंतर मार्गदर्शन, क्षमता निर्माण तथा संस्थागत सहयोग प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह पहल क्षेत्र में एक सशक्त, विस्तार योग्य एवं टिकाऊ कृषि उद्यमिता पारितंत्र के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।
(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)







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