23 जनवरी, 2026, नई दिल्ली
भाकृअनुप तथा बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (बीआएसए) ने मिलकर जलवायु-अनुकूल कृषि पर राष्ट्रीय नवाचार (एनआईसीआरए) की समीक्षा तथा भारतीय कृषि में जलवायु अनुकूलन के एटलस (एसीएएसए–इंडिया) के लोकार्पण तथा इसकी उपयोगिता पर कार्यशाला का उद्घाटन आज डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप) द्वारा नई दिल्ली में किया गया।

कार्यशाला का मकसद एनआईसीआरए के पिछले 15 सालों की सीख को एक साथ लाना, जलवायु लचीलेपन के आधार पर भारत की उपलब्धियों का आकलन करना तथा एकीकृत विज्ञान तथा योजनाओं के बीच तालमेल और लक्षित निवेश के जरिए जलवायु-अनुकूल कृषि-खाद्य प्रणालियों को मजबूत करने हेतु एकजुटता के साथ डाटा-संचालित रोड मैप तैयार करना है।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. जाट ने कहा आज ज्ञान एवं नवीनीकरण का प्रतीक बसंत पंचमी है, यह एक बेहतर अवसर है भारत की जलवायु लचीलेपन की यात्रा पर विचार करने तथा आकाश एटलस एवं निक्रा पोर्टल सहित प्रमुख राष्ट्रीय ज्ञान प्लेटफार्मों को लॉन्च करने का। निक्रा के 15 साल पूरे होने पर उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है जिसके लिए स्पष्ट रणनीतिक दिशा एवं दीर्घकालिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में बार-बार होने वाले जलवायु तनावों के बावजूद भारतीय कृषि, लचीलापन एवं उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि प्रदर्शित की है जो जलवायु-अनुकूल प्रौद्योगिकियों, सक्षम नीतियों एवं संस्थागत तालमेल की प्रभावशीलता को रेखांकित करता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत का जलवायु लचीलेपन से जुड़े विज्ञान; योजनाओं, तकनीकी नवाचार, सुरक्षा घेरा, मानव पूंजी तथा समन्वित कार्यान्वयन एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र पर बना है। जिसमें, निक्रा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एवं पशुधन तथा मत्स्य पालन मिशन जैसी पहलें एक साथ मिलकर अनुकूलन क्षमता एवं किसानों की आजीविका को बढ़ा रही हैं। आगे की राह बताते हुए, डॉ. जाट ने डाटा, ज्ञान एवं निवेश को एक एकीकृत राष्ट्रीय जलवायु कार्य योजना के साथ गहराई से जोड़ने का आह्वान किया, जिससे सरकार तथा पूरे समाज के दृष्टिकोण को एक केन्द्रीकृत डाटा पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा समर्थित किया जा सके।

भविष्य को इंगित करते हुए, महानिदेशक (भाकृअनुप) ने दोहराया कि, भारत का अनुभव, जलवायु तनाव के आलोक में कृषि-खाद्य प्रणालियों को सुरक्षित करने हेतु विज्ञान-आधारित तथा नीतियों द्वारा प्रेरित समाधानों पर एक मजबूत वैश्विक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जो निक्रा को जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए एक संभावित वैश्विक मॉडल के रूप में भी स्थापित करता है।
इस मौके पर, उन्होंने औपचारिक रूप से भारतीय कृषि से जुड़े जलवायु अनुकूलन का एटलस (एसीएएसए–इंडिया) भी लॉन्च किया, जो भाकृअनुप के नेतृत्व वाले एनआरईएस ने बीसा–सिमिट (BISA–CIMMYT) के सहयोग से विकसित किया है। यह एक वेब-इनेबल्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो स्थान-विशिष्ट और डेटा-संचालित अनुकूलन योजना को सपोर्ट करता है।
गणमान्य व्यक्तियों में डॉ. ए.के. नायक, उप-महानिदेशक (एनआरएम), भाकृअनुप; डॉ. राजबीर सिंह, उप-महानिदेशक (कृषि विस्तार), भाकृअनुप; डॉ. बी. वेंकटेश्वरलू, चेयरमैन, निक्रा एक्सपर्ट कमेटी; डॉ. वी.के. सिंह, निदेशक, भाकृअनुप–केन्द्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद; तथा डॉ. पी.के. अग्रवाल, रीजनल प्रोग्राम लीडर, बीसा–सिमिट, शामिल थे।

इस मौके पर बोलते हुए, डॉ. राजबीर सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह कार्यशाला बड़े पैमाने पर विज्ञान को आगे बढ़ाने तथा जलवायु से जुड़े कार्य योजना हेतु एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने के लिए महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने भविष्य के जलवायु से जुड़े कार्य योजना एवं निवेश के लिए एक प्रमुख फोकस क्षेत्र के साथ-साथ मजबूत एवं विश्वसनीय कार्बन क्रेडिट जैसी कार्यप्रणाली की आवश्यकता हेतु उसे प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
डॉ. ए.के. नायक ने कहा कि यह कार्यशाला वैश्विक कृषि समुदाय के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह विज्ञान, डेटा एवं व्यवहारिक जानकारियों को एक साथ लाती है, जो वैश्विक कृषि-खाद्य प्रणाली में जलवायु लचीलेपन को मजबूत करने हेतु जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि कार्यशाला की चर्चाएं तथा नतीजे, कृषि में जलवायु से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के वैश्विक प्रयासों में सहायता करेगा।

कार्यशाला में निक्रा की प्रगति की भी समीक्षा की गई, जिसे देश भर के 151 सबसे ज़्यादा जलवायु आधार पर कमजोर जिलों में 200 से ज्यादा जगहों पर लागू किया जा रहा है। प्रतिभागियों ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत की दिशा में भारत की यात्रा के लिए जलवायु–अनुकूल कृषि में निक्रा के योगदान को मजबूत करना अति आवश्यक है।
उद्घाटन समारोह में सहायक महानिदेशक एवं भाकृअनुप के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुआ।
डॉ. ए. वेलमुरुगन, सहायक महानिदेशक (मृदा एवं जल प्रबंधन), भाकृअनुप, ने औपचारिक रूप से धन्यवाद ज्ञापन किया।







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