29 अगस्त, 2026, नरेन्द्रपुर
शस्य श्यामला कृषि विज्ञान केन्द्र, रामकृष्ण मिशन विवेकानंद शैक्षिक एवं अनुसंधान संस्थान, नरेन्द्रपुर ने आज भाकृअनुप-केन्द्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, कटक और भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता के सहयोग से “हर्बिसाइड-टॉलरेंट चावल की खेती और धान बीज उत्पादन” विषय पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य हर्बिसाइड-टॉलरेंट (HT) चावल प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक खरपतवार प्रबंधन और गुणवत्तापूर्ण धान बीज उत्पादन के बारे में किसानों के ज्ञान को बढ़ाना था, ताकि चावल की उत्पादकता और कृषि लाभप्रदता को प्रभावित करने वाली प्रमुख चुनौतियों का समाधान किया जा सके। कार्यक्रम में डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-एटीएआरआई कोलकाता एवं निदेशक (अतिरिक्त प्रभार), भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, बैरकपुर, ब्रह्मचारी सौमित्र महाराज, प्रभारी साधु, एसएसकेवीके और भाकृअनुप-सीआरआरआई के वैज्ञानिकों ने गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
अपने उद्घाटन संबोधन में सौमित्र महाराज ने कृषि उत्पादकता में सुधार और किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने में वैज्ञानिक ज्ञान तथा आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों की भूमिका पर जोर दिया।

डॉ. डे ने खरपतवार प्रबंधन में सुधार, मैनुअल श्रम पर निर्भरता कम करने, खेती की लागत घटाने, लैंगिक न्याय सुनिश्चित करने और समय पर खरपतवार नियंत्रण सुनिश्चित करने में हर्बिसाइड-टॉलरेंट चावल प्रौद्योगिकी की क्षमता पर प्रकाश डाला, जिससे किसानों को चावल की खेती की दक्षता और लाभप्रदता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने किसानों से फसल को होने वाले नुकसान और पर्यावरणीय जोखिमों से बचने के लिए अनुशंसित किस्मों, हर्बिसाइड की मात्रा, प्रयोग के समय और सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन करते हुए प्रौद्योगिकी को वैज्ञानिक और विवेकपूर्ण तरीके से अपनाने का आग्रह किया।
डॉ. डे ने जोर देकर कहा कि उन्नत प्रौद्योगिकियों को अधिक उपज, कम उत्पादन लागत, बेहतर कृषि आय और अधिक टिकाऊ चावल-आधारित आजीविकाओं में परिवर्तित करने के लिए मजबूत किसान–वैज्ञानिक संबंध, समय पर तकनीकी मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण बीज तक पहुंच आवश्यक है।
तकनीकी सत्र में किसानों को व्यावहारिक और खेत-केन्द्रित जानकारी प्रदान की गई। वैज्ञानिकों ने एचटी चावल प्रौद्योगिकी और भाकृअनुप-सीआरआरआई द्वारा विकसित हर्बिसाइड-टॉलरेंट चावल की किस्मों के बारे में जानकारी दी, जिसमें उनकी प्रमुख विशेषताओं और उपज क्षमता को शामिल किया गया। उन्होंने अनुशंसित बुवाई समय और विधियों, उपयुक्त हर्बिसाइड, प्रयोग की सही मात्रा और समय, प्रयोग की विधियों तथा आवश्यक सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने एचटी चावल की उपज क्षमता प्राप्त करने के लिए समय पर खरपतवार नियंत्रण और उचित फसल प्रबंधन प्रथाओं पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम ने किसानों और वैज्ञानिकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद के लिए भी एक मंच प्रदान किया। संवादात्मक सत्र के दौरान किसानों ने अपने खेतों के अनुभव साझा किए और एचटी चावल की खेती, हर्बिसाइड के प्रयोग, खरपतवार प्रबंधन और धान बीज उत्पादन से संबंधित व्यावहारिक प्रश्न उठाए। भाग लेने वाले वैज्ञानिकों ने प्रश्नों का उत्तर दिया और किसानों की खेत की परिस्थितियों के अनुकूल तकनीकी सुझाव प्रदान किए।
इस कार्यक्रम ने छोटे और सीमांत किसानों के बीच प्रौद्योगिकी-आधारित चावल की खेती को सुदृढ़ करने तथा दक्षिण 24 परगना के चावल उत्पादक क्षेत्रों में सुरक्षित, वैज्ञानिक और कुशल खरपतवार प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया।
कार्यक्रम में दक्षिण 24 परगना के बसंती, भांगर और गोसाबा ब्लॉकों के 82 अनुसूचित जाति के किसानों ने भाग लिया, जिसमें उन्नत चावल प्रौद्योगिकियों को प्रयोगशाला से किसानों के खेतों तक पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)







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