कार निकोबार के बिग लापाथी गांव में विश्व महासागर दिवस एवं खेत बचाओ अभियान 2026 के आयोजन के माध्यम से महासागर संरक्षण और सतत कृषि पर विशेष जोर

कार निकोबार के बिग लापाथी गांव में विश्व महासागर दिवस एवं खेत बचाओ अभियान 2026 के आयोजन के माध्यम से महासागर संरक्षण और सतत कृषि पर विशेष जोर

8 जून, 2026, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह

भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान, कृषि विज्ञान केन्द्र, निकोबार ने आज कार निकोबार के बिग लापाथी गांव में विश्व महासागर दिवस एवं खेत बचाओ अभियान–2026 का आयोजन एवं उत्सव मनाया।

कार्यक्रम में डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, कोलकाता, मुख्य अतिथि के रूप में, डॉ. जय सुंदर, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएआरआई, पोर्ट ब्लेयर तथा श्री मनुआह थॉमस, कैप्टन, बिग लापाथी गांव, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि डॉ. प्रदीप डे ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए महासागरों की रक्षा करने और भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने किसानों को पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने, अपने गांवों में स्वच्छता बनाए रखने तथा पर्यावरण और अपनी आजीविका दोनों की सुरक्षा के लिए सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

World Ocean Day and Khet Bachao Abhiyan 2026 Observed at Big Lapathy Village, Car Nicobar with Focus on Ocean Conservation and Sustainable Agriculture

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. जय सुंदर ने सतत विकास के लिए महासागरों, वनों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने बताया कि महासागर पृथ्वी पर प्राकृतिक रूप से कार्बन अवशोषित करने वाले सबसे बड़े स्रोत हैं, जो वायुमंडलीय कार्बन का लगभग 25–30 प्रतिशत अवशोषित करते हैं और इस प्रकार पृथ्वी की जलवायु को नियंत्रित करने तथा वैश्विक तापमान को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि यद्यपि पृथ्वी की लगभग 70 प्रतिशत सतह जल से आच्छादित है, फिर भी अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह सहित अनेक क्षेत्रों में मीठे पानी की कमी बनी हुई है, जो जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा सतत जल प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

डॉ. जय सुंदर ने पारिस्थितिक संतुलन की पुनर्स्थापना, जैव विविधता को बढ़ावा देने और जलवायु सहनशीलता को सुदृढ़ करने के लिए देशज वृक्ष प्रजातियों के रोपण और संरक्षण के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने इंगित किया कि जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक तापमान में वृद्धि, हिमनदों का पिघलना, समुद्र-स्तर में वृद्धि और भूमि क्षरण जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, जिससे तटीय और द्वीपीय पारिस्थितिकी तंत्र विशेष रूप से संवेदनशील हो गए हैं। वन हेल्थ दृष्टिकोण पर जोर देते हुए उन्होंने सतत संसाधन प्रबंधन और संरक्षण पहलों में समुदाय की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

विकास विभाग के प्रतिनिधियों ने निकोबार द्वीपसमूह में पारिस्थितिक संतुलन और कृषि स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए समेकित कृषि प्रणालियों, जैव विविधता संरक्षण, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, सतत मत्स्य पालन और वनीकरण की भूमिका पर प्रकाश डाला। समारोह के अंतर्गत बिग लापाथी गांव के समुद्र तट पर समुद्र तट स्वच्छता अभियान तथा वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

World Ocean Day and Khet Bachao Abhiyan 2026 Observed at Big Lapathy Village, Car Nicobar with Focus on Ocean Conservation and Sustainable Agriculture

विभागीय अधिकारियों, केवीके कर्मचारियों तथा किसानों ने वृक्षारोपण अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया और महासागर संरक्षण तथा अधिक हरित तथा स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के दौरान पशुपालन, कृषि, मत्स्य एवं वन विभाग के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। केवीके निकोबार के वैज्ञानिकों और कर्मचारियों ने भी कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी की।

कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों द्वारा निकोबार द्वीपसमूह में पर्यावरण संरक्षण, महासागर सुरक्षा और सतत विकास के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने की पुनः प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

कार्यक्रम में गांव के लगभग 60 किसानों और कृषक महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजय पुरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह)

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