कारवार में जलवायु-अनुकूल हरित कृषि-पारिस्थितिकी पर्यटन मॉडल को बढ़ावा देने हेतु जमीनी स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

कारवार में जलवायु-अनुकूल हरित कृषि-पारिस्थितिकी पर्यटन मॉडल को बढ़ावा देने हेतु जमीनी स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

3 सितंबर, 2026, कर्नाटक

आज तटीय कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के कारवार स्थित रिवर डेक में जलवायु-सहनीय हरित कृषि-पारिस्थितिकी पर्यटन मॉडल के विकास, विशेष रूप से एक्वा इको-टूरिज्म पर केन्द्रित, एक जमीनी स्तर का जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मत्स्य किसानों और तटीय समुदायों के बीच आजीविका विविधीकरण, सतत जलीय कृषि, तटीय पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण और जलवायु सहनशीलता को बढ़ावा देने में एक्वा इको-टूरिज्म की संभावनाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया।

तटीय क्षेत्र समृद्ध मत्स्य संसाधनों, जलीय कृषि प्रणालियों, मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्रों और विविध प्राकृतिक परिदृश्यों से समृद्ध हैं, जो सतत आजीविका विकास के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। चूंकि अनेक मत्स्य किसान और तटीय समुदाय अपनी आय के लिए मुख्य रूप से मत्स्य पालन और जलीय कृषि पर निर्भर हैं, इसलिए पूरक आजीविका गतिविधियों में विविधीकरण से आर्थिक सुरक्षा और सहनशीलता को मजबूत किया जा सकता है। इस संदर्भ में, एक्वा इको-टूरिज्म जलीय कृषि और मत्स्य पालन को पर्यटन, मनोरंजन, पर्यावरण शिक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण के साथ एकीकृत करने का अवसर प्रदान करता है।

कार्यक्रम में मौजूदा जलीय कृषि और तटीय संसाधनों की आगंतुक-केन्द्रित विभिन्न गतिविधियों को समर्थन देने की क्षमता पर प्रकाश डाला गया, जिनमें फार्म भ्रमण, मछली पकड़ने के अनुभव, जलीय कृषि प्रदर्शन, प्रकृति-आधारित गतिविधियां और मनोरंजक अनुभव शामिल हैं। ऐसी गतिविधियां मत्स्य किसानों के लिए अतिरिक्त आय उत्पन्न कर सकती हैं, साथ ही उन्हें अपनी प्राथमिक जलीय कृषि और मत्स्य पालन गतिविधियों को जारी रखने में सक्षम बनाती हैं।

कार्यक्रम के दौरान हुई चर्चाओं में एक्वा इको-टूरिज्म को सतत और जिम्मेदार तरीके से विकसित करने के महत्व पर जोर दिया गया। जलीय पर्यावरण की पारिस्थितिक वहन क्षमता के साथ पर्यटन संबंधी गतिविधियों में संतुलन तथा जलीय पारिस्थितिकी तंत्रों पर प्रतिकूल प्रभावों को न्यूनतम करने एवं उनकी दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।

Field-Level Awareness Programme on Climate-Resilient Green Agro-Eco-Tourism Models Held in Karwar

मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्रों के महत्व तथा उनके संरक्षण और पुनर्वनीकरण पर भी चर्चा की गई, जिसे जलवायु-सहनीय तटीय विकास के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में रेखांकित किया गया। एक्वा इको-टूरिज्म के साथ मैंग्रोव संरक्षण को एकीकृत करने से आगंतुकों के बीच पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाई जा सकती है, साथ ही प्रकृति-आधारित पर्यटन के अवसर पैदा किए जा सकते हैं और तटीय समुदायों की पारिस्थितिक सहनशीलता को मजबूत किया जा सकता है।

कार्यक्रम में मत्स्य किसानों के बीच बहु-आय सृजन और आजीविका विविधीकरण को बढ़ावा देने में एक्वा इको-टूरिज्म की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। यह सुनिश्चित करने में सामुदायिक भागीदारी को एक प्रमुख कारक के रूप में चिन्हित किया गया कि पर्यटन से संबंधित आर्थिक लाभ मत्स्य किसानों, स्थानीय युवाओं और तटीय समुदायों के अन्य सदस्यों तक पहुंचे। स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी बेहतर संसाधन प्रबंधन, संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन प्रथाओं में भी योगदान दे सकती है।

प्रगतिशील केज कल्चर किसानों की भागीदारी ने व्यावहारिक अनुभवों के आदान-प्रदान तथा जलीय कृषि गतिविधियों को पर्यटन और अन्य पूरक आजीविका अवसरों के साथ एकीकृत करने की संभावनाओं पर चर्चा का अवसर प्रदान किया।

कुल मिलाकर, कार्यक्रम ने जलीय कृषि, पर्यटन, आजीविका विविधीकरण, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु सहनशीलता के एकीकरण पर ज्ञान के आदान-प्रदान और चर्चा के लिए एक मंच के रूप में कार्य किया। इसमें एक्वा इको-टूरिज्म को एक आशाजनक जलवायु-सहनीय आजीविका विविधीकरण दृष्टिकोण के रूप में रेखांकित किया गया, जो सतत जलीय कृषि, मैंग्रोव संरक्षण और तटीय संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ मत्स्य किसानों के लिए अतिरिक्त आय उत्पन्न करने में सक्षम है।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा)

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