24 जून, 2026, चोपड़ा, उत्तर दिनाजपुर
खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने आईसीएआर–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप–अटारी), कोलकाता के अधिकार क्षेत्र में संचालित उत्तर दिनाजपुर कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), उत्तर बंग कृषि विश्वविद्यालय (यूबीकेवी), चोपड़ा का दौरा किया। इस यात्रा ने आईसीएआर, कृषि विज्ञान केंद्रों तथा कृषि विभाग के सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से टिकाऊ कृषि, प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संरक्षण तथा किसान कल्याण को बढ़ावा देने के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।
मंत्री का स्वागत प्रो. विधान राय, प्रभारी कुलपति, यूबीकेवी; डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप–अटारी, कोलकाता एवं निदेशक (अतिरिक्त प्रभार), भाकृअनुप–केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर; प्रो. रंजीत चटर्जी, प्रभारी निदेशक (प्रसार शिक्षा), यूबीकेवी; तथा वरिष्ठ जिला अधिकारियों, वैज्ञानिकों, कृषि प्रसार कर्मियों एवं अन्य हितधारकों द्वारा किया गया।
यात्रा की शुरुआत ‘एक पेड़ माँ के नाम’ वृक्षारोपण अभियान से हुई, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है तथा वनीकरण एवं पारिस्थितिकीय स्थिरता में जनभागीदारी को प्रोत्साहित करता है।

इसके पश्चात मंत्री ने खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत स्थापित प्राकृतिक खेती प्रदर्शन इकाई का अवलोकन किया, जहां उन्होंने प्राकृतिक खेती के विभिन्न आदानों की तैयारी को देखा। इस प्रदर्शन में कम लागत वाली, पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को प्रदर्शित किया गया, जिनका उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य में सुधार, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम करना तथा टिकाऊ कृषि उत्पादन प्रणाली को बढ़ावा देना है।
इस यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण नवस्थापित केवीके हैचरी इकाई का उद्घाटन रहा। यह इकाई ग्रामीण परिवारों के लिए कुक्कुट आधारित आजीविका के अवसरों को सुदृढ़ करने, प्रौद्योगिकी के प्रसार को बढ़ावा देने तथा विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं के बीच आय के विविधीकरण को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
दौरे के दौरान श्री रामनाथ ठाकुर ने महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की सदस्यों के साथ भी संवाद किया तथा ग्रामीण उद्यमिता, मूल्य संवर्धन एवं आजीविका सृजन में उनके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। किसानों के साथ चाय पर अनौपचारिक बातचीत के दौरान उन्होंने कृषि उत्पादन, विपणन तथा उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने से संबंधित उनके अनुभवों, चुनौतियों एवं सुझावों को सुना। यह संवाद नीति-निर्माताओं एवं किसान समुदाय के बीच प्रत्यक्ष संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ।
सभा को संबोधित करते हुए मंत्री ने दीर्घकालिक उत्पादकता, लाभप्रदता एवं पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए टिकाऊ एवं जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती, वैज्ञानिक नवाचारों एवं आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने तथा कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे तकनीकी मार्गदर्शन एवं प्रसार सेवाओं का प्रभावी उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।
संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री रामनाथ ठाकुर ने किसानों से मृदा स्वास्थ्य कार्ड का प्रभावी उपयोग कर आवश्यकता आधारित उर्वरक प्रयोग करने का आग्रह किया, ताकि मृदा उर्वरता में सुधार हो, पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़े तथा टिकाऊ फसल उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कृषि विज्ञान केन्द्र प्रयोगशालाओं से अनुसंधान आधारित प्रौद्योगिकियों को किसानों के खेतों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं से कौशल विकास, उद्यमिता तथा कृषि एवं उससे संबद्ध उद्यमों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया, ताकि परिवारों की आय में वृद्धि हो सके। उत्तर दिनाजपुर कृषि विज्ञान केंद्र की किसान-केंद्रित पहलों की सराहना करते हुए मंत्री ने इसके पेटेंट प्राप्त शिशु पूरक आहार (Weaning Food) नवाचार की भी प्रशंसा की और इसे कृषि नवाचार, पोषण तथा भारत सरकार के टिकाऊ कृषि विकास एवं किसान समृद्धि के दृष्टिकोण की दिशा में एक उल्लेखनीय योगदान बताया।
इससे पूर्व डॉ. प्रदीप डे ने प्राकृतिक खेती, जलवायु-लचीली कृषि, ग्रामीण उद्यमिता तथा प्रौद्योगिकी आधारित कृषि परिवर्तन को बढ़ावा देने में उत्तर दिनाजपुर कृषि विज्ञान केंद्र एवं केवीके नेटवर्क के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से क्षेत्र में टिकाऊ ग्रामीण आजीविका एवं कृषि विकास को सुदृढ़ किया जा रहा है।
कार्यक्रम का समापन डॉ. प्रदीप डे द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने केंद्रीय मंत्री, विशिष्ट अतिथियों, जिला प्रशासन, वैज्ञानिकों, किसानों, स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों तथा सभी प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
मंत्री की इस यात्रा का सफल आयोजन उत्तर दिनाजपुर कृषि विज्ञान केंद्र की टिकाऊ कृषि एवं ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह यात्रा किसानों एवं कृषि प्रसार कर्मियों दोनों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध हुई तथा एक बार फिर भारत सरकार की सुदृढ़, समावेशी एवं टिकाऊ कृषि क्षेत्र के निर्माण की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।
(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)







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