केवीके रायगढ़ा में अनुसंधान–प्रसार समन्वय बैठक ने एल नीनो खतरे के बीच खरीफ तैयारियों को किया सुदृढ़

केवीके रायगढ़ा में अनुसंधान–प्रसार समन्वय बैठक ने एल नीनो खतरे के बीच खरीफ तैयारियों को किया सुदृढ़

21 जुलाई, 2026, रायगढ़ा

खरीफ 2026 के दौरान एल नीनो से प्रेरित संभावित वर्षा घाटे के प्रभावों से कृषि की सुरक्षा के लिए एक सक्रिय पहल के तहत, आईसीएआर–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-एटारी), कोलकाता, के अधिकार क्षेत्र में आने वाले कृषि विज्ञान केन्द्र (ओयूएटी), रायगढ़ा ने आज एक अनुसंधान–प्रसार समन्वय बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में वैज्ञानिकों, जिला अधिकारियों और विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया तथा दक्षिण-पश्चिम मानसून की संभावित अनियमितता से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए एक समन्वित रणनीति तैयार की। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा रायगढ़ा को ओडिशा के उन आठ जिलों में शामिल किया गया है, जिन्हें संभावित वर्षा घाटे के प्रति अत्यधिक संवेदनशील माना गया है।

मुख्य प्रस्तुति देते हुए, केवीके रायगढ़ा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख ने 20 जुलाई 2026 तक की ब्लॉकवार वर्षा स्थिति, मौसमी मौसम परिदृश्य, आकस्मिक फसल योजनाएं तथा एल नीनो के प्रभावों को कम करने के लिए केवीके द्वारा किए जा रहे हस्तक्षेपों की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने यह भी घोषणा की कि केवीके वैज्ञानिकों तथा कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारियों को शामिल करते हुए दो बहु-विषयक निगरानी दलों का गठन किया गया है, जो सप्ताह में दो बार क्षेत्रीय भ्रमण कर फसल की स्थिति, कृषि आदानों की उपलब्धता, सिंचाई, कीट प्रकोप तथा अन्य उभरते मुद्दों की निगरानी करेंगे। समयबद्ध नीतिगत हस्तक्षेपों को सुगम बनाने के लिए साप्ताहिक रिपोर्ट जिला कलेक्टर और राज्य सरकार को प्रस्तुत की जाएगी।

Research–Extension Interface Meeting at KVK Rayagada Strengthens Kharif Preparedness against El Niño Threat

उन्होंने एक व्यापक कार्ययोजना की भी रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें सप्ताह में दो बार मौसम आधारित कृषि परामर्श, किसान सारथी प्लेटफॉर्म के माध्यम से मोबाइल आधारित सलाह, हरी खाद एवं प्राकृतिक खेती पर प्रदर्शन, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) पर जागरूकता अभियान तथा सोशल मीडिया के माध्यम से परामर्शों का व्यापक प्रसार शामिल है, ताकि किसानों को समय पर और स्थान-विशिष्ट जानकारी प्राप्त हो सके।

इस पहल पर अपने विचार साझा करते हुए, डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-एटारी, कोलकाता, ने कहा, “जलवायु परिवर्तन से प्रेरित मौसमीय अनिश्चितताओं की बढ़ती आवृत्ति अनुसंधान–प्रसार समन्वय और जिला स्तर पर समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। केवीके रायगढ़ा की यह पहल वैज्ञानिक ज्ञान को समयबद्ध क्षेत्रीय हस्तक्षेपों में परिवर्तित करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिससे किसान एल नीनो से प्रेरित संभावित वर्षा घाटे का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।

अनुसंधान संस्थानों, विभागीय एजेंसियों और प्रसार तंत्र के अभिसरण के साथ-साथ वास्तविक समय निगरानी, मौसम आधारित परामर्श और आकस्मिक योजना के माध्यम से हमारा उद्देश्य कृषि समुदाय की लचीलापन क्षमता को बढ़ाना और कृषि उत्पादन पर जोखिम को न्यूनतम करना है। टिकाऊ आजीविका और जलवायु-सहिष्णु कृषि सुनिश्चित करने के लिए इस प्रकार की सहयोगात्मक तैयारी अत्यंत आवश्यक है।”

Research–Extension Interface Meeting at KVK Rayagada Strengthens Kharif Preparedness against El Niño Threat

सभी ब्लॉकों के कृषि अधिकारियों ने वर्तमान फसल स्थिति, उर्वरक एवं बीजों की उपलब्धता तथा क्षेत्र स्तर पर लागू की जा रही आकस्मिक व्यवस्थाओं की जानकारी प्रस्तुत की। पशु संसाधन विकास विभाग के अधिकारियों ने साइलेज उत्पादन के माध्यम से चारा सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा खुरपका-मुंहपका रोग (एफएमडी) टीकाकरण सहित टीकाकरण कार्यक्रमों के माध्यम से पशुधन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अपनी तैयारियों का विवरण प्रस्तुत किया।

बैठक में केवीके वैज्ञानिकों तथा कृषि, बागवानी, सिंचाई, मृदा संरक्षण और पशु संसाधन विकास विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ सहयोगी गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की। चर्चा का मुख्य केन्द्र जिला स्तर की तैयारियां, अंतर-विभागीय समन्वय तथा फसल हानि को न्यूनतम करने और किसानों की आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु आकस्मिक उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन पर रहा।

बैठक का समापन सभी सहभागी विभागों द्वारा इस दृढ़ संकल्प के साथ किया गया कि वे खरीफ 2026 के दौरान समयबद्ध हस्तक्षेप सुनिश्चित करने, जलवायु लचीलापन को सुदृढ़ करने तथा कृषि उत्पादन और किसानों की आजीविका की रक्षा के लिए केवीके रायगढ़ा के साथ निकट समन्वय में कार्य करेंगे।

(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)

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