केवीके सुंदरगढ़-I में अनुसंधान–प्रसार इंटरफेस बैठक ने जलवायु-लचीली खरीफ तैयारी रणनीति की रूपरेखा तैयार की

केवीके सुंदरगढ़-I में अनुसंधान–प्रसार इंटरफेस बैठक ने जलवायु-लचीली खरीफ तैयारी रणनीति की रूपरेखा तैयार की

28 जुलाई, 2026, सुंदरगढ़

जलवायु-लचीली कृषि को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, आईसीएआर-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), कोलकाता, के अधिकार क्षेत्र अंतर्गत केवीके (ओयूएटी) सुंदरगढ़-I में अनुसंधान–प्रसार इंटरफेस बैठक आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य खरीफ 2026 मौसम के दौरान संभावित एल नीनो प्रभावों से निपटने के लिए एक समन्वित जिला-स्तरीय रणनीति तैयार करना था। इस बैठक में प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया, जिनमें मुख्य जिला कृषि अधिकारी (CDAO), उपनिदेशक (उद्यानिकी), परियोजना निदेशक (मृदा संरक्षण), मुख्य जिला पशु चिकित्सा अधिकारी, जिला मत्स्य अधिकारी, जिला विकास प्रबंधक, अधीक्षण अभियंता (लघु सिंचाई), ओडिशा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन, क्षेत्रीय अनुसंधान प्रौद्योगिकी हस्तांतरण उप-केंद्र, सहकारिता विभाग, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, केवीके सुंदरगढ़-I और केवीके सुंदरगढ़-II, वैज्ञानिक, गैर-सरकारी संगठन (NGO) प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठन (FPOs), प्रगतिशील किसान एवं महिला किसान शामिल थे।

विचार-विमर्श का केंद्र वर्तमान वर्षा परिदृश्य रहा, जिसमें जून माह के दौरान 67 प्रतिशत वर्षा की कमी तथा जुलाई में 40 प्रतिशत अतिरिक्त वर्षा दर्ज की गई, जिससे समयबद्ध आकस्मिक योजना एवं अनुकूल कृषि हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर बल दिया गया।

जिला फसल परिदृश्य प्रस्तुत करते हुए मुख्य जिला कृषि अधिकारी ने जानकारी दी कि लगभग 50 प्रतिशत फसल क्षेत्र में प्रसारण विधि (ब्रॉडकास्टिंग) द्वारा बुवाई पूरी हो चुकी है, जबकि शेष क्षेत्र में रोपाई की तैयारी चल रही है। मानसून में विलंब तथा जलवायु अनिश्चितता को देखते हुए बैठक में उत्पादन जोखिम को कम करने और किसानों की लचीलापन क्षमता बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री मक्का मिशन के अंतर्गत मक्का, ओडिशा मिलेट मिशन के अंतर्गत बाजरा, अरहर, उड़द, तिल एवं मूंगफली को बढ़ावा देकर फसल विविधीकरण की सिफारिश की गई।

अधिकारियों ने एसएमएस एवं व्हाट्सएप के माध्यम से नियमित मौसम-आधारित कृषि परामर्श, किसान सारथी सलाहकारी सेवाओं को सुदृढ़ करने, फसल स्वास्थ्य, कीटों, रोगों एवं नमी तनाव की निरंतर निगरानी तथा जलवायु-लचीली प्रौद्योगिकियों, नमी संरक्षण, वैकल्पिक फसल प्रणालियों, सूखा शमन एवं कुशल जल प्रबंधन को बढ़ावा देकर जिला आकस्मिक योजना को लागू करने पर जोर दिया।

बैठक पर अपने विचार व्यक्त करते हुए भाकृअनुप-आटारी, कोलकाता के निदेशक ने कहा, “भाकृअनुप-आटारी, कोलकाता किसानों की जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रति लचीलापन क्षमता बढ़ाने के लिए अनुसंधान–प्रसार अभिसरण को प्रोत्साहित करने हेतु प्रतिबद्ध है। जिला-स्तरीय तैयारियों को सुदृढ़ करना, विज्ञान-आधारित जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देना, समय पर परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराना तथा प्रभावी अंतर-विभागीय समन्वय सुनिश्चित करना सतत कृषि विकास के लिए हमारी प्रमुख प्राथमिकताएं बनी रहेंगी।”

Research–Extension Interface Meeting at KVK Sundargarh-I Charts Climate-Resilient Kharif Preparedness Strategy

बैठक में गुणवत्तायुक्त बीजों, उर्वरकों, जैव-उर्वरकों, जैव-कीटनाशकों, सूक्ष्मजीवी संघों तथा अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता की व्यापक समीक्षा की गई, ताकि ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर उनकी समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) तथा अन्य सरकारी योजनाओं के प्रति किसानों की जागरूकता बढ़ाने, हरित खाद को बढ़ावा देने तथा सतत फसल उत्पादन के लिए उर्वरकों के अनुकूलतम उपयोग के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।

मृदा संरक्षण विभाग के परियोजना निदेशक ने खाद्य एवं पोषण सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से अभिनव कृषि वानिकी पहलों को प्रस्तुत किया, जबकि उद्यानिकी उपनिदेशक ने पीएमकेएसवाई के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई आधारित फल बागानों के विस्तार तथा अतिरिक्त आजीविका अवसर के रूप में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने पर बल दिया।

पशु संसाधन विकास विभाग के अधिकारियों ने चारा उत्पादन, एजोला उत्पादन, डेयरी विकास, कुक्कुट पालन एवं बकरी पालन को बढ़ावा देकर एकीकृत कृषि पद्धतियों को अपनाने की वकालत की, ताकि ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ किया जा सके।

नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाली जीवा (JIVA) परियोजना पर प्रकाश डाला तथा लहुनीपाड़ा ब्लॉक के बिजाघाट गांव स्थित बायोडाइजेस्टर इकाई के अध्ययन भ्रमण का प्रस्ताव रखा, जहां व्यापक अपनाने के लिए उन्नत जीवामृत निर्माण तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

बैठक का एक प्रमुख परिणाम विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं केवीके वैज्ञानिकों से युक्त एक बहु-विषयक जिला निगरानी दल के गठन का निर्णय रहा। यह दल नियमित रूप से फसल स्थिति, आदानों की उपलब्धता, कीट प्रकोप एवं उभरती क्षेत्रीय परिस्थितियों की निगरानी करेगा तथा त्वरित हस्तक्षेप हेतु जिला कलेक्टर को समय पर रिपोर्ट एवं सिफारिशें प्रदान करेगा।

बैठक का समापन सभी सहभागी विभागों की इस दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ हुआ कि वे जलवायु-लचीले हस्तक्षेपों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केवीके सुंदरगढ़-I के साथ घनिष्ठ अभिसरण में कार्य करेंगे। हितधारकों ने अंतर-विभागीय समन्वय को सुदृढ़ करने, समय पर क्षेत्रीय स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा खरीफ 2026 के दौरान संभावित एल नीनो चुनौतियों के विरुद्ध कृषि उत्पादन एवं किसानों की आजीविका की सुरक्षा करने का संकल्प लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)

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