13 फरवरी, 2026, जयपुर
आज भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, ज़ोन-II, जोधपुर, तथा भाकृअनुप-भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान ने मिलकर क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र (आरएआरआई), दुर्गापुरा, जयपुर, राजस्थान, में “किसान सारथी कोष 2.0 का इस्तेमाल करके बाजरा उत्पादन हेतु परामर्श देने” पर एक दिन की संवेदनशीलता एवं जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया।
मुख्य अतिथि, डॉ. पी.एस. चौहान, कुलपति, श्री करण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, ने सरकारी पहलों तथा कृषि विकास कार्यक्रम के बारे में किसानों में जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने भारत सरकार के क्षेत्रीय ऋण प्रवाह की तुलना करते हुए बताया कि लगभग 54% क्रेडिट कृषि को दिया जाता है, जबकि 77% इंडस्ट्रियल सेक्टर को दिया जाता है। डॉ. चौहान ने अवसंरचना विकास को मजबूत करने के लिए खेती के लिए लॉन्ग-टर्म क्रेडिट सहायता बढ़ाने की अहमियत पर ज़ोर दिया, न कि ज़्यादातर शॉर्ट-टर्म क्रेडिट पर निर्भर रहने के, जो काफी हद तक खेती के क्रेडिट बनाने के प्रोसेस से जुड़े पहलुओं से प्रभावित होता है।
डॉ. जे. पी. मिश्रा, निदेशक, भाकृनुप-अटारी, ज़ोन-II ने राजस्थान, हरियाणा, और दिल्ली में बाजरे की मुख्य फसल और खेती की लाइफ लाइन के तौर पर अहमियत पर ज़ोर दिया, जहां यह सदियों से खाने की आदतों का अहम हिस्सा रहा है। उन्होंने बताया कि ये राज्य मिलकर देश के कुल बाजरे के प्रोडक्शन में लगभग 70% का योगदान देते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि दो खास मोबाइल एप्लिकेशन बनाए गए हैं, एक किसानों के लिए और दूसरा विशेषज्ञ के लिए ताकि सवालों के जवाब, फसल चक्र में कंटेंट का संश्लेषण तथा अच्छी सलाह देने वाली सर्विस मिल सकें।

सीनियर अधिकारियों ने दोहराया कि विस्तार व्यवस्था किसानों तक असरदार तकनीकी ट्रांसफर और खेती के आधुनिक नवाचार को पहुंचाने के लिए रीढ़ की हड्डी का काम करता है। किसानों को जोड़ने को आसान बनाने के लिए, क्यूआर (QR) कोड और टोल-फ्री नंबर (18001232175 और 14426) शुरू किए गए हैं ताकि किसानों और एक्सपर्ट्स दोनों के लिए रजिस्ट्रेशन आसान हो सके।
तकनीकी सत्र के दौरान, व्हाइट ग्रब के प्रबंधन और नियंत्रण पर एक लेक्चर दिया गया, जिसमें असरदार बचाव और कंट्रोल के तरीके बताया गया। प्रोजेक्ट का एक रूपरेखा भी पेश किया गया, जिसमें उनका मकसद, खास हिस्से और उम्मीद के मुताबिक नतीजों के बारे में डिटेल में बताया गया।
कार्यशाला में राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के सभी 66 कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) ने एक्टिव हिस्सा लिया।
प्रतिभागियों को मल्टीमीडिया वाले सलाहकारी टूल्स के ज़रिए जानकारी फैलाने और किसानों के सवालों का असरदार तरीके से जवाब देने के लिए एप्लिकेशन के व्यवहारिक इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी गई।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, ज़ोन-II, जोधपुर)







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