कक्षा से ब्लू इकोनॉमी तक: भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान द्वारा युवा छात्रों को मत्स्य उद्यमिता की ओर किया प्रेरित

कक्षा से ब्लू इकोनॉमी तक: भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान द्वारा युवा छात्रों को मत्स्य उद्यमिता की ओर किया प्रेरित

17 मार्च, 2026, बैरकपुर

भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीआईएफआरआई), कोलकाता, ने मत्स्य क्षेत्र में वैज्ञानिक शिक्षा को बढ़ावा देने और भविष्य के कृषि-उद्यमियों को तैयार करने की अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए पीएम श्री योजना के अंतर्गत पीएम केन्द्रीय विद्यालय नंबर 1 आईआईटी खड़गपुर, के छात्रों के लिए एक शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया। यह कार्यक्रम संस्थान के 80वें स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले छात्रों ने स्थापना दिवस की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिससे यह भ्रमण ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ। इस पहल का उद्देश्य शिक्षा को नवाचार के साथ जोड़ना तथा छात्रों में मत्स्य विज्ञान, सतत जलीय कृषि और उद्यमिता की व्यापक संभावनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना था, जिससे एक सशक्त एवं आत्मनिर्भर भविष्य की पीढ़ी का निर्माण हो सके।

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उद्घाटन सत्र के दौरान डॉ प्रदीप डे, निदेशक, आईसीएआर–सीआईएफआरआई, ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि संस्थान का उद्देश्य जनरेशन Z को मत्स्य विज्ञान के विभिन्न आयामों से परिचित कराना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रारंभिक स्तर पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने से युवा भविष्य के उद्यमी बन सकते हैं, जो रोजगार सृजन के साथ देश की ब्लू इकोनॉमी में योगदान देंगे।

इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान छात्रों को अंतर्देशीय मत्स्य पालन को एक वैज्ञानिक विषय तथा आजीविका के व्यवहारिक विकल्प के रूप में समझने का अवसर मिला। उन्होंने अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और अनुसंधान सुविधाओं का भ्रमण किया तथा जलीय जैव विविधता, पर्यावरण निगरानी और सतत संसाधन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया।

इस भ्रमण का एक प्रमुख आकर्षण एक्वेरियम एवं अलंकारिक मछली इकाइयां रहीं, जहाँ छात्रों को आधुनिक जलीय कृषि तकनीकों और सजावटी मत्स्य पालन के बारे में जानकारी दी गई। इससे मछली आधारित उद्यमों और मूल्य संवर्धित उत्पादों में उभरते अवसरों के प्रति उनकी समझ और व्यापक हुई।

वैज्ञानिकों एवं तकनीकी विशेषज्ञों के साथ संवादात्मक सत्रों ने भी छात्रों के सीखने के अनुभव को समृद्ध किया, जिससे उन्हें यह समझने में सहायता मिली कि किस प्रकार अनुसंधान एवं नवाचार मत्स्य क्षेत्र और पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों का समाधान कर रहे हैं।

छात्र–वैज्ञानिक संवाद के इस मंच को PM SHRI योजना के उद्देश्यों के अनुरूप तैयार किया गया था, जिसका लक्ष्य अनुभवात्मक शिक्षा को बढ़ावा देना और कक्षा में प्राप्त ज्ञान को वास्तविक जीवन के अनुप्रयोगों से जोड़ना है।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)

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