19–20 फरवरी, 2026, भुवनेश्वर
कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में एर्गोनॉमिक्स और सेफ्टी पर ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटर रिसर्च प्रोजेक्ट (ESAAS पर AICRP) की XVII सालाना वर्कशॉप 19–20 फरवरी, 2026 को ओडिशा कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय (ओयूएटी), भुवनेश्वर, ओडिशा, में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।
मुक्य अतिथि, डॉ. मृणालिनी दरसवाल, कमिश्नर-कम-सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग, ओडिशा सरकार, ने महिलाओं के लिए फायदेमंद एर्गोनॉमिक उपकरण तथा तकनीकी बनाने के लिए ईएसएएएस पर एआईसीआरपी की तारीफ की, जो काम के खतरों तथा मेहनत को कम करते हैं। उन्होंने महिला किसानों के आराम, उत्पादकता एवं सशक्तिकरण को बढ़ाने के लिए लगातार अनुसंधान पर आधारित नवाचार के महत्व पर ज़ोर दिया। कृषि एवं उससे जुड़े सेक्टर में एर्गोनॉमिक्स और सुरक्षा पर एआईसीआरपी की XVII सालाना कार्यशाला ओयूएटी, भुवनेश्वर, में हुई।

शुरुआती सत्र की अध्यक्षता डॉ. एस.एन. झा, उप-महानिदेशक (कृषि अभियांत्रिकी), भाकृअनुप, ने की तथा सह अध्यक्षता सहायक महानिदेशक (कृषि अभियांत्रिकी), भाकृअनुप, डॉ. के.पी. सिंह और डॉ. सी.आर. मेहता, निदेशक, भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (भाकृअनुप-सीआईएई), भोपाल, ने की।
सेशन की अध्यक्षता करते हुए, डॉ. एस.एन. झा ने हिस्सा लेने वाले केन्द्रों से उपलब्धि आधारित अनुसंधान, मापन योग्य के दस्तावेजीकरण तथा प्रमाणित तकनीकी के बड़े पैमाने पर प्रदर्शन पर फोकस करने की अपील की। उन्होंने फार्म यंत्रीकरण को ज़्यादा सुरक्षित तथा व्यावहारिक बनाने के लिए एर्गोनॉमिक और सुरक्षित प्रदर्शन की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
डॉ. के.पी. सिंह ने राष्ट्रीय कृषि बदलाव में एर्गोनॉमिक्स और सुरक्षित अनुसंधान के रणनीतिक महत्व पर ज़ोर दिया तथा मजबूत क्षेत्रीय प्रमाणीकरण तथा प्रभावी दस्तावेजीकरण की मांग की। उन्होंने खेती में महिलाओं की बढ़ती भूमिका तथा सही सुरक्षा मानक तथा एर्गोनॉमिक समाधान की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।
डॉ. सी.आर. मेहता ने बड़ी खेती की मशीनरी के लिए एर्गोनॉमिक समाधान विकसित करने की अहमियत पर ज़ोर दिया ताकि उनकी स्वीकार्यता तथा इस्तेमाल को बढ़ाया जा सके। उन्होंने खेती को आधुनिक बनाने तथा किसानों की भलाई में सुधार के लिए कृत्रिम मेधा, रोबोटिक, सेंसर और डेटा-ड्रिवन एनालिटिक्स की बदलाव लाने वाली क्षमता पर भी ज़ोर दिया।
जाने-माने विशेषज्ञ, डॉ. पी.के. नाग, पूर्व निदेशक, राष्ट्रीय व्यावसायिक स्वास्थ्य संस्थान, अहमदाबाद, और डॉ. एस.के. मोहंती, पूर्व अनुसंधान अभियंता, ओयूएटी ने प्रोजेक्ट के तहत सहयोगी केन्द्रों की प्रोग्रेस का रिव्यू किया। सीनियर अधिकारी, अनुसंधान अभियंता/प्रधान अन्वेषक, हिस्सा लेने वाले केन्द्रों के वैज्ञानिक तथा ओयूएटी के अधिकारी कार्यशाला में शामिल हुआ।
डॉ. निरंजन पांडा, डीन (अनुसंधान), ओयूएटी, ने स्वागत संबोधन दी, जिसमें उन्होंने खेती की अनुसंधान, नवाचार तथा टिकाऊ खेती के तरीकों में विश्वविद्यालय के योगदान पर ज़ोर दिया। प्रो. प्रवत कुमार राउल, कुलपति, ओयूएटी, ने यंत्रीकृत तथा संरक्षित खेती के तरीकों को बढ़ावा देने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि मशीनीकरण से सटीक आदान के साथ समय पर खेती का काम हो पाता है। उन्होंने किसानों को मजबूत बनाने में ईएसएएएस के लिए एआईसीआरपी के तहत डेवलप किए गए एर्गोनॉमिक प्रदर्शन तथा लिंग समावेशी उपकरण की भूमिका पर भी ज़ोर दिया।

शुरुआती सेशन के दौरान, डॉ. सुखबीर सिंह, परियोजना समन्वयक, ईएसएएएस के लिए एआईसीआरपी, भाकृअनुप-सिफे, भोपाल, ने प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर की रिपोर्ट पेश की, जिसमें खेती के एर्गोनॉमिक्स, सेफ्टी और कार्यात्मक क्षमता में हाल की तरक्की के बारे में बताया गया। उन्होंने खास उपलब्धि, प्रकाशन एवं विस्तार गतिविधि पर रोशनी डाली, और खेत में काम करने वालों की उत्पादकता और भलाई पर उनके असर पर ज़ोर दिया।
समन्वयक एवं सहयोगी केन्द्रों के प्रकाशन, जिसमें अनुसंधान हाइलाइट्स 2025–26, ईएसएएएस के लिए एआईसीआरपी (1996–2026) के तहत विकास की गई तकनीकी तथा प्रदर्शन पर एक तकनीकी बुलेटिन, साथ ही लीफलेट तथा सफलता की कहानियां शामिल हैं, सत्र के शुरुआत के दौरान लोकार्पण किया गया।
दो दिन के प्रोग्राम में, तकनीकी, बिजनेस और योजना से संबंधित सत्र हुआ। 4–5 मार्च, 2025 को हुई XVI कार्यशाला के बाद 2025–26 के लिए सहयोगी केन्द्रों की उपलब्धि तथा विकास का अवलोकन किया गया। इस दौरान, तीन तकनीकी को व्यवसायीकरण किया गया, जबकि ईएसएएएस पर एआईसीआरपी के तहत प्रतिभागी केन्द्रों को एक पेटेंट एवं एक डिजाइन रजिस्ट्रेशन दिया गया।
अलग-अलग केन्द्रों के अनुसंधान अभियंताओं ने 2026–27 के लिए अपने समर्थित कार्य योजना एवं भविष्य का कार्य योजना भी प्रस्तुत किया।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल)







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