खेत बचाओ अभियान 2026 के तहत भाकृअनुप-एनबीएआईएम, मऊ ने सतत मृदा स्वास्थ्य के लिए सूक्ष्मजीवी जैव उर्वरकों को दिया बढ़ावा

खेत बचाओ अभियान 2026 के तहत भाकृअनुप-एनबीएआईएम, मऊ ने सतत मृदा स्वास्थ्य के लिए सूक्ष्मजीवी जैव उर्वरकों को दिया बढ़ावा

23 जून, 2026, मऊ, उत्तर प्रदेश

राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान 2026 के अंतर्गत भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि महत्त्वपूर्ण सूक्ष्मजीव ब्यूरो (भाकृअनुप–एनबीएआईएम), मऊ, ने आज उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद के कोपागंज विकासखंड के सहरोज गांव में किसान जागरूकता एवं विस्तार कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मृदा उर्वरता में सुधार, फसल उत्पादकता बढ़ाने तथा सतत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम के दौरान भाकृअनुप-एनबीएआईएम के वैज्ञानिकों ने एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, नियमित मृदा परीक्षण तथा पोषक तत्वों की उपलब्धता और फसल प्रदर्शन में सुधार के लिए सूक्ष्मजीवी प्रौद्योगिकियों को अपनाने के महत्व पर बल दिया। किसानों को लाभकारी सूक्ष्मजीवों की पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाने, मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने तथा लचीली और सतत कृषि प्रणालियों के निर्माण में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी गई।

ICAR-NBAIM, Mau Promotes Microbial Biofertilizers for Sustainable Soil Health under Khet Bachao Abhiyan 2026

वैज्ञानिकों ने बायो-एनपीके (Bio-NPK) के उपयोग का भी प्रदर्शन किया, जो भाकृअनुप-एनबीएआईएम द्वारा विकसित एक सूक्ष्मजीवी जैव उर्वरक है, जिसमें नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले, फॉस्फेट घुलनशील बनाने वाले तथा पोटाश घुलनशील बनाने वाले सूक्ष्मजीव शामिल हैं। कार्यक्रम में भाग लेने वाले किसानों को बायो-एनपीके उपलब्ध कराया गया तथा इसके उचित उपयोग और पोषक तत्वों के अवशोषण में सुधार, स्वस्थ पौध वृद्धि को बढ़ावा देने तथा फसल उत्पादन बढ़ाने में इसके लाभों के बारे में जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में सूक्ष्मजीवी जैव उर्वरकों की क्षमता पर प्रकाश डाला गया, जिन्हें मृदा स्वास्थ्य में सुधार, पोषक तत्वों के उपयोग का अनुकूलन, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा पर्यावरण-अनुकूल एवं जलवायु-सहिष्णु कृषि को समर्थन देने वाले सतत कृषि आदानों के रूप में प्रस्तुत किया गया।

जागरूकता कार्यक्रम में कुल 58 किसानों, जिनमें 38 पुरुष और 20 महिलाएं शामिल थीं, ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि महत्त्वपूर्ण सूक्ष्मजीव ब्यूरो, मऊ, उत्तर प्रदेश)

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