25 अगस्त, 2026, लखनऊ
उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड, नास (NAAS) लखनऊ क्षेत्रीय अध्याय और भाकृअनुप-राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (भाकृअनुप-एनबीएफजीआर), लखनऊ, द्वारा आज “लचीले जलीय पारिस्थितिकी तंत्रों और आजीविकाओं के लिए जैव विविधता संरक्षण की प्राथमिकताएं” विषय पर एक संयुक्त विचार-मंथन सत्र आयोजित किया गया।
मुख्य अतिथि, श्री नीरज कुमार, आईएफएस, सचिव, उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड, उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश में जलीय जैव विविधता तथा लचीली नदीय और आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण एवं पुनर्स्थापना के लिए प्राथमिक कार्रवाइयों की पहचान करने; जलीय जैव संसाधनों के सतत प्रबंधन के लिए विज्ञान-आधारित रणनीतियां विकसित करने; जैव विविधता संरक्षण को सतत मत्स्य पालन और आजीविकाओं के साथ एकीकृत करने के लिए हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने; तथा जैव विविधता शासन, अनुसंधान और क्षमता निर्माण के लिए नीतिगत सिफारिशें और एक रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया।
डॉ. काजल चक्रवर्ती, संयोजक, नास लखनऊ क्षेत्रीय अध्याय और निदेशक, भाकृअनुप-एनबीएफजीआर ने विकसित उत्तर प्रदेश के लिए मत्स्य पालन और जलीय कृषि के विकास की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।

विचार-मंथन कार्यक्रम को दो तकनीकी सत्रों (1. सतत मत्स्य पालन और लचीले पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जलीय जैव विविधता का संरक्षण और 2. जैव विविधता-आधारित आजीविकाओं को सुदृढ़ करना: तकनीकी और नीतिगत सहयोग) में संरचित किया गया था, जिसमें 5 प्रमुख विषय शामिल थे। इन विषयों में जलीय जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र की लचीलापन, सतत मत्स्य पालन, आजीविका विविधीकरण, तकनीकी सहयोग, नीति कार्यान्वयन, लैंगिक दृष्टिकोण और संस्थागत साझेदारी से संबंधित मुद्दों को संबोधित किया गया।
विषय 1 में ‘उत्तर प्रदेश के जलीय पारिस्थितिकी तंत्र और मत्स्य विविधता: स्थिति और संभावनाएं’ पर चर्चा की गई, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग के प्रतिनिधियों तथा मत्स्य और जलीय विज्ञान क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने भाग लिया।
विषय 2 में ‘आवास क्षरण, आक्रामक विदेशी प्रजातियों, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां एवं खतरे’ पर चर्चा की गई, जिसमें विशेषज्ञों, आईसीएआर संस्थानों के पूर्व निदेशकों, एक मत्स्य महाविद्यालय के डीन और उत्तर प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भाग लिया।
विषय 3 में ‘उत्तर प्रदेश में लचीले पारिस्थितिकी तंत्रों के लिए संरक्षण उपाय एवं पुनर्स्थापना तथा व्यावहारिक प्रबंधन की रणनीतियां’ पर चर्चा की गई, जिसमें पर्यावरण प्रबंधन, मत्स्य पालन, संरक्षण, पुनर्स्थापना और लचीले पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
विषय 4 में ‘देशी मछली पालन और सफलता की कहानियों के माध्यम से आजीविका विविधीकरण’ पर चर्चा की गई, जिसमें एक्वाप्रेन्योर्स, पूर्व प्रधान वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों तथा आईसीएआर-एनबीएफजीआर के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस सत्र में देशी मछली पालन, जलीय कृषि उद्यमिता, अनुसंधान, आजीविका विविधीकरण और सफल प्रथाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।

विषय 5 में ‘विकसित उत्तर प्रदेश की ओर: सरकारी एजेंसियों, शिक्षाविदों और मछली पकड़ने वाले समुदायों एवं किसानों के बीच साझेदारी और लैंगिक दृष्टिकोण का निर्माण’ पर चर्चा की गई, जिसमें वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों तथा किसान/मत्स्य उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस सत्र में सरकारी एजेंसियों, शिक्षाविदों, मछली पकड़ने वाले समुदायों और किसानों के बीच साझेदारी को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें लैंगिक दृष्टिकोण और समावेशी विकास पर विशेष जोर दिया गया।
चर्चाओं में विशेषज्ञों, जैव विविधता प्रबंधन समिति के सदस्यों और उत्तर प्रदेश के प्रगतिशील मछली किसानों ने भाग लिया, जिससे मत्स्य-आधारित आजीविकाओं और जैव विविधता संरक्षण के संबंध में जमीनी स्तर का दृष्टिकोण सामने आया।
विचार-मंथन सत्र का उद्देश्य उत्तर प्रदेश सरकार के लिए मछली जैव विविधता के सतत उपयोग और देशी मछली जर्मप्लाज्म के संरक्षण पर एक श्वेत पत्र और सिफारिशें तैयार करना था। इन सिफारिशों का उद्देश्य समुदाय-आधारित संरक्षण रणनीतियों, सतत मत्स्य प्रबंधन योजना, स्थानीय क्षमता निर्माण और जलीय जैव विविधता के दीर्घकालिक संरक्षण एवं सतत प्रबंधन के लिए सूचित नीतिनिर्माण में भी सहयोग करना है।
कार्यक्रम का संयोजन श्री नीरज कुमार, आईएफएस, सचिव, उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड और डॉ. काजल चक्रवर्ती, निदेशक, भाकृअनुप-एनबीएफजीआर एवं संयोजक, नास लखनऊ क्षेत्रीय अध्याय द्वारा किया गया।
विचार-मंथन सत्र में कुल 140 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, लखनऊ)







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