19 अगस्त, 2026, नई दिल्ली
मध्य प्रदेश विधानसभा की कृषि विकास समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-आईएआरआई), नई दिल्ली का दौरा किया, जिसका उद्देश्य संस्थान के अनुसंधान, प्रौद्योगिकियों तथा टिकाऊ और लचीली कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने की रणनीतियों के बारे में जानकारी प्राप्त करना था।
डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई, नई दिल्ली, ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. आर. एन. पडारिया, संयुक्त निदेशक (प्रसार), भाकृअनुप-आईएआरआई, द्वारा दौरे पर आए प्रतिनिधिमंडल के स्वागत से हुई, जिसके बाद डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई तथा श्री ठाकुर दास नागवंशी, मध्य प्रदेश विधानसभा की समिति के अध्यक्ष, ने प्रारंभिक संबोधन किया। प्रतिनिधियों और भाकृअनुप-आईएआरआई के वैज्ञानिकों के परिचय से समसामयिक कृषि प्राथमिकताओं पर संवाद और विचारों के आदान-प्रदान का अवसर मिला।
अपने संबोधन में डॉ. राव ने टिकाऊ कृषि-खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए संस्थान की उपलब्धियों और रणनीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने मध्य प्रदेश के प्रमुख कृषि मुद्दों और प्राथमिकताओं पर चर्चा की तथा इन चुनौतियों के समाधान में भाकृअनुप-आईएआरआई की प्रौद्योगिकियों और विशेषज्ञता की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से संस्थान द्वारा विकसित उच्च उपज देने वाली, जलवायु-लचीली और जैव-सुदृढ़ीकृत किस्मों तथा मध्य प्रदेश क्षेत्र के लिए उनकी संभावित उपयुक्तता पर प्रकाश डाला।

डॉ. राव ने जोर दिया कि आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने के लिए केवल खाद्य सुरक्षा ही नहीं, बल्कि पोषण सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने ऐसी प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रसार के महत्व पर प्रकाश डाला, जो कृषि उत्पादकता में वृद्धि के साथ-साथ बेहतर पोषण संबंधी परिणामों में योगदान दें। उन्होंने किसानों के लाभ के लिए मध्य प्रदेश में भाकृअनुप-आईएआरआई द्वारा की गई विभिन्न पहलों और अभियानों का भी उल्लेख किया।
मध्य प्रदेश विधानसभा की समिति के अध्यक्ष श्री ठाकुर दास नागवंशी ने कृषि प्रौद्योगिकियों और नवाचारों के विकास में भाकृअनुप-आईएआरआई के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने फसल अवशेष प्रबंधन और कीटनाशकों के उपयोग को मध्य प्रदेश के सामने मौजूद महत्वपूर्ण चुनौतियों के रूप में रेखांकित किया तथा इन मुद्दों के प्रभावी समाधान के लिए भाकृअनुप-आईएआरआई द्वारा विकसित अनुसंधान और तकनीकी हस्तक्षेपों से सीखने में समिति की रुचि व्यक्त की।
प्रतिनिधिमंडल को भाकृअनुप-आईएआरआई, नई दिल्ली के वैज्ञानिकों द्वारा कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रस्तुतियां दी गईं, जिनमें पूसा डीकंपोजर भी शामिल था। यह फसल अवशेषों के प्राकृतिक अपघटन की प्रक्रिया को तेज करता है और 20–25 दिनों के भीतर खेतों के पराली अवशेष को पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद में परिवर्तित करता है, जिससे पराली जलाने को रोकने में मदद मिलती है।
वैज्ञानिकों ने विभिन्न राज्यों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं और रुझानों की उपग्रह आधारित निगरानी पर भी प्रकाश डाला, जो प्रभावी फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपयुक्त उपायों और नीतियों के विकास में सहायता करती है। प्रस्तुतियों में खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए उच्च उपज देने वाली किस्मों, बागवानी फसलों के लिए प्रौद्योगिकियों, पौध संरक्षण प्रौद्योगिकियों तथा जल उपयोग दक्षता बढ़ाने वाली प्रौद्योगिकियों को भी शामिल किया गया। प्रस्तुतियों ने प्रतिनिधियों को इन क्षेत्रों में भाकृअनुप-आईएआरआई द्वारा विकसित किए जा रहे वैज्ञानिक दृष्टिकोणों, प्रौद्योगिकियों और नवाचारों की जानकारी प्रदान की।

कार्यक्रम में डॉ. सी. विश्वनाथन, संयुक्त निदेशक (अनुसंधान), भाकृअनुप-आईएआरआई, द्वारा समापन मंतव्य भी दिया गया।
क्षेत्र और प्रयोगशाला संबंधी जानकारी के एक भाग के रूप में प्रतिनिधिमंडल ने संरक्षण कृषि, एकीकृत कृषि प्रणाली, बायोमास इकाई तथा संरक्षित खेती प्रौद्योगिकी केंद्र से संबंधित अनुसंधान सुविधाओं और पहलों का दौरा किया। इन क्षेत्रों से जुड़े वैज्ञानिकों ने प्रतिनिधियों को चल रहे अनुसंधान और तकनीकी हस्तक्षेपों के बारे में जानकारी दी।
इस दौरे ने कृषि अनुसंधान संस्थानों और विधायी हितधारकों के बीच संवाद को मजबूत करने तथा किसानों और कृषि विकास से संबंधित वैज्ञानिक प्रौद्योगिकियों और नवाचारों की बेहतर समझ को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। संवाद ने क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान करने तथा टिकाऊ, उत्पादक और पोषण-संवेदनशील कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए कृषि अनुसंधान और तकनीकी हस्तक्षेपों का लाभ उठाने की संभावनाओं को भी रेखांकित किया।
(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)







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