महानिदेशक (भाकृअनुप) ने भारत के शूकर पालन क्षेत्र के लिए मजबूत सहयोग एवं रणनीतिक विजन का किया आह्वान

महानिदेशक (भाकृअनुप) ने भारत के शूकर पालन क्षेत्र के लिए मजबूत सहयोग एवं रणनीतिक विजन का किया आह्वान

19 जनवरी, 2026, गुवाहाटी

डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप), ने आज भाकृअनुप–राष्ट्रीय शूकर अनुसंधान संस्थान, गुवाहाटी, का दौरा किया। इस दौरे के दौरान, उन्होंने संस्थान के निदेशक, वैज्ञानिकों तथा कर्मचारियों के साथ बातचीत की और पिछले 24 वर्षों में हासिल की गई प्रमुख उपलब्धियों की समीक्षा की।

डॉ. जाट ने वैज्ञानिकों को बहुमूल्य मार्गदर्शन दिया, तथा आत्मनिर्भर भारत के विज़न के अनुरूप भविष्य-उन्मुख अनुसंधान पर ज़ोर दिया। उन्होंने अंतर-संस्थागत सहयोग को मज़बूत करने, भारत में सुअर उद्योग के मूल्यांकन पर व्यापक दस्तावेज़ीकरण विकसित करने एवं शूकर पालन क्षेत्र पर एक राष्ट्रीय स्थिति पत्र तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके दूरदर्शी एवं प्रेरक सुझावों ने वैज्ञानिकों और कर्मचारियों को इस क्षेत्र को मजबूत करने तथा राष्ट्रीय विकास में योगदान देने के उद्देश्य से नए विचारों उत्पत्ति हेतु उन्हें प्रेरित किया।

डॉ. विवेक कुमार गुप्ता, निदेशक, भाकृअनुप-एनआरसीपी, ने महानिदेशक का स्वागत किया तथा उन्हें शूकर और पोर्क उत्पादन के क्षेत्र में अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, क्षमता निर्माण और उद्यमिता संवर्धन में संस्थान के योगदान के बारे में जानकारी दी।

 

इस दौरे में डॉ. ए.के. नायक, उप-महानिदेशक (एनआरएम), भाकृअनुप; डॉ. बी.सी. डेका, कुलपति, असम कृषि विश्वविद्यालय; और डॉ. सी. तारा सत्यवती, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईएमआर, सहित अन्य लोग भी शामिल थे।

(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय शूकर अनुसंधान संस्थान, गुवाहाटी)

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