महाराष्ट्र में सतत मसाला उत्पादन पर राष्ट्रीय सम्मेलन में भाकृअनुप-सीआईएआरआई, श्री विजयपुरम की प्रौद्योगिकियों को मिली सराहना

महाराष्ट्र में सतत मसाला उत्पादन पर राष्ट्रीय सम्मेलन में भाकृअनुप-सीआईएआरआई, श्री विजयपुरम की प्रौद्योगिकियों को मिली सराहना

26 अगस्त, 2026, श्री विजयपुरम

भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजयपुरम ने 24–25 अगस्त, 2026 को महाराष्ट्र के दापोली स्थित डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ में आयोजित ‘वृक्षीय मसालों के सतत विकास के लिए नवोन्मेषी प्रौद्योगिकियों पर राष्ट्रीय सम्मेलन’ में बारहमासी मसालों के लिए अपने अभिनव अनुसंधान, प्रौद्योगिकियों और उन्नत रोपण सामग्री का प्रदर्शन किया।

सम्मेलन ने मसाला क्षेत्र के सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए ज्ञान, नवाचार और विचारों के आदान-प्रदान हेतु शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, उद्योग प्रतिनिधियों, किसानों, उद्यमियों और विद्यार्थियों को एक मंच प्रदान किया।

ICAR-CIARI, Sri Vijaya Puram Technologies Receive Appreciation at National Conference on Sustainable Spice Production in Maharashtra

विभिन्न मसाला फसलों पर भाकृअनुप-सीआईएआरआई द्वारा किए गए महत्वपूर्ण और अग्रणी अनुसंधान को मान्यता देते हुए, संस्थान को सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया और राष्ट्रीय सलाहकार समिति में भी इसका प्रतिनिधित्व किया गया। वैज्ञानिक सत्रों के दौरान ‘उष्णकटिबंधीय खाड़ी द्वीपों से बारहमासी मसालों में वैज्ञानिक हस्तक्षेप’ विषय पर एक प्रमुख व्याख्यान दिया गया, जिसमें बारहमासी मसाला फसलों के लिए संस्थान की अनुसंधान उपलब्धियों और तकनीकी हस्तक्षेपों पर प्रकाश डाला गया।

प्रस्तुति में भाकृअनुप-सीआईएआरआई द्वारा विकसित कई उन्नत किस्मों और जर्मप्लाज्म को प्रदर्शित किया गया, जिसमें वुडी पेपर जर्मप्लाज्म INGR25029; द्वीप तेज 1, देश में विकसित पहली भारतीय तेजपत्ता किस्म; मालाबार इमली की उन्नत किस्में, द्वीप अग्रिम और द्वीप विशाल; तथा दालचीनी के विशिष्ट अभिगम शामिल थे। आईसीएआर-सीआईएआरआई में दालचीनी और तेजपात के लिए विकसित फसल सुधार और प्री-ब्रीडिंग दृष्टिकोणों को भी देशभर के शोधकर्ताओं और हितधारकों के लाभ के लिए रेखांकित किया गया।

संस्थान द्वारा विकसित विभिन्न मसाला-आधारित प्रौद्योगिकियों को भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें मसाला-आधारित फसल प्रणालियां; दालचीनी, वुडी पेपर और तेजपात के लिए प्रसार तकनीकें; द्वीप गूटी 365, बारहमासी मसालों के वर्षभर प्रसार के लिए एक नवीन दृष्टिकोण; और वुडी पेपर की संरक्षित खेती शामिल हैं। मसाला नर्सरी उत्पादन से जुड़े विश्वविद्यालयों और संस्थानों को सतत नर्सरी उत्पादन प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए भाकृअनुप-सीआईएआरआई द्वारा चिन्हित कॉयर-आधारित सब्सट्रेट को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

ICAR-CIARI, Sri Vijaya Puram Technologies Receive Appreciation at National Conference on Sustainable Spice Production in Maharashtra

प्रदर्शनी का एक प्रमुख आकर्षण द्वीप सिनरब था, जो भाकृअनुप-सीआईएआरआई द्वारा विकसित एक अभिनव दालचीनी छाल रगड़ने का उपकरण है। इस उपकरण ने दालचीनी की कटाई से जुड़े श्रम और शारीरिक कठिनाई को कम करने की अपनी क्षमता के कारण सम्मेलन के प्रतिनिधियों और आगंतुकों के बीच काफी रुचि आकर्षित की।

इस प्रौद्योगिकी को डॉ. संजय भावे, कुलपति, डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ, दापोली के साथ भी साझा किया गया, जिन्होंने दालचीनी की कटाई में होने वाली शारीरिक कठिनाई को कम करने के लिए समयानुकूल नवाचार की सराहना की। उन्होंने व्यावसायीकरण के लिए द्वीपों के एक युवा उद्यमी को प्रौद्योगिकी का लाइसेंस देने की पहल की भी सराहना की, जिसका उद्देश्य देशभर के अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए इस उपकरण को सुलभ बनाना है। विश्वविद्यालय के पादपेशन, मसाले, औषधीय एवं सुगंधित फसल विभाग के अंतर्गत फार्म में दालचीनी की कटाई करने वाले श्रमिकों को द्वीप सिनरब का आगे प्रदर्शन भी किया गया।

वैज्ञानिक संवादों ने देश के विभिन्न हिस्सों से आए सम्मेलन प्रतिनिधियों और विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों के बीच गहरी रुचि उत्पन्न की। प्रतिभागियों ने व्यक्त किया कि आईसीएआर-सीआईएआरआई द्वारा प्रदर्शित कई प्रौद्योगिकियों में अपने-अपने क्षेत्रों में मसाला उत्पादकों और अन्य हितधारकों को लाभ पहुंचाने की क्षमता है।

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सम्मेलन के अनुवर्ती कार्यक्रम के रूप में, 26 अगस्त, 2026 को विश्वविद्यालय के 150 से अधिक स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट विद्यार्थियों के लिए एक अलग संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। सत्र कृषि क्षेत्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर केंद्रित था और विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर अंतर्दृष्टि एवं मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया गया।

डॉ. जय सुंदर, निदेशक (ए), भाकृअनुप-सीआईएआरआई ने संस्थान की प्रौद्योगिकियों की बढ़ती पहुंच पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि द्वीप पारिस्थितिकी तंत्र में विकसित नवाचार देश के विभिन्न हिस्सों में मसाला हितधारकों तक पहुंच रहे हैं।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजयपुरम)

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