मृदा स्वास्थ्य और सतत खेती को बढ़ावा देने के लिए रेवोरा, उत्तरी गोवा में खेत बचाओ अभियान (रबी 2026) का उद्घाटन

मृदा स्वास्थ्य और सतत खेती को बढ़ावा देने के लिए रेवोरा, उत्तरी गोवा में खेत बचाओ अभियान (रबी 2026) का उद्घाटन

22 अक्टूबर, 2026, गोवा

कृषि निदेशालय, आत्मा, उत्तरी गोवा, गोवा सरकार, वनराई एनजीओ ने भाकृअनुप-कृषि विज्ञान केन्द्र, भाकृअनुप-केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा के सहयोग से आज उत्तरी गोवा के बारदेज तालुका के रेवोरा में खेत बचाओ अभियान (केबीए-रबी 2026) के उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन, सतत फसल उत्पादन तथा कृषि उत्पादकता एवं लाभप्रदता बढ़ाने के लिए पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के बारे में संवेदनशील बनाना था।

मृदा स्वास्थ्य, उर्वरकों के संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग, सतत पोषक तत्व प्रबंधन, जल एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, प्राकृतिक खेती तथा जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने में खेत बचाओ अभियान के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

Khet Bachao Abhiyan (Rabi 2026) Inaugurated at Revora, North Goa to Promote Soil Health and Sustainable Farming

किसानों को सब्जियों और दलहनों जैसी रबी फसलों के लिए मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। गुणवत्तापूर्ण बीज और कीट एवं रोग मुक्त रोपण सामग्री के चयन, बीज एवं पौध उपचार, जैव उर्वरकों और जैव कीटनाशकों के मृदा में प्रयोग तथा मिर्च और लोबिया के लिए एकीकृत जल, खरपतवार, कीट एवं रोग प्रबंधन पद्धतियों के साथ संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर भी जोर दिया गया।

सतत कृषि में गोबर और गोमूत्र के उपयोग पर चर्चा की गई तथा पर्यावरण-अनुकूल तथा कम लागत वाली कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में स्थानीय रूप से उपलब्ध पशुधन संसाधनों के महत्व पर प्रकाश डाला गया। गोबर का उपयोग फार्मयार्ड खाद और कम्पोस्ट तैयार करने के लिए करने के साथ-साथ जैविक खेती के फॉर्मूलेशन में गोमूत्र के संभावित उपयोग पर जोर दिया गया। पशुधन अपशिष्ट का एक मूल्यवान पोषक संसाधन के रूप में पुनर्चक्रण मृदा स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है, बाहरी कृषि आदानों पर निर्भरता कम कर सकता है और एकीकृत फसल-पशुधन कृषि प्रणालियों को बढ़ावा दे सकता है।

कृषि से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की गई, जिसमें मृदा स्वास्थ्य में सुधार और अतिरिक्त आय उत्पन्न करने के लिए कृषि अपशिष्ट के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया गया। जलवायु-अनुकूल फसल उत्पादन, सिंचाई संसाधनों के कुशल उपयोग और गुणवत्तापूर्ण सब्जी पौध उत्पादन के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।

Khet Bachao Abhiyan (Rabi 2026) Inaugurated at Revora, North Goa to Promote Soil Health and Sustainable Farming

पंचायत स्तर पर की जाने वाली विभिन्न कृषि गतिविधियों पर चर्चा की गई, जिनमें गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री और बीजों का उत्पादन, पोषक तत्व प्रबंधन और अन्य कृषि पहल शामिल थीं। प्रगतिशील किसानों ने आसपास के गांवों में इन पद्धतियों को व्यापक रूप से अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु अपने अनुभव साझा किए।

आसपास की पांच ग्राम पंचायतों के 24 पुरुष और 38 महिला प्रतिभागियों सहित कुल 62 किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया और लाभान्वित हुए। कार्यक्रम में कृषि निदेशालय, आत्मा उत्तरी गोवा, वनराई एनजीओ के अधिकारी और डीआरडीए के वरिष्ठ सीआरपी, रेवोरा पंचायत सचिव और सदस्य भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम के हिस्से के रूप में प्रतिभागियों को आत्मा, उत्तरी गोवा द्वारा मिर्च और पालक के बीज, वनराई एनजीओ द्वारा कम्पोस्ट तथा आईसीएआर-केवीके, सीसीएआरआई, उत्तरी गोवा द्वारा ढैंचा के बीज वितरित किए गए।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा)

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