5 जनवरी, 2026, कटक
प्रशासनिक और वित्तीय मामलों पर दूसरी जोनल बैठक आज भाकृअनुप–केन्द्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, कटक, में आयोजित की गई, जिसका आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने किया। बैठक की अध्यक्षता डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप) ने की।
डॉ. जाट ने “टीम भाकृअनुप” पर अपना दृष्टिकोण रखा तथा सामूहिक जिम्मेदारी और संस्थागत मजबूती पर ज़ोर दिया। इसके बाद भाग लेने वाले संस्थानों द्वारा उठाए गए विभिन्न प्रशासनिक और वित्तीय मुद्दों पर विषयगत चर्चा की गई।

दोपहर सत्र के दौरान, डॉ. एम.एल. जाट ने भाकृअनुप–सीआरआरआई के स्टाफ सदस्यों के साथ बातचीत की तथा वर्ष 2025 के दौरान हासिल की गई महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, खासकर चावल उत्पादन में भारत की प्रगति, जिसने चीन को पीछे छोड़ दिया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन एवं मिट्टी के स्वास्थ्य में गिरावट सहित उभरती चुनौतियों पर भी चर्चा की और कौशल विकास तथा प्रतिभा विकास के माध्यम से रणनीतिक तैयारी, नवाचार एवं निरंतर क्षमता निर्माण के महत्व पर जोर दिया।
इसके बाद, डॉ. डी.के. यादव, उप-महानिदेशक (फसल विज्ञान), भाकृअनुप, ने जीनोम एडिटिंग टेक्नोलॉजी, बदलते जलवायु परिदृश्यों के तहत चावल उत्पादन, और एकीकृत कीट प्रबंधन रणनीतियों पर एक संबोधन दिया।
डॉ. ए.के. नायक, उप-महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) ने पिछले एक दशक में भाकृअनुप-सीआरआरआई की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और संस्थान की निरंतर प्रगति और एक उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं।

डॉ. जी.ए.के. कुमार, निदेशक, भाकृअनुप-सीआरआरआई, कटक, ने संस्थान के इतिहास और प्रमुख उपलब्धियों का संक्षिप्त अवलोकन प्रस्तुत किया।
बैठक एक सकारात्मक नोट पर समाप्त हुई, जिसने कृषि अनुसंधान में उत्कृष्टता और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के प्रति भाकृअनुप की प्रतिबद्धता को मजबूत किया।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, कटक)







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