7 जनवरी, 2026, ओडिशा
भाकृअनुप-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर, द्वारा पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा निदेशालय, ओडिशा, के पशु चिकित्सा अधिकारियों के साथ “पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन में प्रगति” विषय पर एक इंटरफ़ेस बैठक का आयोजन किया गया। हाइब्रिड मोड में आयोजित इस कार्यक्रम में पूरे राज्य के प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई।

मुख्य अतिथि, श्री सुरेश कुमार वशिष्ठ, भारतीय प्रशानिक सेवा, प्रधान सचिव, मत्स्य पालन और एआरडी विभाग, ओडिशा सरकार, ने विकसित तथा आत्मनिर्भर ओडिशा के विज़न को प्राप्त करने हेतु पशुधन क्षेत्र में वैक्सीन विकास, गुणवत्ता मूल्यांकन एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने में मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि ओडिशा एक उभरता हुआ राज्य है और पशुधन एक उभरता हुआ क्षेत्र है साथ ही आईवीआरआई को ओडिशा के पशुधन क्षेत्र के विकास में एक ज्ञान भागीदार के रूप में काम करना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि, श्री विजय अमृता कुलंगे, भारतीय प्रशानिक सेवा, निदेशक, एच एवं वीएस, ओडिशा, ने संस्थान की पहल की सराहना की और "2036 तक विकसित ओडिशा" के ओडिशा के विज़न पर जोर दिया, जिसमें सरकार का डेयरी, मुर्गी पालन, शूकर पालन, बकरी पालन तथा संबद्ध क्षेत्रों पर ध्यान तथा राज्य के पशुधन विकास और किसानों के सशक्तिकरण में निरंतर प्रगति के लिए वीओटीआई प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकी वितरण के माध्यम से आईवीआरआई के साथ निरंतर जुड़ाव के महत्व पर प्रकाश डाला।
डॉ. त्रिवेणी दत्त, निदेशक-सह-कुलपति, भाकृअनुप-आईवीआरआई ने समारोह की अध्यक्षता की, जिन्होंने अनुसंधान, विस्तार और शिक्षण में भाकृअनुप-आईवीआरआई की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और निरंतर पशु चिकित्सा शिक्षा के तहत आईवीआरआई प्रौद्योगिकियों, सुविधाओं, जैविक उत्पादों तथा शैक्षिक पहलों के बारे में बात की। उन्होंने उपस्थित लोगों को यह भी बताया कि आईवीआरआई ने पहले के हितधारकों की प्रतिक्रिया और पिछले इंटरफेस के आधार पर रणनीतिक दस्तावेज विकसित किए हैं, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र में अपने योगदान को बढ़ाना है।
डॉ. रूपासी तिवारी, संयुक्त निदेशक (विस्तार शिक्षा), भाकृअनुप-आईवीआरआई, ने बैठक में पशु चिकित्सा अधिकारियों द्वारा पशु रोगों के निदान और उपचार में आने वाली प्रमुख चुनौतियों को प्रस्तुत किया।
उन्होंने पशु चिकित्सा पेशेवरों के लिए विशिष्ट क्षेत्र केन्द्रित क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कई रिसर्च करने लायक फील्ड इश्यू की पहचान की गई, जैसे एफएमडी, एलएसडी, पॉक्स वायरस के लिए स्ट्रेन एनालिसिस और आउटब्रेक मैपिंग, वन हेल्थ के तहत ज़ूनोटिक सर्विलांस, मल्टीवैलेंट का डेवलपमेंट, एएमआरर डेटाबेस बनाना, दवा की क्वालिटी का असेसमेंट वगैरह शामिल है। पशु उत्पादन में अन्य मुद्दों में जीनोमिक सिलेक्शन, देसी नस्लों का संरक्षण, मिनरल की कमी की मैपिंग, जल्दी प्रेगनेंसी का पता लगाना वगैरह शामिल है।
टेक्निकल सेशन-I में भाकृअनुप-आईवीआरआई फैकल्टी मेंबर्स द्वारा चार लेक्चर दिया गया, जिसमें असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) में प्रगति, उभरती और फिर से उभरती पशुधन बीमारियां, वन हेल्थ के नजरिए से एएमआर तथा भाकृअनुप-आईवीआरआई टेक्नोलॉजी शामिल थीं।

टेक्निकल सेशन II को एक इंटरैक्टिव चर्चा के रूप में आयोजित किया गया था जिसमें प्रतिभागियों ने फील्ड की ज़रूरतों पर प्रकाश डाला जैसे रैपिड डायग्नोस्टिक किट, एएमआरर टेस्टिंग सुविधाएं, रेजिस्टेंस का पता लगाने के तरीके, वैक्सीन का कमर्शियलाइज़ेशन, टिक मैनेजमेंट, और पारंपरिक नियंत्रण उपायों के लिए देसी विकल्प पर विमर्श किया गया।
विशेषज्ञों ने एलएसडी, पीपीआर, बार-बार ब्रीडिंग, थन फाइब्रोसिस, रेबीज ओरल वैक्सीन, एंटी-स्नेक वेनम, तथा पूल्ड-सैंपलिंग आधारित सर्विलांस से संबंधित सवालों के जवाब दिया, जबकि रिपोर्टर्स ने कार्रवाई योग्य सिफारिशों को रिकॉर्ड किया गया।
इस मीटिंग में ओडिशा निदेशालय के अधिकारियों, भाकृअनुप-आईवीआरआई फैकल्टी मेंबर्स, स्टाफ और छात्रों सहित कुल 502 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर)







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