परिचय
भारतीय राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली (NARS) कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में वैज्ञानिक ज्ञान के सृजन तथा कृषक समुदाय हेतु उपयुक्त प्रौद्योगिकियों के विकास में अग्रणी रही है। कृषि के अग्रणी क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी विकास के लिए आधारभूत, सामरिक एवं अनुप्रयुक्त अनुसंधान का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। इसकी महत्ता को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने कृषि समस्याओं के तात्कालिक, दीर्घकालिक एवं भावी समाधान हेतु आधारभूत एवं सामरिक अनुसंधान क्षमता निर्माण के उद्देश्य से एक राष्ट्रीय कोष की स्थापना की। इससे देशभर के विभिन्न विषयों एवं संस्थानों में उपलब्ध विशेषज्ञताओं के मध्य साझेदारी विकसित करने में सहायता मिलेगी तथा भारत को अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान किया जा सकेगा।
इस कोष का नाम “कृषि में आधारभूत, सामरिक एवं अग्रणी अनुप्रयोग अनुसंधान हेतु राष्ट्रीय कोष” (National Fund for Basic, Strategic and Frontier Application Research in Agriculture – NFBSFARA) रखा गया। दशम एवं एकादश पंचवर्षीय योजनाओं के दौरान प्राप्त अनुभवों, उपलब्धियों एवं विकसित आधार को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), नई दिल्ली ने NFBSFARA के व्यापक दृष्टिकोण एवं कार्यक्षेत्र को विकसित करने का निर्णय लिया। यह अनुभव किया गया कि एक सुदृढ़ एवं सतत मंच राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, क्षमता एवं अनुसंधान संस्कृति को विकसित करने में सहायक होगा, जिससे कृषि समस्याओं के समाधान हेतु ज्ञान एवं उपयुक्त अग्रणी प्रौद्योगिकियों का सतत प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके तथा कृषि क्षेत्र में विज्ञान-आधारित नीतिगत सुझाव उपलब्ध कराए जा सकें। इसी आवश्यकता के अनुरूप द्वादश पंचवर्षीय योजना के दौरान इस कोष का नाम परिवर्तित कर “राष्ट्रीय कृषि विज्ञान कोष” (National Agricultural Science Fund – NASF) कर दिया गया।
उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि में आधारभूत, सामरिक एवं अत्याधुनिक अनुप्रयोग अनुसंधान हेतु क्षमता निर्माण करना तथा उन समस्याओं का समाधान करना है जिन्हें विभिन्न संगठनों/संस्थानों की संयुक्त टीमों द्वारा गहन आधारभूत एवं सामरिक अनुसंधान के माध्यम से हल किया जा सके। इस उद्देश्य के अंतर्गत निम्नलिखित लक्ष्य सम्मिलित हैं:
- अनुसंधान एवं अनुसंधान संस्कृति को प्रोत्साहित करना, जिससे वैज्ञानिक ज्ञान की सीमाओं का विस्तार करते हुए कृषि की वर्तमान, संभावित एवं अप्रत्याशित समस्याओं का प्रभावी समाधान किया जा सके।
- परियोजनाओं के माध्यम से विज्ञान में व्यापक साझेदारी विकसित कर राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली की क्षमता को सुदृढ़ करना।
- कृषि से संबंधित विज्ञान में ज्ञान-वृद्धि का भंडार तैयार करना तथा कृषि में आधारभूत एवं सामरिक अनुसंधान के राष्ट्रीय महत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।
- कृषि में आधारभूत एवं सामरिक अनुसंधान के उपयोग हेतु नीति-निर्माताओं को नीतिगत सहयोग प्रदान करना।
- जागरूकता, प्राथमिकता निर्धारण, वैज्ञानिक लोकप्रियकरण एवं संबंधित विषयों हेतु कार्यशालाओं, संगोष्ठियों एवं सम्मेलनों का आयोजन करना।
विजन
वैज्ञानिक ज्ञान की वर्तमान सीमाओं एवं उससे आगे की अग्रणी विज्ञान का उपयोग कर कृषि विकास एवं किसानों की समृद्धि के लिए वैज्ञानिक ज्ञान के सतत संवर्धन को सुनिश्चित करना।
मिशन
अग्रणी विज्ञान एवं राष्ट्रीय वैज्ञानिक प्रतिभाओं का उपयोग करते हुए विस्तारित राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली की समस्या-समाधान क्षमता को बढ़ाना तथा भारतीय कृषि के लिए एक गतिशील ज्ञान-आधार का विकास करना।
NASF के रणनीतिक क्षेत्र
1. जैव प्रौद्योगिकी, जिसमें जीन संपादन, जीनोमिक्स, मेटाबोलोमिक्स एवं अन्य ओमिक्स तकनीकें (पौधों, पशुओं एवं मत्स्य क्षेत्र में)
जीनोमिक्स, जीनोमिक चयन, जीन/QTL मैपिंग एवं टैगिंग, एलील माइनिंग, जीनोमिक्स सहायतित प्रजनन (GAB), जनसंख्या जीनोमिक्स, ट्रांसजेनिक्स, न्यूट्रीजीनोमिक्स, आनुवंशिक संसाधनों की विविधता संवर्धन, जैव सुदृढ़ीकरण मूल्यांकन, जीनोम संपादन (CRISPR), RNA इंटरफेरेंस (RNAi), पशु क्लोनिंग, मेटाजीनोमिक्स, एपिजेनेटिक्स, मेटाबोलाइट इंजीनियरिंग, मेटाबोलोमिक्स डेटा एकीकरण, फेनोटाइपिंग, पोषक उपयोग दक्षता एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स।
2. पौधों, पशुओं एवं मत्स्य क्षेत्र में जैविक एवं अजैविक तनाव तथा गुणवत्ता गुण
सूखा सहनशीलता, लवणता प्रबंधन, तापमान प्रतिरोध, भारी धातुएँ, विकिरण, रोग एवं कीट प्रतिरोध, जैव सुरक्षा उपाय, पोषणीय तनाव प्रबंधन, आक्रामक प्रजातियों का नियंत्रण, प्रोबायोटिक्स एवं जलीय रोग प्रबंधन।
3. सटीक कृषि एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा फसलों, पशुओं एवं मत्स्य क्षेत्र में सेंसरों का उपयोग
संरक्षण कृषि, फसल विविधीकरण, फसल अवशेष प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन का प्रभाव आकलन, पूर्वानुमान एवं शमन, जल गुणवत्ता एवं उत्पादकता, मृदा स्वास्थ्य एवं मृदा-माइक्रोबायोम प्रबंधन, वर्टिकल फार्मिंग, संरक्षित कृषि, रिमोट सेंसिंग एवं उसके अनुप्रयोग, सेंसर प्रौद्योगिकी, ड्रोन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एवं मशीन लर्निंग (ML) आधारित तकनीकें, ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, परिवर्तनीय दर प्रौद्योगिकी (VRT), कटाई उपरांत एवं शून्य-अपशिष्ट प्रसंस्करण तकनीकें, डिजिटल ट्विन फार्मिंग तथा अंतरिक्ष कृषि।
4. कृषि में नैनो प्रौद्योगिकी
नैनो-डायग्नोस्टिक्स एवं मॉनिटरिंग सिस्टम, नैनो कृषि-इनपुट का डिज़ाइन एवं निर्माण, नैनो-सक्षम वितरण प्रणाली, एनकैप्सुलेशन तकनीकें, नैनो खाद्य प्रणाली, नैनो रेमेडिएशन एवं कृषि-नैनो उत्पादों की जैव सुरक्षा, नवीन गोदाम एवं परिवहन विधियाँ।
5. कृषि यंत्रीकरण एवं ऊर्जा
कृषि यंत्रीकरण, कृषि मशीनरी का डिजिटलीकरण, ऊर्जा के स्रोत एवं उपयोग, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत, कटाई उपरांत मूल्य संवर्धन मशीनरी, द्वितीयक प्रसंस्करण तकनीकें, नवाचारी स्वास्थ्य खाद्य पदार्थ, कृषि अपशिष्टों का उपयोग, नवीन परिवहन विधियाँ एवं पशुधन यंत्रीकरण।
6. कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में सामाजिक विज्ञान एवं नीतिगत अनुसंधान
कृषि उद्यमिता विकास एवं PPP मॉडल, कृषि विस्तार में नवाचारी मॉडलों का प्रदर्शन, सांख्यिकीय मॉडल एवं निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS), किसान/महिला किसान/कृषि युवा सशक्तिकरण, वर्तमान अनुसंधान-विस्तार समन्वय तंत्र की प्रभावशीलता, जलवायु-स्मार्ट पद्धतियों के प्रोत्साहन हेतु सामाजिक-आर्थिक एवं नीतिगत विश्लेषण, सतत कृषि एवं हरित क्रेडिट/हरित बैंकिंग, निर्यात प्रतिस्पर्धा एवं विपणन हेतु खाद्य वस्तुओं का मानचित्रण, वंचित क्षेत्रों हेतु उच्च तकनीकी अनुप्रयोगों एवं प्रभावी मीडिया एकीकरण पर अनुसंधान तथा लघु जुगाली करने वाले पशुओं, मत्स्य एवं कृषि वानिकी हेतु विस्तार रणनीतियाँ।
प्रकाशन
Contact
![]() | डॉ. यशबीर सिंह शिवाय, सहायक महानिदेशक, NASF; भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, राष्ट्रीय कृषि विज्ञान कोष, कृषि अनुसंधान भवन -I, नई दिल्ली - 110 012 Phone: (Off.) 91-011-25843521 E-mail: nationalfund1011@gmail.com, adgffc.icar@gov.in |








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