5 अगस्त, 2026, त्रिपुरा
कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), सिपाहीजाला, केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय (सीएयू-आई), त्रिपुरा ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, त्रिपुरा सरकार के सिपाहीजाला के उप कृषि निदेशक कार्यालय, कृषि विज्ञान स्नातकोत्तर अध्ययन महाविद्यालय (सीपीजीएस-एएस), सीएयू (आई), उमियाम, मेघालय तथा भाकृअनुप–भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान (आईआईएमआर), हैदराबाद के सहयोग से आज बिश्रामगंज स्थित सचिन देबबर्मन सामुदायिक भवन में किसान मेले का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, कृषक महिलाओं और ग्रामीण युवाओं को वैज्ञानिक अधिष्ठाता (मोटा अनाज) उत्पादन तकनीकों तथा सतत कृषि में मिलेट्स की भूमिका के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में श्री अन्न आधारित खेती के माध्यम से जलवायु-सहिष्णु कृषि को बढ़ावा देने और मूल्य संवर्धन द्वारा किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया।
यह कार्यक्रम डॉ. अनुपम मिश्रा, कुलपति, सीएयू, इम्फाल, के मार्गदर्शन तथा सीएयू, डॉ. एन. इबोयाइमा सिंह, निदेशक, प्रसार शिक्षा निदेशालय, इम्फाल, डॉ. ए.के. मोहंती, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, जोन-VII, उमियाम, मेघालय तथा सीएयू (आई), लेम्बुचेरा, प्रो. ए.बी. पटेल, अधिष्ठाता, मत्स्य महाविद्यालय, त्रिपुरा, के तकनीकी मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
किसान मेले का उद्घाटन सुश्री सुप्रिया दास दत्ता, सभाधिपति, सिपाहीजाला जिला परिषद द्वारा किया गया। इस अवसर पर श्री प्रदीप बरन रॉय, अध्यक्ष, ऑल त्रिपुरा फार्मर्स क्लब; डॉ. बिभास कांती डे, उप कृषि निदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, त्रिपुरा सरकार; सुश्री मनीषा दास, उप निदेशक (उद्यानिकी), बिशालगढ़; प्रो. ए.बी. पटेल; डॉ. शताभिषा सरकार, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, केवीके सिपाहीजाला सहित अन्य अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। अपने संबोधन में डॉ. बिभास कांती डे ने कृषि और समाज में किसानों के महत्व और योगदान पर प्रकाश डाला।
डॉ. द्विपेंद्र ठाकुरिया, अधिष्ठाता, सीपीजीएस-एएस, सीएयू (आई), बारापानी, मेघालय ने सतत कृषि तथा संतुलित उर्वरक उपयोग में श्री अन्न की भूमिका पर जोर दिया।
डॉ. एन. इबोयाइमा सिंह ने किसानों की आय बढ़ाने में श्री अन्न के मूल्य संवर्धन की संभावनाओं को रेखांकित किया, जबकि डॉ. अमूल्य कुमार मोहंती, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, जोन-VII, उमियाम (बारापानी), मेघालय ने स्थानीय रूप से उपयुक्त किस्मों और कृषि विज्ञान केन्द्रों की भूमिका पर चर्चा की, जो तकनीकी प्रसार के माध्यम से किसानों को अनुसंधान संस्थानों से जोड़ते हैं।
डॉ. सी.तारा सत्यवती, निदेशक, भाकृअनुप-भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान (आईआईएमआर), हैदराबाद ने संस्थान द्वारा मिलेट्स पर किए जा रहे कार्यों तथा किसानों की आय बढ़ाने में उनकी संभावनाओं की जानकारी दी।
श्री प्रदीप बरन रॉय ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में केवीके सिपाहीजाला के जमीनी स्तर के प्रयासों की सराहना की, जबकि सुश्री सुप्रिया दास दत्ता ने अधिकतम पहुंच और प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए संबद्ध विभागों के साथ समन्वय बढ़ाने पर बल दिया।
इस अवसर पर गोलाघाटी, बध्यारधिगी ग्राम पंचायत तथा चेसरिमाई ग्राम पंचायत के चार प्रगतिशील किसानों को उनकी नवाचारी कृषि पद्धतियों और कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सर्वश्रेष्ठ किसान पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
तकनीकी सत्र में श्री अन्न एवं फसल उत्पादन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। त्रिपुरा में श्री अन्न की खेती की अर्थव्यवस्था तथा संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि यह किसानों की आय बढ़ाने और जलवायु-सहिष्णु कृषि को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके अतिरिक्त खरीफ फसलों की उन्नत कृषि तकनीकों तथा कीट एवं रोग प्रबंधन की प्रभावी रणनीतियों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई।
किसान मेले में 200 से अधिक किसानों, कृषक महिलाओं और ग्रामीण युवाओं ने सक्रिय भागीदारी की तथा कृषि विशेषज्ञों के साथ संवाद किया। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने हेतु आईएआरआई की सब्जी बीज किट, सीएयू के जैव उर्वरक तथा फेरोमोन ट्रैप वितरित किए गए।
(स्रोत: कृषि विज्ञान केन्द्र, सिपाहीजाला, केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आई), त्रिपुरा)







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