8 फरवरी, 2026, बैरकपुर
केन्द्रीय कपड़ा मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने आज बैरकपुर में भाकृअनुप–केन्द्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान के रिसर्च फील्ड का दौरा किया और फ्लैक्स, रेमी, रोसेल और सिसल पर चल रहे अनुसंधान का रिव्यू किया।
इस दौरे के दौरान, मंत्री ने बताया कि सभी यूरोपीय देशों से काफी मात्रा में लिनन फाइबर आयात किया जाता है। उन्होंने कहा कि भाकृअनुप-क्रिजाफ द्वारा विकसित की गई नई तथा ज्यादा पैदावार वाली फ्लैक्स किस्मों के साथ-साथ उच्चस्तरीय उत्पादन तकनीकी की मौजूदगी से उच्च गुणवत्ता वाले फ्लैक्स रेशा की फायदेमंद खेती की बड़े पैमाने संभावनाएं है, जो किसानों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद एवं पर्यावरण के हिसाब से टिकाऊ दोनों होगी।

श्री सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि फ्लैक्स, रेमी एवं सिसल जैसे नए ज़माने के फाइबर को बढ़ावा देने से न केवल वस्त्र उद्योग में आयात विकल्प को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी। उन्होंने आगे कहा कि इन फाइबर में इंडस्ट्री के लिए कच्चे माल के स्रोत में विविधता लाकर, खासकर, देश भर में जूट-आधारित तथा दूसरे फसल व्यवस्था में वस्त्र रेशा परिदृश्य को बदलने की बहुत ज्यादा क्षमता है।
मंत्री को अलग-अलग अनुसंधान पहल के बारे में बताया गया, जिसमें नई फ्लैक्स वैरायटी का मूल्यांकन, फ्लेक्स-बेस्ड अन्तर फसली और फसल व्यवस्था, रैमी, सिसल अन्तर फसली प्रतिमान और कैलिक्स-प्रोड्यूसिंग रोसेल किस्म के नए रोपण एवं प्रदर्शन तरीके शामिल हैं।
भाकृअनुप-क्रिजाफ में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और अनुसंधानकर्ता के साथ एक रिव्यू मीटिंग भी हुई, जिसमें डॉ. गौरंगा कर, निदेशक, भाकृअनुप-क्रिजाफ, ने नए जमाने के फाइबर की संभावनाओं पर एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इकट्ठा हुए लोगों को संबोधित करते हुए, श्री गिरिराज सिंह ने नए ज़माने के फाइबर को बढ़ावा देने के मकसद से भारत सरकार की पहलों के बारे में बताया और सभी हितधारकों से नवाचार पर फोकस करने की अपील की ताकि ये फाइबर कॉटन के लिए ज़रूरी पूरक प्राकृतिक वस्त्र रेशा के तौर पर उभरें।

देश में भरपूर जर्मप्लाज्म रिसोर्स की मौजूदगी को दोहराते हुए, माननीय मंत्री ने फाइबर प्रोसेसिंग तकनीकी में तरक्की और उप-उत्पाद के इस्तेमाल से मूल्य संवर्धन की जरूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने भरोसा जताया कि लगातार अनुसंधान एवं उद्योग के साथ मिलकर काम करने से, भारत नए जमाने के प्राकृतिक वस्त्र रेशा में वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर सकता है।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)







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